
आगरा। ताज नगरी के सूरसदन सभागार में शनिवार का दिन ऊर्जा, आध्यात्म और आधुनिक चुनौतियों पर विमर्श के नाम रहा। अवसर था इस्कॉन के वरिष्ठ उपदेशक और प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर HG अमोघ लीला प्रभु के विशेष सत्र का। “स्पिरिचुअल एआई, सोल और व्यक्ति का भविष्य” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में युवाओं की भारी भीड़ उमड़ी। अपने बेबाक अंदाज के लिए मशहूर अमोघ लीला प्रभु ने आज के डिजिटल युग की सबसे बड़ी समस्या—मोबाइल और एआई एडिक्शन—पर कड़ी चेतावनी जारी की।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज की युवा पीढ़ी जिस स्क्रीन के पीछे अपनी दुनिया खोज रही है, वह वास्तव में किसी नशीले पदार्थ या ड्रग्स से भी अधिक खतरनाक साबित हो रही है।
”दिखावे की दुनिया में खोती जा रही है असली जिंदगी”
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशू रानी द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। जैसे ही “हरे कृष्ण” महामंत्र की गूंज हॉल में गूंजी, पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
सत्र के दौरान अमोघ लीला प्रभु ने वर्तमान पीढ़ी, जिसे हम ‘जेन-जी’ (Gen-Z) कहते हैं, की जीवनशैली पर गहरा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि आज का युवा सोशल मीडिया पर तो बहुत सक्रिय है, लेकिन असल जिंदगी में वह एकाकीपन का शिकार हो रहा है। उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली जिंदगी अक्सर एक छलावा होती है। लोग वर्चुअल दुनिया में हजारों दोस्त बना रहे हैं, लेकिन हकीकत में वे अपने परिवार और पड़ोसियों से कटते जा रहे हैं। यह सामाजिक निष्क्रियता मानसिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है।”
एआई और मोबाइल एडिक्शन: एक अदृश्य जाल
मीडिया से बातचीत में अमोघ लीला प्रभु ने एआई (Artificial Intelligence) के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई। उन्होंने तर्क दिया कि जहाँ ड्रग्स शरीर को नुकसान पहुँचाते हैं, वहीं डिजिटल लत सीधे व्यक्ति के विवेक और सोचने-समझने की क्षमता पर प्रहार करती है।
उन्होंने इन्फ्लुएंसर्स और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज कई बड़े नाम एआई के कोर्स तो बेच रहे हैं, लेकिन इसके नकारात्मक पहलुओं पर कोई बात नहीं कर रहा। प्रभु जी ने सरकार से मांग की कि डिजिटल शिक्षा के साथ-साथ इसके दुष्प्रभावों के बारे में भी स्पष्ट नियम और जागरूकता कार्यक्रम अनिवार्य किए जाने चाहिए।
आध्यात्म: गलत के बीच सही को चुनने की शक्ति
एक इंटरैक्टिव प्रश्न-उत्तर सत्र के दौरान युवाओं ने करियर, रिलेशनशिप और तनाव से जुड़े कई सवाल पूछे। अमोघ लीला प्रभु ने इन सभी का समाधान ‘आध्यात्म’ में बताया। उन्होंने एक बहुत ही गहरी बात कही जो युवाओं के दिल को छू गई।
उन्होंने कहा, “सही और गलत के बीच चुनाव करने की असली ताकत आध्यात्म से आती है। जब आपके पास गलत करने का पूरा मौका हो, उस वक्त खुद को रोकने की जो आंतरिक शक्ति (Will Power) चाहिए, वह केवल स्पिरिचुअलिटी और भक्ति से ही मिल सकती है।” उनके अनुसार, तकनीक एक साधन है, लेकिन उसे मालिक बना लेना विनाशकारी है।
मानसिक स्वास्थ्य और स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा
मोबाइल के अत्यधिक उपयोग पर चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल समय की बर्बादी नहीं है, बल्कि यह धीरे-धीरे हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को खोखला कर रहा है। नींद की कमी, आँखों की समस्याएं और लगातार बढ़ता तनाव इसी डिजिटल लत की देन हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे तकनीक का उपयोग अपनी प्रगति के लिए करें, न कि उसके गुलाम बनने के लिए।
निष्कर्ष: संतुलन ही जीवन का आधार है
आगरा के सूरसदन में आयोजित यह सत्र केवल एक उपदेश नहीं, बल्कि आज के भटके हुए युवाओं के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ था। अमोघ लीला प्रभु का संदेश साफ है—प्रौद्योगिकी (Technology) के साथ प्रगति करें, लेकिन अपनी जड़ों और आध्यात्मिकता को न छोड़ें। जीवन में शांति और स्थिरता केवल स्क्रीन स्क्रॉल करने से नहीं, बल्कि वास्तविक रिश्तों और ईश्वर के साथ जुड़ाव से मिलेगी।
पाठकों के लिए प्रश्न:
क्या आपको भी लगता है कि मोबाइल और एआई का एडिक्शन आज के युवाओं को समाज से काट रहा है? आप अपने दिन का कितना समय स्क्रीन पर बिताते हैं और इसे कम करने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।



