बढ़ते तापमान और बदलते मौसम के मिजाज के बीच आज धरती को बचाने की छटपटाहट हर तरफ देखी जा रही है। इसी कड़ी में, विश्व पर्यावरण दिवस के खास मौके पर ऐतिहासिक संस्थान आगरा कॉलेज, आगरा में पर्यावरण चेतना की एक नई इबारत लिखी गई। कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई द्वारा प्राचार्य प्रो. सी. के. गौतम के कुशल निर्देशन में न केवल पौधारोपण किया गया, बल्कि स्वच्छता अभियान और ‘सीड बॉल’ निर्माण जैसे लीक से हटकर कदम उठाए गए। इस आयोजन का एकमात्र मकसद था—आने वाली पीढ़ी को एक सांस लेने योग्य और हरा-भरा कल सौंपना।

​5000 पौधों को रोपने का महासंकल्प: हरी-भरी होगी ताजनगरी

​कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज परिसर में औषधीय और छायादार पौधों के रोपण के साथ हुई। मिट्टी की सोंधी खुशबू के बीच जब शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने मिलकर पौधे रोपे, तो परिसर का माहौल सकारात्मकता से भर गया।

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​इस अवसर पर कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सी. के. गौतम ने एक बड़ी और सराहनीय घोषणा की। उन्होंने केवल आज के दिन औपचारिकता निभाने के बजाय, भविष्य का एक खाका खींचा। प्राचार्य ने पूरी प्रतिबद्धता के साथ आश्वासन दिया कि महाविद्यालय परिसर और उसके आसपास के क्षेत्रों में 5000 पौधे रोपित किए जाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा, “वृक्षारोपण और जल संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि हमारा सामाजिक उत्तरदायित्व है। आज लगाया गया एक पौधा कल की पीढ़ी का जीवन रक्षक बनेगा।”

​’स्वच्छता पखवाड़ा’: जब छात्रों ने हाथों में उठाई झाड़ू

​”स्वच्छ पर्यावरण की पहली शर्त है स्वच्छता।” इसी मूलमंत्र को चरितार्थ करते हुए NSS के स्वयंसेवकों ने ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ के तहत कॉलेज परिसर और उसके आस-पास के सार्वजनिक स्थानों पर सघन सफाई अभियान चलाया।

​हाथों में दस्ताने और चेहरे पर समाज सुधार का जज्बा लिए इन युवा स्वयंसेवकों ने कचरा इकट्ठा किया और लोगों को सिंगल-यूज प्लास्टिक का बहिष्कार करने के लिए जागरूक किया। छात्रों ने राहगीरों और स्थानीय दुकानदारों से बातचीत की और उन्हें समझाया कि डस्टबिन का सही उपयोग कैसे पर्यावरण को बीमारियों और प्रदूषण से बचा सकता है।

​सीड बॉल (Seed Ball) निर्माण: बंजर जमीनों को हरा करने की जादुई तकनीक

​इस वर्ष के आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा सीड बॉल का निर्माण एवं वितरण। यह एक ऐसी आधुनिक और प्राचीन तकनीक का मिश्रण है, जो कम लागत में जंगलों को दोबारा जीवित कर सकती है। NSS के स्वयंसेवकों ने मिट्टी, खाद और विभिन्न प्रजातियों के बीजों को मिलाकर छोटी-छोटी मिट्टी की गेंदें (सीड बॉल्स) तैयार कीं।

​क्या है सीड बॉल और यह कैसे काम करती है?

  • सुरक्षित बीज: मिट्टी और जैविक खाद के आवरण के कारण बीज कीड़े-मकोड़ों और पक्षियों से सुरक्षित रहते हैं।
  • बिना खुदाई के विकास: इन बॉल्स को खुले, पहाड़ी या बंजर स्थानों पर फेंक (विसर्जित कर) दिया जाता है।
  • मानसून का इंतजार: जैसे ही वर्षा ऋतु (बारिश) शुरू होगी, ये सीड बॉल्स पानी पाकर स्वतः अंकुरित हो उठेंगी और नए पौधों का रूप ले लेंगी।

​स्वयंसेवकों द्वारा तैयार की गई इन सीड बॉल्स को उपयुक्त खुले स्थानों पर विसर्जित किया गया, जो आगामी मानसून में जैव विविधता को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होंगी।

​शिक्षाविदों और युवा शक्ति का अनूठा संगम

​इस पूरे महाअभियान को सफल बनाने में आगरा कॉलेज के प्रबुद्ध शिक्षक वर्ग और ऊर्जावान छात्रों ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक और NSS कार्यक्रम अधिकारी डॉ. आनंद प्रताप सिंह के साथ डॉ. रविशंकर सिंह, डॉ. सत्यदेव शर्मा, डॉ. अविनाश जैन, डॉ. सुरेंद्र पाल सिंह और डॉ. ललिता के विशेष मार्गदर्शन ने छात्रों में नया जोश भरा।

​इसके अलावा, उप-प्राचार्य डॉ. पी. वी. झा सहित डॉ. कल्पना चतुर्वेदी, डॉ. सुनीता गुप्ता, डॉ. अल्पना ओझा, डॉ. संजय शर्मा, डॉ. रिजू निगम, डॉ. ए. के. सिंह, डॉ. चेतन गौतम और प्रो. गौरव कौशिक ने भी कार्यक्रम में शिरकत की और छात्रों के इस जमीनी प्रयास की मुक्तकंठ से सराहना की।

​ग्राउंड लेवल पर इस आयोजन को धार देने में वरिष्ठ स्वयंसेवक मोहम्मद कादिर, मौली, निक्की शर्मा और नीरज का योगदान बेहद सराहनीय रहा, जिन्होंने पूरी टीम को एकजुट रखकर काम किया।