
आगरा। ताजनगरी के शास्त्रीपुरम स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) में छात्र के साथ हुई बर्बरता के मामले में आखिरकार पुलिस ने कानूनी चाबुक चला दिया है। घटना के कई दिन बीत जाने और पीड़ित परिवार द्वारा न्याय की गुहार लगाने के बाद, अब थाना सिकंदरा में आरोपी छात्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला न केवल छात्रों के बीच बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति को दर्शाता है, बल्कि स्कूल प्रशासन की संवेदनशीलता पर भी बड़े सवाल खड़े करता है।
देरी से हुई कार्रवाई: जब इंसाफ के लिए भटकना पड़ा
यह घटना 25 अप्रैल की है, लेकिन एफआईआर दर्ज होने में कई दिनों का वक्त लग गया। पीड़ित छात्र, जो एक मोबाइल कारोबारी का बेटा है, अस्पताल में जिंदगी और दर्द से जूझ रहा था, जबकि परिवार कानूनी कार्रवाई के लिए संघर्ष कर रहा था। सोमवार को जब पीड़ित के पिता ने जिलाधिकारी मनीष बंसल से मुलाकात कर स्कूल प्रबंधन की ढिलाई और पुलिसिया देरी की शिकायत की, तब जाकर मामले ने तूल पकड़ा और एफआईआर की प्रक्रिया शुरू हुई।
पंच लगते ही टूट गया जबड़ा, तीन दांत गिरे बाहर
घटनाक्रम के अनुसार, 25 अप्रैल की सुबह क्लासरूम में ही विवाद शुरू हुआ था। आरोप है कि कक्षा 10वीं के ही एक अन्य छात्र ने पीड़ित के चेहरे पर ताबड़तोड़ कई पंच जड़े। हमला इतना घातक था कि पीड़ित छात्र के तीन दांत जड़ से उखड़ गए और उसके जबड़े (Jaw) में गंभीर फ्रैक्चर हो गया।
पिता का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने इस गंभीर स्थिति को दबाने की कोशिश की। उन्हें फोन पर सिर्फ ‘चोट’ की सूचना दी गई, लेकिन जब वे स्कूल पहुंचे तो उनका बेटा खून से लथपथ और बेसुध हालत में एक कोने में बैठा मिला। स्कूल ने न तो तुरंत इलाज की व्यवस्था की और न ही घटना की गंभीरता को समझा।
BNS की संगीन धाराओं में घिरे आरोपी छात्र
देर से ही सही, लेकिन पुलिस ने अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) की उन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है, जो काफी सख्त मानी जाती हैं:
- धारा 117(2) BNS: यह धारा स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाने (Grievous Hurt) के लिए है। इसमें किसी की हड्डी या दांत तोड़ने जैसे अपराध शामिल हैं। इस धारा के तहत दोषी को 7 साल तक की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है।
- धारा 115(2) BNS: जानबूझकर चोट पहुँचाने के लिए 1 साल की कैद या आर्थिक दंड का प्रावधान है।
डीएम का आदेश: सीसीटीवी और जांच कमेटी तय करेगी जवाबदेही
जिलाधिकारी मनीष बंसल ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने न केवल जांच कमेटी गठित की है, बल्कि स्कूल प्रशासन को उस दिन की पूरी सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सौंपने का सख्त निर्देश दिया है। प्रशासन अब यह जांच रहा है कि क्या क्लास में शिक्षक मौजूद थे? और यदि नहीं, तो इतनी बड़ी वारदात होने तक स्कूल का स्टाफ कहाँ था?
’बोल नहीं पा रहा बेटा, लिखकर बयां किया दर्द’
यथार्थ हॉस्पिटल में भर्ती छात्र की स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक, जबड़े के फ्रैक्चर के कारण वह अगले तीन महीनों तक कुछ भी चबा या खा नहीं पाएगा। पिता ने बताया कि उनका बेटा सदमे के कारण बोल नहीं पा रहा है; उसने एक कागज पर लिखकर बताया कि उस पर अचानक हमला हुआ और वह बेसुध हो गया था। अब वह स्कूल जाने के नाम से भी कांप रहा है।
निष्कर्ष: क्या रसूख के आगे दब रही थी कार्रवाई?
इस मामले में एफआईआर होने में हुई देरी कई सवाल छोड़ जाती है। क्या स्कूल की प्रतिष्ठा बचाने के लिए मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई? अब जबकि मुकदमा दर्ज हो चुका है, आगरा की जनता की नजरें पुलिस की अगली कार्रवाई और स्कूल पर होने वाले एक्शन पर टिकी हैं।
पाठकों के लिए प्रश्न:
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