
आगरा। उत्तर प्रदेश की ताजनगरी आगरा में प्रशासनिक फेरबदल के बाद अब व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने की कवायद तेज हो गई है। जनपद के नवागत जिलाधिकारी मनीष बंसल ने पदभार ग्रहण करने के महज 24 घंटे के भीतर ही अपने इरादे साफ कर दिए हैं। “बाबूशाही” और “सुस्ती” को किनारे कर डीएम बंसल सीधे जमीन पर उतर आए हैं। गुरुवार सुबह जब जिलाधिकारी अचानक जिला अस्पताल (एसएन मेडिकल कॉलेज के समीप) पहुंचे, तो वहां मौजूद स्टाफ और अधिकारियों में हड़कंप मच गया।
भक्ति के साथ शक्ति का संगम: पहले महादेव के दर्शन, फिर एक्शन

प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने से पहले मनीष बंसल ने आगरा की प्राचीन संस्कृति और आस्था को सम्मान दिया। उन्होंने कलेक्ट्रेट में कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व ऐतिहासिक श्रीमनःकामेश्वरनाथ मंदिर में माथा टेका। मुख्य महंत योगेश पुरी महाराज के सानिध्य में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर उन्होंने जनपद की खुशहाली और बेहतर सुशासन की कामना की। मंदिर से सीधे कोषागार पहुँचकर चार्ज लेने वाले डीएम का अगला पड़ाव जिला अस्पताल था, जिसकी किसी को भनक तक नहीं थी।
अस्पताल में अफरातफरी: ओपीडी की बदहाली पर बरसे डीएम

जब जिलाधिकारी मनीष बंसल जिला अस्पताल के ओपीडी ब्लॉक में दाखिल हुए, तो नजारा उम्मीद के उलट था। ओपीडी में बेतरतीब भीड़, लंबी लाइनें और सूचनाओं का अभाव देखकर डीएम का पारा चढ़ गया। उन्होंने देखा कि मरीज और उनके तीमारदार कमरों की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि अस्पताल का संचालन बेहद अव्यवस्थित तरीके से हो रहा है। इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने मौके पर ही सीएमएस (Chief Medical Superintendent) और अस्पताल मैनेजर को तलब किया। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि अस्पताल मरीजों की सेवा के लिए है, उन्हें परेशान करने के लिए नहीं।
“मरीजों को गाइड करें, भटकने न दें” – साइनेज और पेयजल पर जोर

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने सबसे ज्यादा ध्यान मरीजों की बुनियादी सुविधाओं पर दिया। उन्होंने पाया कि अस्पताल परिसर में दिशा-सूचक (Signages) की भारी कमी है। डीएम ने निर्देश दिए कि:
- अस्पताल के हर कोने पर स्पष्ट साइनेज लगाए जाएं, जिसमें ओपीडी का समय और डॉक्टरों के नाम लिखे हों।
- किस रोग का विभाग किस कमरे में है, इसकी जानकारी बड़े अक्षरों में प्रदर्शित की जाए।
- गर्मी के मौसम को देखते हुए हर तल पर ठंडे और स्वच्छ पेयजल की सुनिश्चित व्यवस्था हो।
डीएम ने स्पष्ट किया कि यदि कोई तीमारदार पानी या कमरे की जानकारी के लिए भटकता हुआ पाया गया, तो संबंधित वार्ड प्रभारी पर कार्रवाई होगी।
अधिकारियों को अंतिम चेतावनी: “मैं खुद आता रहूंगा”
जिला अस्पताल की खामियों को गिनवाते हुए मनीष बंसल ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “यह केवल एक औपचारिक निरीक्षण नहीं है। मैं दोबारा आऊंगा और तब तक आता रहूंगा जब तक कि आम आदमी को यहाँ सम्मानजनक इलाज न मिलने लगे।” उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आज की गई कमियों पर तुरंत सुधार किया जाए और अगले 48 घंटों के भीतर इसकी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
जनसुनवाई में कड़े तेवर: “शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों पर नहीं, धरातल पर दिखे”

जिला अस्पताल के निरीक्षण के उपरांत जिलाधिकारी मनीष बंसल ने कलेक्ट्रेट में ‘जनसुनवाई’ (Public Audience) के माध्यम से आम जनता से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने दूर-दराज से आए फरियादियों की समस्याओं को एक-एक कर सुना और मौके पर मौजूद संबंधित अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देशित किया।
डीएम ने स्पष्ट किया कि शासन की प्राथमिकता आम जनमानस की संतुष्टि है। उन्होंने अधिकारियों को निम्नलिखित कड़े निर्देश जारी किए:
- त्वरित और समयबद्ध समाधान: जिलाधिकारी ने कहा कि शिकायतों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। हर शिकायत का एक निश्चित समय-सीमा के भीतर निस्तारण सुनिश्चित हो।
- गुणवत्तापूर्ण निस्तारण: उन्होंने चेतावनी दी कि शिकायतों का निस्तारण केवल खानापूर्ति या कागजी आंकड़ों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। समाधान की गुणवत्ता ऐसी हो कि फरियादी को दोबारा उसी समस्या के लिए भटकना न पड़े।
- संवेदनशीलता और व्यवहार: सार्वजनिक सुनवाई के दौरान अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे जनता की बात को संवेदनशीलता के साथ सुनें और उनके साथ मानवीय व्यवहार अपनाएं।
नवागत जिलाधिकारी के इन निर्देशों से साफ है कि जिले में अब जनसमस्याओं के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की खैर नहीं होगी।
जनता में जगी उम्मीद की किरण
आगरा में जिलाधिकारी के इस “स्पॉट एक्शन” की चर्चा पूरे शहर में है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि मनीष बंसल की यह कार्यशैली जिले की स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार व सुस्ती पर लगाम लगाएगी। प्रशासनिक गलियारों में भी इस औचक निरीक्षण के बाद सतर्कता बढ़ गई है।
निष्कर्ष (Conclusion)
नवागत जिलाधिकारी मनीष बंसल का जिला अस्पताल में औचक निरीक्षण केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक संदेश है कि आगरा के शासन में अब ‘जवाबदेही’ सर्वोपरि होगी। मंदिर में आस्था और अस्पताल में सख्त अनुशासन दिखाकर उन्होंने संतुलित नेतृत्व का परिचय दिया है। अब देखना यह होगा कि अस्पताल प्रशासन इन निर्देशों का कितनी गंभीरता से पालन करता है।



