आगरा। लगभग दो महीने के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार गुरुवार को आगरा नगर निगम के सदन का बजट अधिवेशन आयोजित किया गया। उम्मीद के मुताबिक, यह बैठक शांतिपूर्ण रहने के बजाय बेहद हंगामेदार रही। सदन में जैसे ही कार्रवाई शुरू हुई, पक्ष और विपक्ष दोनों ही दलों के पार्षदों ने शहर की बदहाल व्यवस्था और अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर मोर्चा खोल दिया। अतिक्रमण, अवैध कब्जों और हाउस टैक्स की लचर वसूली को लेकर पार्षदों का गुस्सा सातवें आसमान पर नजर आया।

​इस भारी शोर-शराबे और नोकझोंक के बीच, मेयर हेमलता दिवाकर की अध्यक्षता में वित्तीय वर्ष के लिए 2202.86 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट पटल पर रखा गया। कार्यकारिणी द्वारा सप्ताहभर पहले मंजूर किए गए इस बजट को लेखाधिकारी विपिन यादव ने सदन के सामने पेश किया।

​कागजों पर अतिक्रमण हटाओ अभियान, जमीन पर सिर्फ खानापूर्ति: पार्षदों का आरोप

​सदन की कार्यवाही शुरू होते ही पार्षदों ने शहर में पैर पसारते अतिक्रमण का मुद्दा उठाया। पार्षदों का साफ तौर पर कहना था कि अधिकारी अतिक्रमण हटाने के नाम पर केवल खानापूर्ति कर रहे हैं।

​”जब हम जनता के बीच जाते हैं, तो लोग हमसे सवाल करते हैं। अतिक्रमण न हटने के कारण जनता हमें घेरती है, जबकि अधिकारी एयरकंडीशनर कमरों में बैठकर सिर्फ कागजी योजनाएं बनाते हैं।” – पार्षदों का संयुक्त बयान

​पार्षदों ने इस बात पर भी गहरी नाराजगी जताई कि नगर निगम ने अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है, जिस पर सालाना लगभग 1.25 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इसके बावजूद जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखती। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस भारी-भरकम खर्च के मुकाबले अतिक्रमणकारियों से जुर्माने के रूप में नगर निगम को महज 14 लाख रुपये की आय हुई है।

​हाउस टैक्स और विज्ञापन की आय पर अधिकारियों को घेरा

​बजट से पहले जब टैक्स वसूली पर चर्चा शुरू हुई, तो पार्षद रवि माथुर ने अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सीधे तौर पर नगर निगम के डेटाबेस पर सवाल खड़े कर दिए। रवि माथुर ने कहा:

​”नगर निगम के अधिकारियों के पास ऐसा कोई पुख्ता रिकॉर्ड ही नहीं है, जिससे यह अनुमान लगाया जा सके कि शहर से कितना हाउस टैक्स वसूला जा सकता है। जब आपके पास शहर की संपत्तियों का पूरा ब्योरा ही नहीं है, तो शत-प्रतिशत वसूली कैसे मुमकिन है?”

​इस मुद्दे पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पार्षदों ने भी सुर में सुर मिलाया। बसपा पार्षदों का कहना था कि हाउस टैक्स नगर निगम की आय का सबसे मुख्य जरिया है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कई संपत्तियां आज भी टैक्स के दायरे से बाहर हैं। इसके अलावा, शहर में लगे विज्ञापनों से होने वाली आय में विसंगतियों को लेकर भी पार्षदों ने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।

​लॉयर्स कॉलोनी पार्क पर कब्जे का मामला और प्रतिबंधित पॉलीथिन पर दोहरी नीति

​सदन में स्थानीय मुद्दों की भी गूंज सुनाई दी। पार्षदों ने लॉयर्स कॉलोनी स्थित पार्क का मामला उठाते हुए आरोप लगाया कि कुछ रसूखदार लोगों ने पार्क में बनी पानी की टंकी के पास अवैध कब्जा कर लिया है। कई बार लिखित और मौखिक शिकायत के बाद भी अधिकारियों के कान पर जूं नहीं रेंगी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मेयर हेमलता दिवाकर ने तुरंत जांच कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

FB IMG 1779363231364

​इसके साथ ही, प्रतिबंधित पॉलीथिन के खिलाफ होने वाली कार्रवाई पर भी पार्षदों ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि नगर निगम के अधिकारी बड़े थोक व्यापारियों और निर्माताओं पर हाथ डालने के बजाय गरीब और छोटे दुकानदारों को निशाना बना रहे हैं, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। इस दोहरी नीति को तुरंत बंद किया जाना चाहिए।

​विकास कार्यों का खाका: जानें किस मद में कितना होगा खर्च

​हंगामे के बीच ही सदन में विकास कार्यों के लिए स्वीकृत प्रस्तावों को भी रखा गया। इस 2202.86 करोड़ रुपये के बजट में शहर की सूरत बदलने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं:

  • सड़कों का निर्माण व सुधार: शहर की सड़कों को गड्ढामुक्त और चमकाने के लिए सबसे बड़ी राशि 412 करोड़ रुपये आवंटित की गई है।
  • पुराने नालों की मरम्मत: जलभराव की समस्या से निपटने के लिए पुराने नालों की मरम्मत और नए निर्माण पर 44 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
  • स्ट्रीट लाइट: रात में शहर को रोशन रखने के लिए 30 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
  • पार्कों का विकास और हरियाली: पार्कों के सुंदरीकरण के लिए 12 करोड़ रुपये और शहर में हरियाली बढ़ाने के लिए 5 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
  • डॉग शेल्टर होम: आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए 1 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।

​टोरंट पावर को 431 करोड़ की छूट पर भारी बवाल

​बजट सत्र के दौरान सबसे बड़ा धमाका टोरंट पावर के मुद्दे पर हुआ। जैसे ही पार्षदों को पता चला कि नगर निगम ने निजी बिजली कंपनी टोरंट पावर पर बकाया 431 करोड़ रुपये की राशि को हटा (माफ कर) दिया है, पूरा सदन ‘नो-नो’ के नारों से गूंज उठा।

​पार्षदों ने तीखे लहजे में पूछा कि आखिर किस नियम और अधिकार के तहत जनता के पैसे की इस तरह अनदेखी की गई और एक निजी कंपनी को इतनी बड़ी राहत दी गई? हंगामा बढ़ता देख प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया। सदन को सूचित किया गया कि यह छूट नगर निगम ने अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि शासन स्तर से जारी निर्देशों (शासनादेश) के तहत दी है। हालांकि, इस जवाब से भी पार्षद पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आए।