मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक ऐसी सनसनीखेज और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और मानसिक स्थिति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मेरठ के सदर बाजार इलाके के तेली मोहल्ले में एक पिता अपनी 35 वर्षीय बेटी के शव के साथ पिछले चार महीनों से रह रहा था। यह मामला तब उजागर हुआ जब पुलिस ने घर का दरवाजा तोड़ा और अंदर का मंजर देखकर अनुभवी पुलिसकर्मियों के भी पैरों तले जमीन खिसक गई।

​बदबू छिपाने के लिए परफ्यूम का छिड़काव: एक खौफनाक मंजर

​अक्सर हम कहानियों या हॉरर फिल्मों में ऐसी घटनाएं देखते हैं, लेकिन मेरठ के इस घर की हकीकत किसी भी काल्पनिक डरावनी फिल्म से कहीं अधिक भयावह थी। पुलिस के मुताबिक, 35 वर्षीय प्रियंका बिस्वास की मौत करीब चार महीने पहले ही हो चुकी थी। बंद कमरे के भीतर लाश सड़ रही थी, लेकिन पिता उदय भानु ने किसी को इसकी भनक तक नहीं लगने दी।

​पड़ोसियों और रिश्तेदारों को शक न हो, इसके लिए पिता हर रोज शव पर परफ्यूम और रूम फ्रेशनर का छिड़काव करता था ताकि सड़ांध को दबाया जा सके। जब दुर्गंध असहनीय हो जाती, तो वह कमरे को बंद कर कुछ समय के लिए गायब हो जाता। मौके पर पहुंची पुलिस को शव पूरी तरह कंकाल में तब्दील मिला, शरीर का मांस गल चुका था और केवल एक पैर का कुछ हिस्सा ही शेष बचा था।

​रिश्तेदारों के शक ने खोला ‘मौत के घर’ का राज

​इस रूह कंपा देने वाली घटना का खुलासा शुक्रवार को तब हुआ जब उदय भानु के कुछ रिश्तेदार उनसे मिलने पहुंचे। काफी समय से फोन पर बात न होने और प्रियंका के दिखाई न देने के कारण उन्हें अनहोनी की आशंका थी। जब रिश्तेदार घर पहुंचे, तो बाहर ताला लटका था लेकिन अंदर से ऐसी सड़ांध आ रही थी कि खड़ा होना मुश्किल था।

​हैरानी की बात यह रही कि उसी दौरान रिश्तेदारों ने उदय भानु को पास की एक चाय की दुकान पर बैठे देखा। जब उनसे प्रियंका के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने गुमराह करते हुए कहा कि वह देहरादून के एक अस्पताल में भर्ती है। हालांकि, घर के भीतर से आ रही दुर्गंध और उदय भानु के संदिग्ध व्यवहार को देखते हुए रिश्तेदारों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।

​पुलिस और फोरेंसिक टीम भी रह गई दंग

​सूचना मिलते ही सदर बाजार पुलिस मौके पर पहुंची। घर के अंदर घुसते ही पुलिसकर्मियों को अपने मुंह पर कपड़ा बांधना पड़ा। घर के एक भीतरी कमरे में प्रियंका का शव पड़ा था, जो अब केवल हड्डियों का ढांचा मात्र रह गया था। स्थिति इतनी वीभत्स थी कि वहां मौजूद कुछ लोगों को उल्टियां होने लगीं।

​जांच में पता चला कि उदय भानु मूल रूप से बंगाल के रहने वाले हैं और काशी (वाराणसी) में शिक्षा विभाग से 2010 में रिटायर हुए थे। उनकी पत्नी शर्मिष्ठा की मौत 13 साल पहले ही हो चुकी थी। तब से पिता और बेटी इसी मकान में अकेले रहते थे। उदय भानु का स्वभाव काफी अंतर्मुखी था और वे न तो खुद किसी से मिलते थे और न ही अपनी बेटी प्रियंका को किसी से मिलने देते थे।

​”अंतिम संस्कार की हिम्मत नहीं थी” – झकझोर देने वाला बयान

​पुलिस हिरासत में जब उदय भानु से पूछताछ की गई, तो उन्होंने जो बताया वह किसी के भी दिल को पसीजने पर मजबूर कर दे। उदय ने बताया कि दिसंबर 2025 में बीमारी के कारण प्रियंका की मौत हो गई थी। वह अपनी बेटी से इतना प्रेम करते थे और उसकी मौत से इतने टूट चुके थे कि उनमें उसका अंतिम संस्कार करने की हिम्मत ही नहीं बची।

​शुरुआत में वह एक सप्ताह तक शव के साथ ही रहे और बदबू रोकने के लिए लगातार परफ्यूम छिड़कते रहे। बाद में जब हालात बिगड़ने लगे, तो वह घर को लॉक कर देहरादून चले गए और बीच-बीच में वापस आकर घर की स्थिति देख जाते थे। यह अकेलेपन और अवसाद की पराकाष्ठा थी कि एक पिता अपनी संतान के कंकाल के साथ रहने को मजबूर था।

​क्या यह केवल एक अपराध है या मानसिक बीमारी?

​मेरठ की इस घटना ने समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का मानना है कि यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि गहरा मनोवैज्ञानिक भी है। पत्नी की मौत के बाद बेटी ही उदय भानु का एकमात्र सहारा थी। उसे खोने का गम शायद उनके मानसिक संतुलन पर भारी पड़ गया, जिसे ‘डिनियल’ (सच्चाई को स्वीकार न करना) की स्थिति कहा जा सकता है।

​फिलहाल, पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है ताकि मौत के सटीक कारणों और समय का पता लगाया जा सके। इलाके के लोग अभी भी सदमे में हैं और इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि उनके पड़ोस में महीनों से एक लाश के साथ कोई शख्स रह रहा था।

निष्कर्ष

​मेरठ का यह ‘हॉरर केस’ हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि आधुनिक समाज में अकेलापन इंसान को किस हद तक ले जा सकता है। एक पिता का अपनी बेटी के प्रति लगाव जब जुनून और मानसिक अवसाद में बदल जाता है, तो ऐसी हृदयविदारक घटनाएं जन्म लेती हैं। पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है, लेकिन इस घटना ने रिश्तों की संवेदनशीलता और अकेलेपन के डर को बखूबी बयां कर दिया है।

पाठकों के लिए एक सवाल:

क्या आपको लगता है कि समाज में बढ़ता अकेलापन और अपनों से दूरी ही ऐसी घटनाओं की मुख्य वजह है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।