
आगरा। ताजनगरी आगरा में इन दिनों सियासी पारा सातवें आसमान पर है। बुनियादी सुविधाओं से जूझती जनता के हक में शुक्रवार को समाजवादी पार्टी (सपा) के कार्यकर्ताओं ने आगरा नगर निगम मुख्यालय पर ‘हल्ला बोल’ प्रदर्शन किया। ढोल-नगाड़ों और गगनभेदी नारों के बीच निगम परिसर पहुंचे सपा नेताओं ने प्रशासन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। इस उग्र प्रदर्शन का मुख्य केंद्र टोरेंट पावर कंपनी का 431 करोड़ रुपये का टैक्स माफ करना और स्मार्ट सिटी योजना के तहत अरबों रुपये के बजट का बंदरबांट रहा।
सपा के प्रदेश सचिव राहुल चतुर्वेदी और महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन ने नगर निगम प्रशासन की नींद उड़ा दी है। कार्यकर्ताओं ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि जनता की गाढ़ी कमाई को इस तरह भ्रष्टाचार की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा।
टोरेंट पावर पर मेहरबानी और जनता पर मार: सपा का तीखा वार
इस पूरे प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी ने टोरेंट पावर कंपनी पर दिखाई जा रही प्रशासनिक मेहरबानी को मुख्य मुद्दा बनाया। प्रदेश सचिव राहुल चतुर्वेदी ने कहा कि एक तरफ आगरा का छोटा व्यापारी, रेहड़ी-पटरी वाला और आम नागरिक टैक्स के बोझ तले दबा जा रहा है, उनसे वसूली के लिए कड़े नियम अपनाए जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ, टोरेंट पावर जैसी बड़ी निजी कंपनी का 431 करोड़ रुपये का बकाया गुपचुप तरीके से माफ कर दिया जाता है।
सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि यह सीधे तौर पर आम जनता की जेब पर डाका है। पार्टी ने मांग की है कि अगर सरकार और निगम बड़ी कंपनियों पर इतनी दयालु हैं, तो पिछले दिनों मूसलाधार बारिश से प्रभावित हुए राजा मंडी और बिजली घर के व्यापारियों का भी टैक्स तुरंत माफ किया जाना चाहिए और उन्हें उचित मुआवजा मिलना चाहिए।
”5 मिनट की बारिश में डूब जाता है ताजनगरी का गुरूर”
महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास ने शहर की जर्जर हो चुकी ड्रेनेज व्यवस्था और सड़कों पर नगर निगम को जमकर आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “आगरा नगर निगम का सालाना बजट हजारों करोड़ रुपये का है। हर साल कागजों पर एक हजार करोड़ से ऊपर की विकास योजनाएं बनती हैं, लेकिन धरातल पर सब शून्य है। जनता आज भी बूंद-बूंद पानी और साफ सड़कों के लिए तरस रही है।”
शब्बीर अब्बास ने हाल ही में हुई बारिश का हवाला देते हुए कहा कि महज 5 मिनट की बारिश में पूरा शहर पानी-पानी हो जाता है। तीन दिन पहले हुई बारिश ने निगम के दावों की पोल खोलकर रख दी थी। शहर के मुख्य मार्ग तालाब बन गए, कई जगह सड़कें धंस गईं और गाड़ियां गड्ढों में समा गईं। कई राहगीरों की जान जाते-जाते बची, लेकिन एसी कमरों में बैठे निगम अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
स्मार्ट सिटी के 500 करोड़ गए कहां? सपा ने मांगा हिसाब
सपा कार्यकर्ताओं ने ‘स्मार्ट सिटी’ परियोजना को आगरा के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर अब तक 500 करोड़ रुपये से अधिक पानी की तरह बहाए जा चुके हैं, लेकिन शहर की स्थिति सुधरने के बजाय और बदतर हो गई है।
”शहर की सड़कें खुदी पड़ी हैं, नाले पूरी तरह चोक हैं और हल्की सी बारिश में जलभराव की समस्या विकराल रूप ले लेती है। आखिर यह 500 करोड़ रुपया किसकी जेब में गया? हम इस पूरे घालमेल की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हैं।”
— राहुल चतुर्वेदी, प्रदेश सचिव, सपा
सड़क से सदन तक बड़े आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शन के अंत में समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों का एक ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा। सपा नेताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि स्मार्ट सिटी फंड के खर्चों की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई और टोरेंट पावर को दी गई नाजायज राहत वापस नहीं ली गई, तो समाजवादी पार्टी इस आंदोलन को थामने वाली नहीं है।
कार्यकर्ताओं ने नारा दिया कि “जनता के हक की लड़ाई अब थमने वाली नहीं है, इसे सड़क से लेकर सदन तक लड़ा जाएगा।” इस प्रदर्शन के दौरान भारी संख्या में महिला और युवा कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और ताजनगरी के बदहाल विकास को लेकर अपना आक्रोश व्यक्त किया।



