उत्तर प्रदेश के आगरा से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने पशुपालकों और आम जनता को झकझोर कर रख दिया है। ताजनगरी में चंद पैसों के लालच में बेजुबान जानवरों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। आगरा पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए नकली खल (पशु आहार) बनाने वाले गिरोह के पांच सदस्यों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

​यह गिरोह शुद्ध खल के नाम पर बाजार में ऐसा जहर बेच रहा था, जिससे न केवल पशुओं की जान को खतरा था, बल्कि परोक्ष रूप से इंसानी सेहत पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता था। आइए जानते हैं कि पुलिस ने इस अवैध काले कारोबार का पर्दाफाश कैसे किया और यह गिरोह किस तरह इस घिनौने खेल को अंजाम दे रहा था।

​गुप्त सूचना पर पुलिस की त्वरित कार्रवाई

​यह पूरी कार्रवाई आगरा के थाना एकता क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम लाकावली में हुई। एसीपी ताज सुरक्षा मयंक तिवारी ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि 18 मई को पुलिस टीम क्षेत्र में नियमित चेकिंग और कानून व्यवस्था का जायजा ले रही थी। इसी दौरान मुखबिर से एक बेहद चौंकाने वाली सूचना मिली।

​सूचना यह थी कि लाकावली गांव के ही एक मकान में बड़े पैमाने पर अवैध और मिलावटी खल तैयार की जा रही है। मामले की गंभीरता और पशुओं के स्वास्थ्य से जुड़े खतरे को देखते हुए पुलिस ने बिना समय गंवाए एक विशेष टीम का गठन किया और बताए गए ठिकाने पर अचानक दबिश दे दी।

​छापेमारी में मिला अवैध सामानों का जखीरा

​जब पुलिस टीम ने लाकावली के उस मकान के भीतर कदम रखा, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। घर के भीतर बाकायदा एक अवैध फैक्ट्री चल रही थी, जहाँ शुद्ध पशु आहार में मिलाने के लिए पत्थरों को पीसा जा रहा था। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में मिलावटी सामग्री और इसे पैक करने वाले उपकरण बरामद किए हैं।

पुलिस द्वारा जब्त किए गए सामानों की सूची:

  • 32 बोरी साबुत पत्थर (पीसने के लिए रखा हुआ)
  • 40 बोरी बिना मिलावट वाली शुद्ध खल
  • 11 बोरी पूरी तरह से तैयार मिश्रित (नकली) खल
  • 19 खाली बोरियां (ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर पैकिंग के लिए)
  • लगभग 500 किलोग्राम खुला हुआ मिश्रण (पत्थर का पाउडर और खल का मिक्सचर)
  • ​पैकिंग मशीन, इलेक्ट्रॉनिक कांटा, स्प्रे मशीन, बेलचा, धागा रील और प्लास्टिक का तिरपाल।

​ये बरामदगी इस बात का साफ सबूत है कि यह नेटवर्क कितने संगठित तरीके से बाजार में नकली माल की सप्लाई कर रहा था।

​कैसे होता था मिलावट का यह खेल?

​गिरफ्तार आरोपियों से की गई शुरुआती पूछताछ में जो बातें सामने आई हैं, वे बेहद हैरान करने वाली हैं। यह गिरोह बाजार से कम दाम में घटिया या सामान्य खल खरीदता था। इसके बाद भारी मात्रा में सफेद और हल्के रंग के पत्थरों को कूटकर उसका बारीक पाउडर तैयार किया जाता था।

​मुनाफा कमाने के लिए ये लोग शुद्ध खल में इस पत्थर के पाउडर को एक निश्चित अनुपात में मिला देते थे। स्प्रे मशीन की मदद से इस पर नमी या विशेष गंध छिड़की जाती थी ताकि आम किसान या खरीदार को यह बिल्कुल असली और ताजी खल लगे। इसके बाद नामी कंपनियों की बोरियों जैसी दिखने वाली नकली बोरियों में इसे पैक करके बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता था।

​गिरफ्त में आए 5 आरोपी, सरगना समेत दो की तलाश जारी

​पुलिस ने मौके से अवैध कारोबार में लिप्त पांच आरोपियों को दबोच लिया है। पकड़े गए सभी आरोपी लाकावली गांव के ही निवासी हैं। गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान निम्नलिखित रूप में हुई है:

​दिलशाद, ​हरिओम,आकाश, ​नरेन्द्र, ​सूरज

पुलिस की कार्रवाई: “इस गिरोह के पांच सदस्यों को जेल भेजा जा रहा है। हालांकि, इस खेल के दो और मुख्य किरदार मदन और सुंदर पाल फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं और जल्द ही वे भी सलाखों के पीछे होंगे।” – मयंक तिवारी, एसीपी ताज सुरक्षा

​पशुओं की सेहत पर गंभीर संकट और कानूनी कार्रवाई

​कृषि और पशुपालन विशेषज्ञों के अनुसार, खल में पत्थर का पाउडर मिलाना पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। यह पाउडर पशुओं के पेट और आंतों में जमा हो जाता है, जिससे उनकी पाचन क्रिया पूरी तरह ठप हो जाती है। इसके कारण दुधारू पशुओं का दूध कम हो जाता है और धीरे-धीरे उनकी मौत भी हो सकती है।

​इस क्रूरता को देखते हुए आगरा पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम की धारा 11 (1) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके अलावा धोखाधड़ी और मिलावटखोरी की अन्य गंभीर धाराओं में भी कार्रवाई की जा रही है।