
उत्तर प्रदेश में त्योहारों के मौसम के बीच एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव सामने आया है। सूबे की योगी आदित्यनाथ सरकार ने ईद-उल-अजहा यानी बकरीद के त्योहार पर होने वाले सरकारी अवकाश की तारीख में संशोधन किया है। पहले जहाँ प्रदेश में 27 मई को बकरीद की छुट्टी घोषित की गई थी, वहीं अब इसे बदलकर 28 मई कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले के बाद अब 27 मई को सूबे के सभी सरकारी दफ्तर, स्कूल और बैंक सामान्य दिनों की तरह खुले रहेंगे, जबकि 28 मई को सार्वजनिक अवकाश रहेगा।

शासन स्तर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह फैसला चांद के दीदार और त्योहार की सही तारीख को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सामान्य प्रशासन के प्रमुख सचिव एसवीएस रंगा राव की तरफ से इस संशोधित आदेश को तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
मुस्लिम धर्मगुरुओं की अपील: ‘सड़कों पर नमाज से बचें, यातायात न करें बाधित’
सरकार के इस प्रशासनिक फैसले के बीच मुस्लिम समाज के प्रमुख धर्मगुरुओं और उलेमाओं ने भी कौम से एक बेहद परिपक्व और सकारात्मक अपील की है। लखनऊ से लेकर अलीगढ़ तक के बड़े मुस्लिम विद्वानों ने दोटूक शब्दों में कहा है कि बकरीद की नमाज सड़कों पर अदा नहीं की जानी चाहिए।
धर्मगुरुओं का मानना है कि सड़कों पर नमाज पढ़ने से आम राहगीरों और यातायात व्यवस्था को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की है कि वे मस्जिदों और ईदगाहों के भीतर ही नमाज मुकम्मल करें। इसके साथ ही कुर्बानी के दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने और अवशेषों को खुले में न फेंकने की हिदायत भी दी गई है।
”सड़कें सार्वजनिक हैं, किसी को तकलीफ देना इस्लाम नहीं” – मौलाना इफराहीम हुसैन
अलीगढ़ के शाही मुफ्ती मौलाना इफराहीम हुसैन ने इस मामले पर बेहद बेबाकी से अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि सड़कों को ब्लॉक करके इबादत करना मजहब के सिद्धांतों के खिलाफ है।
”सड़क पर नमाज की अनुमति सिर्फ ईद पर ही क्या, बल्कि साल के किसी भी आम दिन में नहीं होनी चाहिए। इस्लाम हमें कभी यह नहीं सिखाता कि हमारी वजह से किसी दूसरे इंसान को तकलीफ पहुँचे। सड़कें सार्वजनिक संपत्ति हैं और इस पर हर जाति, धर्म के नागरिक का बराबर का हिस्सा है। हमें दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।” – मौलाना इफराहीम हुसैन, शाही मुफ्ती (अलीगढ़)
शिया धर्मगुरु की दोटूक: “गाय की तरफ नजरें उठाकर भी नहीं देखना”
त्योहार के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द और धार्मिक संवेदनशीलता बनाए रखने के लिए शिया धार्मिक नेता मौलाना सैफ अब्बास ने एक बेहद महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने देश के कानून और बहुसंख्यक समाज की भावनाओं का आदर करने की पुरजोर वकालत की।
मौलाना सैफ अब्बास ने कहा, “बकरीद के पावन मौके पर आपको कुर्बानी जरूर करनी चाहिए, लेकिन सिर्फ उन्हीं जानवरों की, जिनकी अनुमति हमारे देश का संविधान देता है। हमें गाय की तरफ नजरें उठाकर भी नहीं देखना चाहिए, क्योंकि हमारे हिंदू भाई उसे माता मानते हैं और उसकी पूजा करते हैं।”
उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति इस माहौल में गाय की कुर्बानी देता है, तो वह न सिर्फ कानून तोड़ेगा बल्कि इस्लाम के भी खिलाफ काम करेगा। इस्लाम दूसरे धर्मों और उनकी आस्थाओं के सम्मान की सीख देता है, इसलिए विवादित कुर्बानी से पूरी तरह बचना चाहिए।
सीएम योगी की सख्त चेतावनी: ‘प्यार से मानेंगे ठीक, वरना दूसरा तरीका अपनाएंगे’
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वह कड़ा रुख भी है, जो उन्होंने एक हफ्ते पहले कानून-व्यवस्था की समीक्षा बैठक में जाहिर किया था। सीएम योगी ने स्पष्ट कर दिया था कि उत्तर प्रदेश में किसी भी कीमत पर सड़कों पर नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
योगी आदित्यनाथ ने अपने चिरपरिचित अंदाज में कहा था, “नमाज पढ़नी है तो उसके लिए तय की गई जगह (मस्जिद या ईदगाह) पर ही पढ़िए। अगर नमाजियों की संख्या ज्यादा है, तो आप शिफ्ट में नमाज अदा कर लीजिए। हम किसी की इबादत को नहीं रोकेंगे, लेकिन सड़क पर अराजकता पैदा करने की छूट किसी को नहीं मिलेगी।”
’यूपी में कानून का राज, व्यवस्था से रहना होगा सबको’
मुख्यमंत्री ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जब बाहर के लोग उनसे पूछते हैं कि क्या यूपी में अब भी सड़कों पर नमाज होती है? तो उनका जवाब होता है— ‘कतई नहीं’।
योगी ने कड़े शब्दों में कहा, “सड़कें आम जनता के चलने और गाड़ियों के आवागमन के लिए बनी हैं। कोई भी वर्ग आकर ट्रैफिक डिस्टर्ब करे, यह अधिकार कानून किसी को नहीं देता। कुछ लोगों ने मुझसे कहा कि साहब हमारी संख्या ज्यादा है, जगह कम पड़ जाती है। मैंने उनसे साफ कहा कि अगर जगह की कमी है, तो अपनी संख्या को नियंत्रित रखिए। जब सामर्थ्य नहीं है, तो बेकार में भीड़ बढ़ाने का क्या मतलब? यूपी में सभी को सिस्टम के दायरे में रहना होगा और कानून का राज मानना ही पड़ेगा।””



