
आगरा के घरों में इन दिनों चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है, लेकिन वजह महंगाई नहीं बल्कि रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत है। ताजनगरी में पिछले कुछ हफ्तों से गैस सिलेंडर की सप्लाई में आई रुकावट ने आम आदमी के किचन का बजट और सुकून दोनों बिगाड़ दिया है। इस संकट के बीच एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है—आगरा के लोग अब गैस सिलेंडर के भरोसे बैठने के बजाय ‘इलेक्ट्रिक कुकिंग’ यानी इंडक्शन चूल्हों की ओर रुख कर रहे हैं।
बाजार का आलम यह है कि जो इंडक्शन कभी महीनों तक दुकान की शोभा बढ़ाते थे, अब उन्हें खरीदने के लिए लंबी कतारें लग रही हैं।
कभी महीने में बिकता था एक, अब रोजाना 25 की सेल
आगरा के शाहगंज, लोहामंडी और संजय प्लेस जैसे प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स बाजारों में स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। दुकानदारों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों तक इंडक्शन चूल्हा उनकी प्राथमिकता सूची में नहीं था। एक औसत दुकान पर पूरे महीने में मुश्किल से एक या दो इंडक्शन बिकते थे।
लेकिन, पिछले तीन-चार दिनों में बिक्री के आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है। अब शहर की बड़ी दुकानों पर रोजाना 20 से 25 इंडक्शन चूल्हों की बिक्री हो रही है। व्यापारियों की मानें तो मांग में यह उछाल इतना अचानक आया है कि स्टॉक मैनेज करना मुश्किल हो गया है।
ऑनलाइन मार्केट भी पस्त, डिलीवरी में हो रही देरी
सिर्फ गली-मोहल्ले की दुकानें ही नहीं, बल्कि ई-कॉमर्स दिग्गज जैसे अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर भी इसका असर दिख रहा है। आगरा के पिन कोड्स पर जब लोग लोकप्रिय ब्रांड्स के इंडक्शन सर्च कर रहे हैं, तो वहां ‘आउट ऑफ स्टॉक’ या ‘7-10 दिनों में डिलीवरी’ के संदेश दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय स्तर पर मांग बढ़ने और सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण लोग अब अधिक कीमत चुकाकर भी इंडक्शन खरीदने को तैयार हैं।
घर ही नहीं, दुकानों और रेस्टोरेंट में भी बढ़ा यूज़
एलपीजी की कमी का असर सिर्फ घरेलू उपभोक्ताओं पर ही नहीं, बल्कि छोटे रेस्टोरेंट, चाय की दुकानों और हलवाइयों पर भी पड़ा है। व्यावसायिक सिलेंडर की कीमतों और किल्लत को देखते हुए छोटे दुकानदार अब कमर्शियल इंडक्शन का उपयोग कर रहे हैं।
दुकानदारों का तर्क है कि गैस सिलेंडर के लिए ब्लैक में पैसे देने या कई दिनों तक इंतजार करने से बेहतर है कि बिजली से चलने वाले चूल्हे का इस्तेमाल किया जाए। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि काम भी नहीं रुक रहा।
आखिर क्यों अचानक पैदा हुई सिलेंडर की किल्लत?
आगरा में गैस की इस कमी के पीछे सप्लाई चेन में आई तकनीकी दिक्कतें और गोदामों में स्टॉक की कमी बताई जा रही है। बुकिंग के 10 से 15 दिन बाद भी उपभोक्ताओं को सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। हताश होकर लोग अब वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश कर रहे हैं। इंडक्शन चूल्हा इस समय सबसे सस्ता और सुलभ विकल्प बनकर उभरा है, क्योंकि इसमें न तो आग का खतरा है और न ही गैस खत्म होने का डर।
इंडक्शन खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
यदि आप भी इस संकट के दौर में इंडक्शन खरीदने की सोच रहे हैं, तो कुछ महत्वपूर्ण बातों पर गौर करना जरूरी है:
- वॉट क्षमता: कम से कम 1800W से 2000W का इंडक्शन लें ताकि खाना जल्दी बने।
- ऑटो-कट फीचर: सुरक्षा के लिए यह फीचर बेहद जरूरी है।
- बर्तन की अनुकूलता: याद रखें कि इंडक्शन पर सिर्फ फेरोमैग्नेटिक (लोहा या स्टील) बेस वाले बर्तन ही काम करते हैं।
- वारंटी: स्थानीय ब्रांड के बजाय अच्छी वारंटी वाले ब्रांडेड इंडक्शन ही चुनें।
निष्कर्ष
आगरा में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत ने उपभोक्ताओं के व्यवहार को बदल दिया है। जो इंडक्शन कभी ‘बैकअप’ माना जाता था, वह अब ‘प्राइमरी’ कुकिंग सोर्स बनता जा रहा है। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि जब गैस की सप्लाई सामान्य होगी, तब क्या लोग वापस गैस की ओर लौटेंगे या बिजली से चलने वाली इस आधुनिक तकनीक को ही अपनाए रखेंगे।
पाठकों से सवाल: क्या आप भी गैस सिलेंडर की किल्लत से जूझ रहे हैं? क्या आपको लगता है कि इंडक्शन चूल्हा, गैस सिलेंडर का एक स्थाई और सस्ता विकल्प हो सकता है? हमें कमेंट में जरूर बताएं।



