आगरा। मोहब्बत की नगरी आगरा में ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार पारंपरिक अकीदत, उत्साह और आपसी भाईचारे के साथ मनाया गया। सुबह की ठंडी हवाओं के बीच शहर की विभिन्न मस्जिदों और ऐतिहासिक शाही ईदगाह में हजारों मुस्लिमों ने एक साथ सिजदा किया और मुल्क में अमन-चैन, तरक्की व खुशहाली की दुआएं मांगी। एक तरफ जहाँ प्रशासन की मुस्तैदी और ड्रोन कैमरों की निगरानी में नमाज शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई, वहीं दूसरी तरफ नमाज के ठीक बाद ईदगाह के बाहर एक अनोखा नजारा देखने को मिला, जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

​शाही ईदगाह पर उमड़ा जनसैलाब, सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम

​गुरुवार की सुबह जैसे ही सूरज की पहली किरण जमीं पर पड़ी, आगरा की ऐतिहासिक शाही ईदगाह में अकीदतमंदों का ताँता लगना शुरू हो गया। सुबह ठीक 6:47 बजे शाही ईदगाह में ईद-उल-अजहा की मुख्य नमाज अदा की गई। आगरा पुलिस और जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात था।

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​कानून व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए पहली बार आधुनिक तकनीकों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल देखा गया। डीसीपी सिटी के नेतृत्व में पुलिस ने आसमान से ड्रोन कैमरों के जरिए भीड़ और संवेदनशील इलाकों की निगरानी की। नमाज मुकम्मल होते ही पूरा परिसर ‘ईद मुबारक’ के नारों से गूंज उठा। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी ने एक-दूसरे को गले लगाकर त्योहार की मुबारकबाद दी।

​नमाज के बाद उठी बड़ी मांग: ‘गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करे केंद्र सरकार’

​इस बार आगरा में ईद का माहौल सिर्फ त्योहार की खुशियों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि यहाँ से सामाजिक सौहार्द का एक बड़ा संदेश भी देश भर में गया। नमाज खत्म होने के बाद ‘उत्तर प्रदेश मुस्लिम पंचायत’ के कई पदाधिकारी और सदस्य अचानक ईदगाह के बाहर पोस्टर लेकर एकत्र हो गए। इन पोस्टर्स पर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग प्रमुखता से लिखी हुई थी।

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​मुस्लिम पंचायत के पदाधिकारियों ने दोटूक शब्दों में कहा कि गाय हमारी आस्था और संस्कृति का हिस्सा है। उन्होंने कहा, “कुछ गौ तस्कर और असामाजिक तत्व गौ माता पर अत्याचार करते हैं। आए दिन भूख और गंदगी की वजह से गाय माता सड़कों पर कूड़े के ढेर के पास बेसहारा पड़ी मिलती हैं। इस स्थिति को बदलना होगा।”

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“रहीम भी हमारे हैं, हमें राम भी प्यारे हैं। गाय का अपमान उत्तर प्रदेश का मुसलमान कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।”उत्तर प्रदेश मुस्लिम पंचायत

​’मॉब लिंचिंग से मचता है उपद्रव, फर्जी संगठन बंद हों’

​पोस्टर प्रदर्शन कर रहे मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने देश में होने वाली मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि कुछ तथाकथित संगठन गाय रक्षा के नाम पर अपनी दुकानें चला रहे हैं और करोड़ों रुपए की उगाही कर रहे हैं। ये लोग रक्षक के भेष में भक्षक बनकर देश का माहौल खराब करते हैं और उपद्रव मचाते हैं।

​पंचायत के सदस्यों ने जोर देकर कहा कि यदि केंद्र सरकार कानून बनाकर गाय को भारत का राष्ट्रीय पशु घोषित कर देती है, तो इसकी सुरक्षा सीधे तौर पर सरकारी एजेंसियों के हाथ में आ जाएगी। इससे न सिर्फ गायों की स्थिति सुधरेगी, बल्कि गाय के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग और राजनीति पर भी हमेशा के लिए लगाम लग जाएगी।

​ताज के साए में अदा हुई नमाज, विदेशी सैलानियों ने भी लिया हिस्सा

​शाही ईदगाह के अलावा विश्व प्रसिद्ध स्मारक ताजमहल के परिसर में स्थित ऐतिहासिक मस्जिद में भी ईद की रौनक देखते ही बन रही थी। भीषण गर्मी और तेज धूप के बावजूद सुबह करीब 8:45 बजे ताजमहल परिसर में नमाज अदा की गई। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की ओर से ईद के इस पाक मौके पर सुबह तीन घंटे के लिए पर्यटकों के लिए ताजमहल में प्रवेश पूरी तरह निशुल्क (फ्री) रखा गया था।

​ताजमहल की मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष सैयद इब्राहिम उस्ताद जैदी ने बताया कि अत्यधिक गर्मी के कारण इस बार नमाजियों की संख्या लगभग 10 हजार के आसपास रही, जो पिछली बार से थोड़ी कम थी। हालांकि, उत्साह में कोई कमी नहीं थी। इस दौरान नाइजीरिया और अन्य देशों से आए विदेशी पर्यटकों ने भी ताजमहल परिसर में रुककर नमाज के इस पावन दृश्य को देखा, तस्वीरें खींची और स्थानीय लोगों से गले मिलकर ईद की बधाई दी।

​सोशल मीडिया पर कड़ी नजर, 181 मस्जिदों में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई नमाज

​आगरा के डीसीपी सिटी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि केवल शाही ईदगाह या ताजमहल ही नहीं, बल्कि जिले की सभी 181 मस्जिदों में नमाज पूरी तरह शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। पुलिस की खुफिया शाखा (LIU) और सोशल मीडिया सेल लगातार सक्रिय रही, ताकि इंटरनेट या व्हाट्सएप के माध्यम से कोई भ्रामक अफवाह न फैलाई जा सके।

​प्रशासन ने साफ किया कि आगरा की जनता ने हमेशा से गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की है और इस बार भी ईदगाह के बाहर से उठी मांग और नमाज के बाद की तस्वीरें इसी भाईचारे को बयां करती हैं।