आगरा। ताजनगरी को विश्व पटल पर स्वच्छता के मानक के रूप में स्थापित करने के लिए आगरा नगर निगम ने अब आर-पार की लड़ाई छेड़ दी है। आगामी ‘स्वच्छ सर्वेक्षण 2026’ की तैयारियों को देखते हुए निगम प्रशासन ने उन लोगों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जो भवन निर्माण या मरम्मत के दौरान निकलने वाला मलबा (सीएनडी वेस्ट) सड़कों या खाली प्लॉटों में फेंक देते हैं। अब ऐसा करना न केवल आपकी जेब पर भारी पड़ेगा, बल्कि निगम द्वारा विधिक कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।

​स्वच्छता की राह में रोड़ा बनने वालों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

​आगरा नगर निगम इन दिनों एक नई ऊर्जा के साथ काम कर रहा है। शहर की सुंदरता को बिगाड़ने वाले कारकों की पहचान की गई है, जिसमें सड़क किनारे पड़ा निर्माण सामग्री का मलबा सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। अक्सर देखा जाता है कि लोग अपने घरों का निर्माण कार्य कराते समय ईंट, पत्थर, और मिट्टी को सड़क पर ही छोड़ देते हैं। इससे न केवल धूल उड़ती है और प्रदूषण फैलता है, बल्कि राहगीरों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

​इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थलों को डंपिंग ग्राउंड समझने की भूल अब महंगी पड़ेगी। नगर निगम की टीमें अब वार्ड स्तर पर निगरानी रखेंगी और जो भी व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता पाया जाएगा, उस पर तत्काल चालान की कार्रवाई की जाएगी।

​नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल का विजन: स्वच्छ और व्यवस्थित आगरा

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​आगरा नगर निगम की इस बदली हुई कार्यशैली के पीछे नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल की दूरदर्शी सोच और नेतृत्व का बड़ा हाथ है। पदभार ग्रहण करने के बाद से ही उन्होंने शहर की बुनियादी सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर जोर दिया है। उनका मानना है कि जब तक नियम कड़े नहीं होंगे और जनता की भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक शहर को पूरी तरह स्वच्छ नहीं बनाया जा सकता।

​नगर आयुक्त ने हाल ही में समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देशित किया कि वैकल्पिक कचरा निस्तारण केंद्रों की जानकारी जनता तक पहुँचाई जाए। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि नागरिकों में जिम्मेदारी का भाव पैदा करना है। शहर को व्यवस्थित रखना हमारी प्राथमिकता है, और इसके लिए हम तकनीक और जनशक्ति दोनों का पूर्ण उपयोग कर रहे हैं।”

​सीएनडी वेस्ट: पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा

​सहायक नगर आयुक्त अशोक प्रिय गौतम ने बताया कि सड़कों पर पड़े मलबे के कारण न केवल यातायात बाधित होता है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी घातक है। मलबे से निकलने वाली सूक्ष्म धूल सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुँचती है, जिससे दमा और एलर्जी जैसी बीमारियाँ पनपती हैं।

​निगम की नई नीति के तहत, अब निर्माण कार्य शुरू करने से पहले नागरिकों को मलबे के निस्तारण की योजना बतानी होगी। सहायक नगर आयुक्त ने जनता से अपील की है कि वे नगर निगम द्वारा निर्धारित स्थलों पर ही मलबा डालें या निगम की सहायता लें। नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई जाएगी।

​कर्मचारियों को दी जा रही है विशेष ट्रेनिंग

​स्वच्छ सर्वेक्षण 2026 की कसौटी पर खरा उतरने के लिए नगर निगम केवल अधिकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले सफाई मित्रों और कर्मचारियों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। कार्यालय स्तर पर आयोजित कार्यशालाओं में कर्मचारियों को ‘कचरा पृथक्करण’ (Waste Segregation) की बारीकियां सिखाई जा रही हैं।

​इसमें डोर-टू-डोर कलेक्शन को शत-प्रतिशत प्रभावी बनाने और गीले-सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्र करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। निगम का लक्ष्य है कि ‘सोर्स सेग्रीगेशन’ (स्रोत पर ही कचरा अलग करना) को एक जन-आंदोलन बनाया जाए। इसके लिए प्रत्येक वार्ड में मॉनीटरिंग प्रणाली को मजबूत किया गया है ताकि शिकायतों का त्वरित निस्तारण हो सके।

​सकारात्मक फीडबैक और जन-भागीदारी की अपील

​स्वच्छता सर्वेक्षण में ‘पब्लिक फीडबैक’ की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए आगरा नगर निगम जागरूकता अभियानों को भी तेज कर रहा है। सोशल मीडिया से लेकर वार्ड स्तर की बैठकों तक, निगम प्रशासन जनता से सीधा संवाद कर रहा है।

​नगर निगम की इस सक्रियता की सराहना शहर के प्रबुद्ध वर्ग और आम नागरिकों द्वारा भी की जा रही है। लोगों का कहना है कि जिस तरह से नगर आयुक्त और उनकी टीम सक्रिय है, उससे उम्मीद जगी है कि आगरा इस बार स्वच्छता रैंकिंग में नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।

निष्कर्ष

​आगरा नगर निगम का यह कड़ा रुख शहर की बेहतरी के लिए एक स्वागत योग्य कदम है। सड़कों से मलबा हटने और सफाई व्यवस्था सुधरने से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर में भी सुधार होगा। नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल के नेतृत्व में निगम जिस तरह से नियमों का पालन सुनिश्चित करा रहा है, वह सराहनीय है। हालांकि, इस मुहिम की सफलता पूरी तरह से नागरिकों के सहयोग पर टिकी है।

आपकी राय:

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