आगरा। ताजनगरी में अप्रैल के महीने ने ही अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। सूरज की तपिश अब केवल धूप नहीं, बल्कि शरीर को झुलसाने वाली ‘आग’ बन चुकी है। गुरुवार को आगरा का अधिकतम तापमान 41.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसने शहरवासियों के पसीने छुड़ा दिए हैं। आलम यह है कि सुबह 10 बजे के बाद ही सड़कों पर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं लग रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी उन स्कूली बच्चों को हो रही है, जो दोपहर की तपती धूप और शहर के भीषण ट्रैफिक जाम के बीच घर लौटने को मजबूर हैं।

​सुबह से ही ‘भट्टी’ की तरह तप रहा शहर

​आगरा में गर्मी का असर अब केवल दोपहर तक सीमित नहीं है। सूरज की पहली किरण के साथ ही उमस और तपिश का अहसास होने लगता है। सुबह के 10 बजते-बजते धूप इतनी तीखी हो जा रही है कि दोपहिया वाहन चालकों के लिए सड़कों पर खड़ा होना मुश्किल हो रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आने वाले 24 से 48 घंटों में पारा 44 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को छू सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह इस सीजन का सबसे गर्म दिन होगा।

​स्कूलों की छुट्टी और दोपहर का ‘अग्निपथ’

​शहर के अधिकांश निजी और सरकारी स्कूलों में छुट्टी का समय दोपहर 1:00 से 3:00 बजे के बीच है। विडंबना यह है कि यही वह समय है जब सूरज अपने पूरे शबाब पर होता है और पारा अपने उच्चतम स्तर पर। स्कूल बसों और वैन में बैठे बच्चों के लिए यह सफर किसी ‘अग्निपथ’ से कम नहीं है। छोटे-छोटे बच्चे पसीने से तर-बतर, भारी बस्ते लादे जब स्कूल से बाहर निकलते हैं, तो गर्म हवाएं (लू) उनके चेहरे को झुलसा देती हैं।

​भीषण जाम ने बढ़ाई मुसीबत: सुल्तानगंज और एमजी रोड बेहाल

​गर्मी तो एक समस्या है ही, लेकिन आगरा की सड़कों पर लगने वाला घंटों का जाम इस समस्या को दोगुना कर रहा है। दोपहर के वक्त जब स्कूलों की बसें एक साथ सड़कों पर उतरती हैं, तो एमजी रोड, सुल्तानगंज पुलिया, भगवान टॉकीज और खंदारी जैसे प्रमुख चौराहों पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं।

​जाम में फंसी स्कूल बसों के अंदर का तापमान बाहर से भी अधिक महसूस होता है। कई अभिभावकों का कहना है कि 15 मिनट का रास्ता तय करने में आज 45 मिनट से एक घंटा लग रहा है। इस दौरान बच्चों के पास न तो पर्याप्त ठंडा पानी बचता है और न ही ताजी हवा। यह स्थिति बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

​स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी: डिहाइड्रेशन का खतरा

​बढ़ते तापमान और लू को देखते हुए डॉक्टरों ने विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में बच्चों में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी), हीट स्ट्रोक और थकावट के मामले बढ़ सकते हैं।

  • बचाव के उपाय: बच्चों को सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनाएं।
  • खान-पान: पानी की बोतल के साथ ग्लूकोज या ओआरएस (ORS) जरूर दें।
  • सावधानी: दोपहर में खाली पेट घर से बाहर न निकलने दें और सिर को ढककर रखें।

​क्या बदलेगा स्कूलों का समय?

​आसमान से बरसती आग और बच्चों की हालत को देखते हुए अभिभावक अब जिला प्रशासन से स्कूलों के समय में बदलाव की मांग कर रहे हैं। कई अभिभावक संघों का सुझाव है कि प्राइमरी स्तर तक के स्कूलों को या तो सुबह जल्दी बुलाया जाए या फिर कुछ समय के लिए ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जाएं। हालांकि, अभी तक प्रशासन की ओर से समय परिवर्तन को लेकर कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन बढ़ते पारे को देखते हुए जल्द ही कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

निष्कर्ष

​आगरा में गर्मी ने अभी से जो ट्रेलर दिखाया है, उसने मई-जून की कल्पना को और भी डरावना बना दिया है। एक तरफ प्रकृति का प्रकोप है और दूसरी तरफ शहर की चरमराई यातायात व्यवस्था। इन दोनों के बीच सबसे ज्यादा पीस रहा है हमारा भविष्य, यानी स्कूल जाने वाले बच्चे। प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द से जल्द स्कूल की टाइमिंग और ट्रैफिक मैनेजमेंट पर ठोस निर्णय ले ताकि किसी अनहोनी को रोका जा सके।

पाठकों के लिए एक सवाल:

क्या आपके क्षेत्र में भी स्कूलों की छुट्टी के समय भारी जाम लग रहा है? क्या प्रशासन को स्कूलों का समय बदलकर सुबह 7 से 11 बजे तक कर देना चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।