
शहर की चरमराती सफाई व्यवस्था, जर्जर सड़कों और नगर निगम के भीतर कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ आज कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ताओं ने जमकर बवाल काटा। यह विरोध प्रदर्शन इतना उग्र और अनोखा था कि नगर निगम परिसर घंटों तक नारेबाजी और भजनों से गूंजता रहा। जहाँ एक ओर सदन के भीतर राजनीतिक खींचतान चल रही थी, वहीं सदन के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोलते हुए अधिकारियों की नींद उड़ा दी।
ताली-थाली और नारेबाजी: जब गेट फांदने लगे कार्यकर्ता
प्रदर्शन की शुरुआत तब हुई जब भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता नगर निगम कार्यालय के बाहर इकट्ठा हुए। हाथों में तख्तियां और गले में पार्टी का तिरंगा गमछा डाले कार्यकर्ता सीधे मुख्य गेट की ओर बढ़े। जैसे ही अधिकारियों को इस हंगामे की भनक लगी, आनन-फानन में नगर निगम के मुख्य द्वारों पर ताले जड़ दिए गए।
लेकिन प्रदर्शनकारियों का जोश कम नहीं हुआ। गेट बंद देखकर गुस्साए कार्यकर्ता ताली और थाली बजाने लगे। कुछ युवा कार्यकर्ता तो विरोध जताने के लिए बंद गेट के ऊपर ही चढ़ गए और वहीं से नारेबाजी शुरू कर दी। कार्यकर्ताओं का साफ तौर पर कहना था कि नगर निगम अब जनसेवा का केंद्र नहीं, बल्कि ‘दलाली का अड्डा’ बन चुका है।
”हिस्सेदारी बंद करो, दलाली खत्म करो”: भ्रष्टाचार पर सीधा वार
सदन के बाहर फर्श पर धरने पर बैठे कांग्रेसियों ने निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे नेताओं ने चिल्लाकर कहा, “नगर निगम में दलाली का खेल चल रहा है। जनता के टैक्स का पैसा विकास के बजाय अधिकारियों और बिचौलियों की जेब में जा रहा है। यह हिस्सेदारी अब बंद होनी चाहिए।”
कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बिना ‘कमीशन’ के निगम में कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती। उनका दावा था कि शहर की बुनियादी सुविधाओं को दरकिनार कर केवल कागजों पर विकास दिखाया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान “भ्रष्टाचार बंद करो” और “जनता का पैसा वापस करो” जैसे नारों से माहौल पूरी तरह गरमा गया।
3 घंटे का धरना और हनुमान चालीसा का पाठ
इस विरोध प्रदर्शन का सबसे दिलचस्प पहलू तब सामने आया जब कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने विरोध का धार्मिक और आध्यात्मिक तरीका अपनाया। पिछले 3 घंटों से धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं ने अचानक भजन गाना शुरू कर दिया। देखते ही देखते नगर निगम के गलियारे ‘हनुमान चालीसा’ के पाठ से गूंज उठे।
कांग्रेस नेताओं का कहना था कि वे यह पाठ अधिकारियों और सत्तासीन जनप्रतिनिधियों की ‘सद्बुद्धि’ के लिए कर रहे हैं। उनका तर्क था कि जब प्रशासन जनता की गुहार पर बहरा हो जाए, तो ईश्वर की शरण में जाकर ही उन्हें जगाया जा सकता है। करीब तीन घंटे तक चले इस धरने ने नगर निगम की कार्यप्रणाली को पूरी तरह ठप कर दिया।
सड़कों पर गड्ढे और गंदगी का अंबार: जनता बेहाल
प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था और टूटी सड़कें रहीं। कांग्रेसियों ने आरोप लगाया कि शहर की मुख्य सड़कों से लेकर गलियों तक का बुरा हाल है। सड़कों पर इतने गड्ढे हैं कि आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन निगम प्रशासन चैन की नींद सो रहा है।
सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां समय पर नहीं आतीं और मोहल्लों में गंदगी के ढेर लगे हैं। मानसून से पहले नालों की सफाई न होने से जलभराव का खतरा बढ़ गया है। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो यह आंदोलन उग्र रूप लेगा।
सदन के भीतर और बाहर अपनों से ही घिरी मेयर
दिलचस्प बात यह रही कि आज मेयर को केवल विपक्ष का ही नहीं, बल्कि अपनों का भी कोपभाजन बनना पड़ा। एक तरफ जहाँ सदन के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ता गेट पर चढ़े थे, वहीं सदन के अंदर भाजपा के ही एक पार्षद ने अपनी पार्टी की मेयर को सफाई और विकास के मुद्दों पर घेर लिया। अंदर और बाहर एक साथ हुए इस चौतरफा हमले ने प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए। पुलिस बल को स्थिति नियंत्रित करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।



