
आगरा। उत्तर प्रदेश के ताजनगरी आगरा में उस समय सियासी और धार्मिक गलियारों में हलचल तेज हो गई, जब ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपनी ‘गविष्टि यात्रा’ लेकर यहाँ पहुंचे। राजपुर चुंगी स्थित परशुराम मंदिर पार्क में आयोजित एक भव्य जनसभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य के सुर बेहद तीखे नजर आए। उन्होंने सीधे तौर पर केंद्र और राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज सनातन धर्म के सर्वोच्च पदों का जो अपमान हो रहा है, वैसा बर्ताव तो इतिहास में मुगलों और अंग्रेजों ने भी नहीं किया था।
गौ-संरक्षण और जन-जागरण के संकल्प के साथ उत्तर प्रदेश के दौरे पर निकले शंकराचार्य ने साफ किया कि अब देश के राजनेताओं के ढोंग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अब हर राजनीतिक दल को ‘गौ-माता’ के मुद्दे पर परीक्षा देनी होगी।
’अहंकार में चूर होकर किया जा रहा है शंकराचार्यों का अपमान’
अपने संबोधन के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का दर्द और आक्रोश साफ झलका। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा, “सनातन परंपरा में शंकराचार्यों का स्थान सर्वोपरि है। इतिहास गवाह है कि मुगलों और अंग्रेजों के काल में भी इस पद की मर्यादा और सम्मान को ठेस नहीं पहुंचाई गई। लेकिन आज, एक व्यक्ति अहंकार में चूर होकर लगातार शंकराचार्यों का अपमान कर रहा है। जो गलत है, उसे गलत कहना ही पड़ेगा। हम कोई राजनीतिक व्यक्ति नहीं हैं जो सच बोलने से कतराएं।”
इस बयान के बाद पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि धार्मिक पीठों की अवहेलना करने वालों को इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।
’भाजपा अब दो गुटों में बंटी, एक को गाय से प्यार तो दूसरे को इनकार’
सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए शंकराचार्य ने एक बड़ा दावा कर दिया। उन्होंने कहा कि अब भाजपा के भीतर ही दो विचारधाराएं काम कर रही हैं, यानी भाजपा दो हिस्सों में बंट चुकी है।
- अच्छी भाजपा: यह वह गुट है जो संतों का हृदय से सम्मान करता है और गौ-माता के प्रति अपनी सच्ची आस्था रखता है।
- गलत भाजपा: यह वह गुट है जो सत्ता के मद में संतों का अपमान करता है और गाय को ‘माता’ कहने से भी कतराता है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दोटूक शब्दों में कहा, “हम अच्छी भाजपा का स्वागत और सम्मान करते हैं, लेकिन जो गलत भाजपा है, जो संतों और गाय का अनादर करती है, हम उसका खुलकर विरोध करते हैं।”
’आजादी के 78 साल बाद भी गौ-माता के साथ छल, सिर्फ कंधा बदलने नहीं आए हम’
शंकराचार्य ने देश की आजादी से लेकर अब तक की सरकारों पर जनता और सनातनियों को ठगने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आजादी के 78 साल बीत जाने के बाद भी गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देने का वादा पूरा नहीं हुआ। हमारे साथ लगातार छल किया गया है।
उन्होंने जनता को आगाह करते हुए कहा, “हम यहाँ सिर्फ सरकारें बदलने या कंधा बदलने के लिए नहीं आए हैं। हम यह कहने नहीं आए कि पहले ‘नागनाथ’ थे तो अब ‘सांपनाथ’ को ले आइए। हम राजनीति के इस जालसाजी और ढोंग के खिलाफ लोगों को जगाने आए हैं। केंद्र और उत्तर प्रदेश की मौजूदा सरकारों ने भी चुनाव से पहले बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन धरातल पर गौमाता आज भी सड़कों पर प्लास्टिक खाने को मजबूर है। उनकी पीड़ा को समझने में यह व्यवस्था पूरी तरह नाकाम रही है।”
नेताओं की परीक्षा का वक्त: ‘अब तक सिर्फ एकनाथ शिंदे हुए पास’
शंकराचार्य ने देश के सभी राजनीतिक दलों के सामने एक बड़ी चुनौती रख दी है। उन्होंने घोषणा की कि अब देश के हर नेता और पार्टी की परीक्षा होगी। परीक्षा का नियम बेहद सरल है—जो सरकार में हैं, वे सरकारी तौर पर गाय को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करें। और जो विपक्ष में हैं, वे अपनी पार्टी में बकायदा प्रस्ताव पारित कर शपथ पत्र जारी करें कि उनकी सरकार आने पर वे गाय को माता का दर्जा देंगे।
शंकराचार्य ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री का उदाहरण देते हुए कहा, “इस परीक्षा में अभी तक देश का सिर्फ एक ही नेता पास हो पाया है, और वो हैं महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे। उन्होंने साहस दिखाया और सरकारी स्तर पर गाय को माता माना। उनके अलावा अभी तक कोई दूसरा नाम हमारे सामने नहीं आया है।”
सैफई परिवार को आशीर्वाद पर दी सफाई: ‘व्यक्तिगत प्रेम अलग, राजनीतिक समर्थन अलग’
अपने उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान समाजवादी पार्टी के गढ़ सैफई जाने और मुलायम सिंह यादव के परिवार से मुलाकात पर भी शंकराचार्य ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि सैफई में हमारा बहुत शानदार स्वागत-सत्कार हुआ। हमने पूरे परिवार को आशीर्वाद भी दिया।
लेकिन उन्होंने स्पष्ट शब्दों में जोड़ा, “हमारा आशीर्वाद सैफई परिवार के लिए व्यक्तिगत स्तर पर है। पार्टी के तौर पर समाजवादी पार्टी को हमारा आशीर्वाद और समर्थन तभी मिलेगा, जब वे अपनी पार्टी के एजेंडे में गाय को माता मानने का प्रस्ताव लिखित रूप में पारित करेंगे। हमारी बात बिल्कुल कांच की तरह साफ है, हम किसी के चेहरे को देखकर अनुमान नहीं लगाते, बल्कि काम देखकर फैसला करते हैं।”



