कानपुर। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। शहर के नौबस्ता इलाके में एक पिता ने अपनी ही दो मासूम जुड़वा बेटियों की बेरहमी से हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी पिता ने खुद पुलिस को सूचना दी। जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो मंजर देख कर अनुभवी अधिकारियों की भी रूह कांप गई।

त्रिमूर्ति अपार्टमेंट में पसरा मातम: क्या है पूरा मामला?

​घटना नौबस्ता थाना क्षेत्र के किदवई नगर स्थित त्रिमूर्ति अपार्टमेंट की है। यहाँ ग्राउंड फ्लोर के फ्लैट संख्या G-4 में शशि रंजन मिश्रा अपनी पत्नी रेशमा छेत्री और तीन बच्चों—11 वर्षीय जुड़वा बेटियां रिद्धि व सिद्धि और 6 वर्षीय बेटे गन्नू के साथ रहता था। रविवार तड़के करीब 4:30 बजे पुलिस कंट्रोल रूम को एक कॉल मिली, जिसमें एक व्यक्ति ने शांत स्वर में कहा कि उसने अपनी बेटियों को मार डाला है।

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​जब पुलिस की टीम फ्लैट पर पहुंची, तो कमरे के फर्श पर रिद्धि और सिद्धि के लहूलुहान शव पड़े थे। पास में ही खून से सना हुआ चाकू बरामद हुआ। पुलिस ने मौके से आरोपी पिता शशि रंजन को गिरफ्तार कर लिया है, जो अपनी मृत बेटियों के पास ही बैठा हुआ था।

कैमरों की कैद में कैद थी ‘सनक’ और ‘शक’ की दास्तान

​शशि रंजन मिश्रा पेशे से एक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (MR) है। घर की तलाशी के दौरान पुलिस को जो दिखा, वह आरोपी की मानसिक स्थिति और उसकी शक्की प्रवृत्ति को उजागर करता है। शशि रंजन ने अपने छोटे से घर में 6 सीसीटीवी कैमरे लगवा रखे थे। घर के मुख्य दरवाजे से लेकर किचन और बेडरूम तक, हर गतिविधि पर उसकी नजर रहती थी।

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​उसकी पत्नी रेशमा ने रोते हुए बताया कि शशि अक्सर उस पर शक करता था। वह उसे अपने कमरे में भी नहीं आने देता था और बेटियों को हमेशा अपने पास ही रखता था। पत्नी का आरोप है कि वह अक्सर कहता था, “मेरी मां मर गई है, अब मैं भी मरना चाहता हूं और बेटियों को भी साथ ले जाऊंगा।”

प्रेम विवाह से नफरत की दीवार तक का सफर

​रेशमा ने पुलिस को बताया कि वह मूल रूप से सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) की रहने वाली हैं। 2014 में उनकी मुलाकात बिहार के रहने वाले शशि रंजन से कानपुर में हुई थी, जहां वे एक मेंस पार्लर में काम करती थीं। दोनों ने प्रेम विवाह किया था, लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही शशि शराब का आदी हो गया और मारपीट करने लगा।

​रेशमा के मुताबिक, शशि नींद की गोलियां भी लेता था और उसका व्यवहार दिनों-दिन हिंसक होता जा रहा था। वह उसे मायके भी नहीं जाने देता था। 9 महीने पहले जब रेशमा मायके गई भी, तो वह केवल बेटे को साथ ले जा पाई थी, क्योंकि शशि ने बेटियों को ‘बंधक’ की तरह अपने पास ही रोक लिया था।

वारदात की रात: 2:30 बजे बेटी को वॉशरूम ले गया था पिता

​घटना वाली रात को याद करते हुए पत्नी ने बताया कि रात में सब कुछ सामान्य लग रहा था। सबने साथ खाना खाया और शशि बेटियों को लेकर अपने कमरे में सोने चला गया। रात भर वह किसी से फोन पर लंबी बात करता रहा। रेशमा बाहर लगी स्क्रीन पर सीसीटीवी फुटेज में उसे देख रही थी।

​तड़के करीब 2:30 बजे शशि एक बेटी को लेकर वॉशरूम गया था, जिसके बाद वह वापस कमरे में लौट आया। रेशमा को अंदेशा भी नहीं था कि कुछ ही घंटों बाद वह अपनी मासूम बेटियों को हमेशा के लिए खो देगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हत्या की मुख्य वजह क्या है, यह विस्तृत पूछताछ और फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

निष्कर्ष: न्याय की गुहार और टूटते सामाजिक मूल्य

​यह घटना केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि हमारे समाज में बढ़ते मानसिक तनाव और घरेलू हिंसा का एक भयावह चेहरा है। एक पिता, जिसे रक्षक होना चाहिए था, वही भक्षक बन बैठा। आरोपी की पत्नी ने भरे गले से केवल एक ही मांग की है—”मेरे पति को आज ही फांसी दी जाए।” पुलिस फिलहाल मामले की हर पहलू से जांच कर रही है और अपार्टमेंट में लगे सीसीटीवी डीवीआर को कब्जे में ले लिया गया है।

पाठकों के लिए प्रश्न:

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