
आगरा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को ताजनगरी आगरा के दौरे पर रहे, जहाँ उनके तेवर पूरी तरह चुनावी और विकासवादी नजर आए। मुख्यमंत्री ने यहाँ विपक्ष, किसी भी पार्टी का नाम लिए बिना उन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बदलते स्वरूप की तुलना करते हुए कहा कि एक दौर था जब प्रदेश “वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया” के लिए जाना जाता था, लेकिन आज उनकी सरकार “वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज” के संकल्प को धरातल पर उतार रही है।

आगरा के खेरिया एयरपोर्ट पर जनप्रतिनिधियों द्वारा भव्य स्वागत के बाद, मुख्यमंत्री ने न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की नई सौगातें दीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा की अहम समन्वय बैठक में शामिल होकर 2027 के चुनावी रण की जमीन भी तैयार की।
17 से 81 तक का सफर: स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव
सिकंदरा क्षेत्र में ‘यथार्थ हॉस्पिटल’ का उद्घाटन करने के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने आंकड़ों के जरिए पिछली सरकारों को घेरा। उन्होंने कहा, “2017 से पहले उत्तर प्रदेश की स्थिति दयनीय थी। पूरे राज्य में केवल 17 मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन आज हम 81 मेडिकल कॉलेजों का संचालन कर रहे हैं। हमने माफिया संस्कृति को खत्म कर शिक्षा और स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है।”

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि उत्तर प्रदेश सरकार जल्द ही ‘सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पॉलिसी’ लाने जा रही है। इस नीति का उद्देश्य निजी क्षेत्र के सहयोग से प्रदेश के कोने-कोने तक आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं पहुँचाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी संस्थान मेडिकल कॉलेज या बड़े अस्पताल बनाने के लिए आगे आएंगे, सरकार उन्हें हर संभव सहयोग प्रदान करेगी।
RSS-भाजपा समन्वय बैठक: बंद कमरे में 2 घंटे चला मंथन
मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल उद्घाटन तक सीमित नहीं था। आगरा के अमर कन्वेंशन सेंटर में आरएसएस के ब्रज क्षेत्र के पदाधिकारियों और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ करीब दो घंटे तक बंद कमरे में समन्वय बैठक हुई। इस बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह भी मौजूद रहे।
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक का मुख्य एजेंडा मिशन 2027 (विधानसभा चुनाव) और संघ का शताब्दी वर्ष रहा। मुख्यमंत्री ने संघ के स्वयंसेवकों के साथ सात्विक भोजन (बिना प्याज-लहसुन की लौकी और गोभी की सब्जी) किया, जिसे राजनीतिक गलियारों में ‘डिनर डिप्लोमेसी’ के रूप में देखा जा रहा है। इसका मकसद सरकार और संगठन के बीच की दूरियों को पाटकर कार्यकर्ताओं में नया जोश भरना है।
जब अपनों ने ही उठाए अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल
बैठक के दौरान सब कुछ सामान्य नहीं रहा। संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री के सामने प्रशासन और पुलिस की कार्यशैली को लेकर नाराजगी जाहिर की। पदाधिकारियों का सीधा आरोप था कि “अफसर सुनते नहीं हैं।” * अतिक्रमण का मुद्दा: आगरा शहर में बढ़ते अवैध कब्जों और अतिक्रमण पर चिंता जताई गई।
- TTZ और उद्योग: ताज ट्रिपेजियम जोन (TTZ) के कारण उद्योगों पर लगे प्रतिबंधों को हटाने की मांग उठी, ताकि आगरा में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकें।
- अफसरशाही: कार्यकर्ताओं ने शिकायत की कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील नहीं हैं, जिस पर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाने का आश्वासन दिया।
2027 का रोडमैप: बूथ स्तर तक होगी घेराबंदी
हालांकि प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने मीडिया से बातचीत में इसे एक “शिष्टाचार भेंट” करार दिया, लेकिन बैठक के भीतर की रणनीति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा और संघ अब बूथ स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत करने की योजना बना रहे हैं।
बैठक में तय किया गया कि सरकार की जनहितकारी योजनाओं को घर-घर तक पहुँचाने के लिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जाएगा। विशेष रूप से युवाओं और पिछड़ों को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने पर चर्चा हुई।
निष्कर्ष: विकास और राष्ट्रवाद का मेल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आगरा दौरा यह साफ कर गया कि आने वाले समय में भाजपा ‘विकास’ और ‘सुशासन’ को ही अपना मुख्य हथियार बनाएगी। माफियाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति और मेडिकल कॉलेजों का जाल बिछाने का दावा, मध्यम वर्ग और ग्रामीण आबादी को साधने की एक सोची-समझी रणनीति है। संगठन और सरकार के बीच का यह तालमेल आगामी चुनावों में कितना कारगर साबित होता है, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन आगरा से योगी ने विपक्ष को स्पष्ट संदेश दे दिया है।
पाठकों के लिए एक सवाल:
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