नई दिल्ली। ज्येष्ठ मास की तपती दोपहरी और फिजाओं में गूंजते ‘जय श्री राम’ और ‘जय हनुमान’ के जयकारे… यह संकेत है कि उत्तर भारत, विशेषकर लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों का प्रसिद्ध ‘बड़ा मंगल’ उत्सव शुरू हो चुका है। सनातन धर्म में मंगलवार का दिन वैसे भी बजरंगबली को समर्पित है, लेकिन जब यह ज्येष्ठ मास में पड़ता है, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

​मान्यता है कि त्रेता युग में इसी महीने के मंगलवार को भगवान हनुमान की मुलाकात पहली बार प्रभु श्री राम से हुई थी। वहीं एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, इसी समय हनुमान जी ने भीम का घमंड चूर करने के लिए एक वृद्ध वानर का रूप धरा था, इसलिए इसे ‘बुढ़वा मंगल’ भी कहा जाता है।

​ज्येष्ठ मास में बड़े मंगल का महत्व और पौराणिक आधार

​बड़ा मंगल केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सेवा और भक्ति का संगम है। हनुमान जी को कलियुग का जीवंत देवता माना जाता है। उन्हें अमरता का वरदान प्राप्त है, इसलिए भक्तों का विश्वास है कि इस दिन की गई उपासना सीधे उन तक पहुँचती है।

​ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन जातकों की कुंडली में मंगल दोष है या जिन्हें मानसिक अशांति घेरे रहती है, उनके लिए बड़ा मंगल किसी वरदान से कम नहीं है। इस माह में हनुमान जी की पूजा करने से साहस, आत्मविश्वास और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

​कब है दूसरा बड़ा मंगल? जानें शुभ मुहूर्त और तिथियां

​साल 2026 में ज्येष्ठ मास के सभी मंगलवार भक्तों के लिए खास होने वाले हैं। पहले मंगल के बाद अब श्रद्धालुओं की नजर दूसरे बड़े मंगल पर है।

  • दूसरा बड़ा मंगल तिथि: 12 मई 2026
  • दशमी तिथि प्रारंभ: 11 मई को दोपहर 03:24 बजे से।
  • दशमी तिथि समापन: 12 मई को दोपहर 02:52 बजे तक।
  • एकादशी तिथि का आगमन: 12 मई दोपहर 02:52 के बाद से एकादशी लग जाएगी।

​उदयातिथि के अनुसार, 12 मई को ही दूसरे बड़े मंगल का व्रत और विशेष पूजन किया जाएगा। इस दिन सुबह से ही मंदिरों में भक्तों का तांता लगना शुरू हो जाता है।

​हनुमान जी को प्रसन्न करने की विधि: कैसे करें पूजा?

​बड़े मंगल के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। लाल रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि लाल रंग हनुमान जी और मंगल ग्रह दोनों का प्रिय है।

  1. संकल्प: हाथ में जल लेकर व्रत या विशेष पूजा का संकल्प लें।
  2. चोला अर्पण: मंदिर जाकर हनुमान जी को चमेली के तेल में घुला हुआ सिंदूर (चोला) अर्पित करें। ऐसा माना जाता है कि चोला चढ़ाने से जीवन के बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं।
  3. पाठ: मंदिर के शांत कोने में बैठकर सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ करें। यदि संभव हो, तो बजरंग बाण का पाठ भी फलदायी होता है।
  4. भोग: प्रभु को बूंदी के लड्डू, इमरती या ऋतु फल (जैसे आम) का भोग लगाएं। याद रखें, हनुमान जी को तुलसी दल अत्यंत प्रिय है, इसलिए भोग में तुलसी का पत्ता जरूर रखें।

​सेवा और दान: बड़े मंगल की आत्मा है ‘भंडारा’

​बड़ा मंगल अपनी दान-पुण्य की परंपरा के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इस दिन सड़कों पर जगह-जगह प्याऊ और भंडारों का आयोजन होता है।

  • जल सेवा: ज्येष्ठ की गर्मी में प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य है। इस दिन जगह-जगह ठंडा जल, शरबत या शिकंजी बांटने से राहु-केतु के दोष शांत होते हैं।
  • अन्न दान: पूड़ी-सब्जी या हलवे का प्रसाद बांटने से घर में लक्ष्मी का वास होता है।
  • पशु-पक्षी सेवा: बंदरों को गुड़ और चना खिलाना हनुमान जी को सीधा प्रसन्न करने का तरीका माना गया है। साथ ही गाय को रोटी और गुड़ देना भी शुभ है।

​मंगल दोष निवारण के अचूक उपाय

​यदि आप कार्यक्षेत्र में बाधाओं या विवाह में देरी का सामना कर रहे हैं, तो बड़े मंगल के दिन ये उपाय जरूर करें:

  • ​हनुमान जी के चरणों का सिंदूर लेकर अपने माथे पर तिलक लगाएं।
  • ​”ॐ हं हनुमते नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • ​जरूरतमंदों को लाल कपड़ा या तांबे के बर्तन दान करें।

बड़ा मंगल श्रद्धा, सेवा और समर्पण का पर्व है। यह हमें सिखाता है कि भक्ति के साथ-साथ मानवता की सेवा ही ईश्वर की सच्ची पूजा है। चाहे आप व्रत रख रहे हों या नहीं, इस दिन किसी जरूरतमंद की मदद करना और मन में सात्विकता बनाए रखना आपको बजरंगबली के करीब ले जाएगा। ज्येष्ठ मास के ये मंगलवार आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मंगलकारी परिवर्तन लेकर आएं, यही हमारी मंगलकामना है।