आगरा की गलियों में कभी गुमनाम जीवन जी रहे एक 80 वर्षीय दृष्टिबाधित बुजुर्ग आज देश भर में चर्चा का विषय बने हुए हैं। डॉ. संतोष गोयल, जिन्हें स्थानीय लोग अब ‘पीएचडी बाबा’ के नाम से पुकार रहे हैं, के दावों ने भारतीय सेना और प्रशासन के कान खड़े कर दिए हैं। नगला पदी के एक मंदिर में शरण लेकर जीवन काट रहे इस बुजुर्ग का दावा है कि वह कभी पुणे स्थित प्रतिष्ठित नेशनल डिफेंस अकादमी (NDA) में अंग्रेजी के शिक्षक थे। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद, भारतीय सेना की टीम उन्हें अपने साथ ले गई है और वर्तमान में उनका उपचार आगरा के मिलिट्री हॉस्पिटल (MH) में चल रहा है।

​सोशल मीडिया से मिली पहचान: जब अपर आयुक्त ने साझा किया वीडियो

​इस पूरी कहानी की शुरुआत तब हुई जब केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) आगरा के अपर आयुक्त अजय मिश्रा ने डॉ. संतोष गोयल का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर साझा किया। वीडियो में फटे-पुराने कपड़ों में दिखने वाले एक बुजुर्ग बेहद परिष्कृत अंग्रेजी बोलते नजर आए। उन्होंने बताया कि उन्होंने वर्ष 1971 में अंग्रेजी साहित्य में पीएचडी पूरी की थी।

​देखते ही देखते यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया। लोगों ने इस बात पर हैरानी जताई कि इतना शिक्षित व्यक्ति, जिसने देश के भविष्य के सैन्य अधिकारियों को शिक्षा दी हो, वह आज दाने-दाने को मोहताज होकर एक मंदिर में रहने को मजबूर है।

​NDA शिक्षक होने का दावा और संघर्ष की दास्तां

​डॉ. संतोष गोयल के अनुसार, उन्होंने खड़कवासला, पुणे स्थित एनडीए में लंबे समय तक अंग्रेजी पढ़ाई है। उनके द्वारा पढ़ाए गए कई छात्र आज सेना में लेफ्टिनेंट, कर्नल और ऊंचे पदों पर कार्यरत हैं। बाबा ने भावुक होते हुए बताया कि उनकी आंखों की रोशनी जाने की वजह से उन्हें अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी थी।

​वह कहते हैं, “अगर मेरी 15 साल की सर्विस पूरी हो जाती, तो आज मुझे 70-80 हजार रुपये पेंशन मिल रही होती और मुझे इस हाल में दर-दर नहीं भटकना पड़ता।” आंखों की रोशनी चले जाने और परिवार का साथ न होने के कारण वह आगरा के नगला पदी (न्यू आगरा) स्थित एक मंदिर में गुजर-बसर करने लगे। उनका दिन मंदिर में बीतता था और रात में वह किसी के घर के बाहर शरण लेते थे। भूख लगने पर पास के एक हलवाई के पास जाकर ढोकला या लड्डू खाकर अपना पेट भरते थे।

​सेना की सक्रियता: मिलिट्री हॉस्पिटल में उपचार और वेरिफिकेशन

​वीडियो वायरल होने के बाद भारतीय सेना की सैन्य पुलिस (Military Police) हरकत में आई। सेना की एक टीम नगला पदी पहुंची और बाबा से प्रारंभिक पूछताछ की। उनकी शारीरिक स्थिति और उम्र को देखते हुए सेना उन्हें अपने साथ ले गई और आगरा कैंट स्थित मिलिट्री हॉस्पिटल में भर्ती कराया।

​सूत्रों के मुताबिक, सेना अब डॉ. गोयल के दावों की गंभीरता से जांच कर रही है। उनके पुराने दस्तावेजों, एनडीए के रिकॉर्ड और उनके बताए गए सेवा काल का मिलान किया जा रहा है। अस्पताल में डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी आंखों और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का उपचार कर रही है।

​क्या वाकई गुमनामी में खो गया एक राष्ट्र निर्माता?

​यह मामला समाज की उस कड़वी हकीकत को भी उजागर करता है जहाँ एक उच्च शिक्षित व्यक्ति व्यवस्था की खामियों या व्यक्तिगत त्रासदी के कारण हाशिए पर चला जाता है। यदि डॉ. गोयल के दावे सही साबित होते हैं, तो यह सवाल खड़ा होता है कि आखिर इतने वर्षों तक एक पूर्व शिक्षक और बुद्धिजीवी प्रशासन की नजरों से कैसे ओझल रहा? स्थानीय निवासियों का कहना है कि बाबा स्वभाव से बहुत सरल हैं और हमेशा सम्मान के साथ बात करते हैं। उनकी विद्वत्ता उनकी भाषा और व्यवहार में साफ झलकती है।

​ सच्चाई का इंतजार

​आगरा के ‘पीएचडी बाबा’ की कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी लग सकती है, लेकिन इसके पीछे एक इंसान का सालों का संघर्ष और दर्द छिपा है। अब सबकी निगाहें सेना की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि उनके दावे सही पाए जाते हैं, तो निश्चित रूप से उन्हें वह सम्मान और सहायता मिलनी चाहिए जिसके वह हकदार हैं। प्रशासन और समाज को ऐसे ‘गुमनाम नायकों’ की पहचान करने के लिए और अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है।