आगरा। ताजनगरी के नगर निगम सदन की कार्यवाही सोमवार को उस समय अखाड़े में तब्दील हो गई, जब सत्तापक्ष के ही एक पार्षद ने अपनी सरकार की व्यवस्थाओं और अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सदन के भीतर उस समय स्थिति असहज हो गई जब भाजपा पार्षद हरिओम बाबा ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए अपनी शर्ट उतार दी और अर्धनग्न अवस्था में ही मेयर और नगरायुक्त के सामने धरने पर बैठ गए।

​इस हंगामे के दौरान न केवल भाजपा पार्षद बल्कि विपक्षी कांग्रेस पार्षदों ने भी जमकर नारेबाजी की, जिससे सदन की गरिमा पर सवालिया निशान लग गए।

​भ्रष्टाचार के आरोपों से गूँजा सदन: “एक लाख में बिक रही है नौकरी”

​सदन की बैठक सामान्य रूप से चल रही थी, लेकिन अचानक वार्ड पार्षद हरिओम बाबा का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने आगरा नगर निगम के अधिकारियों पर सफाई कर्मियों की भर्ती में बड़े पैमाने पर अवैध वसूली का आरोप लगाया। पार्षद का दावा है कि निगम में सफाई कर्मियों की नियुक्ति के लिए एक-एक लाख रुपये की रिश्वत ली जा रही है।

​हरिओम बाबा ने चिल्लाते हुए कहा, “नगर निगम अब सेवा का माध्यम नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है। गरीब लोगों से नौकरी के नाम पर खुलेआम पैसे वसूले जा रहे हैं, और प्रशासन मौन है।”

​दोहरा वेतन घोटाला: फिरोजाबाद और आगरा का कनेक्शन

​हंगामे के दौरान पार्षद ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आगरा नगर निगम में करीब 15 ऐसे कर्मचारी हैं, जो कागजों पर तो आगरा में तैनात हैं, लेकिन वे फिरोजाबाद नगर निगम से भी वेतन उठा रहे हैं। पार्षद ने इसे एक सुनियोजित ‘वेतन घोटाला’ करार देते हुए जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि जब तक इन भ्रष्ट अधिकारियों और दोहरे वेतन भोगियों पर कार्रवाई नहीं होती, वह शांत नहीं बैठेंगे।

​मेयर हेमलता दिवाकर की नाराजगी: “मर्यादा लांघ रहे हैं पार्षद”

​पार्षद द्वारा सदन के भीतर कपड़े उतारकर प्रदर्शन करने पर मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाहा ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सदन की गरिमा का हवाला देते हुए पार्षद को जमकर फटकार लगाई। मेयर ने कहा, “सदन में महिला पार्षद भी मौजूद हैं। इस तरह का व्यवहार न केवल अमर्यादित है बल्कि यह पूरी संस्था का अपमान है।”

​मेयर ने स्पष्ट किया कि किसी भी पार्षद को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन उसके लिए एक संवैधानिक प्रक्रिया होती है। इस तरह के ‘नग्न प्रदर्शन’ को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी कि पार्षद हरिओम बाबा के इस कृत्य पर उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

क्या नगर निगम में वाकई ‘सब कुछ ठीक’ नहीं है?

​आगरा नगर निगम पिछले कुछ समय से लगातार विवादों के घेरे में रहा है। चाहे वह सफाई व्यवस्था हो या टैक्स वसूली, जनता की शिकायतें अक्सर सामने आती रहती हैं। लेकिन इस बार आरोप बाहर से नहीं, बल्कि सत्ताधारी दल के अंदर से आए हैं। भाजपा पार्षद का अपनी ही मेयर के खिलाफ इस तरह का उग्र प्रदर्शन यह संकेत देता है कि निगम के भीतर अफसरों और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल की भारी कमी है।

​सफाई कर्मियों की भर्ती में धांधली का आरोप यदि सच साबित होता है, तो यह नगर निगम प्रशासन की पारदर्शिता पर एक बड़ा धब्बा होगा। फिलहाल, नगरायुक्त ने इन आरोपों पर जांच की बात कही है, लेकिन पार्षद का कहना है कि जांच केवल फाइलों में दबकर रह जाती है।