
आगरा। ताजनगरी में प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी इस कदर बढ़ गई है कि अब जनता तो दूर, जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों (विधायकों और सांसदों) की बात सुनना भी अफसरों को गंवारा नहीं है। सरकारी आदेशों को ठेंगे पर रखकर ‘साहब’ बने बैठे इन अधिकारियों के खिलाफ अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद मोर्चा संभालने जा रहे हैं। कल मुख्यमंत्री का आगरा दौरा है और कयास लगाए जा रहे हैं कि इस दौरान कई ‘बेलगाम’ अफसरों पर गाज गिर सकती है।
सिंचाई विभाग: नहर सफाई के नाम पर 3 करोड़ की ‘सफाई’
आगरा में भ्रष्टाचार का सबसे ताजा और चौंकाने वाला मामला सिंचाई विभाग से सामने आया है। आरोप है कि विभाग के इंजीनियरों और ठेकेदारों ने मिलीभगत कर नहर सफाई के नाम पर करीब 3 करोड़ रुपये डकार लिए। जमीन पर काम कम और कागजों पर सफाई ज्यादा नजर आ रही है। स्थानीय किसान पिछले काफी समय से इस फर्जीवाड़े के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। जब किसानों ने परेशान होकर जनप्रतिनिधियों का घेराव किया, तो अधिकारियों की एक और बड़ी लापरवाही उजागर हुई।
जब विधायकों के फोन भी नहीं उठाते ‘साहब’
उत्तर प्रदेश शासन का सख्त निर्देश है कि सीयूजी (CUG) नंबरों पर आने वाली हर कॉल को अटेंड किया जाए, क्योंकि ये नंबर जनता की सेवा और संपर्क के लिए दिए गए हैं। लेकिन आगरा में हकीकत इसके उलट है। जिला विकास समन्वय और अनुश्रवण समिति (दिशा) की पिछली बैठक में विधायकों ने सांसद राजकुमार चाहर के सामने अपना दर्द बयां किया। विधायकों का आरोप है कि सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता नीरज कुमार समेत कई विभागों के अफसर जनप्रतिनिधियों तक का फोन रिसीव नहीं करते। बार-बार कॉल करने पर नंबर तक ब्लॉक कर दिए जाते हैं।
सिर्फ सिंचाई ही नहीं, हर महकमे में ‘अघोषित इमरजेंसी’
अफसरों की यह मनमानी केवल सिंचाई विभाग तक सीमित नहीं है। नगर निगम, विकास प्राधिकरण, दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम, कृषि, उद्यान और राजस्व विभाग के दफ्तरों में भी यही हाल है। ब्लॉक और तहसीलों की स्थिति तो और भी दयनीय है, जहां आम आदमी अपनी फरियाद लेकर भटकता रहता है और अधिकारी अपनी वातानुकूलित गाड़ियों और दफ्तरों से बाहर निकलना भी जरूरी नहीं समझते।
सांसद की फटकार और जिलाधिकारी का कड़ा रुख
’दिशा’ की बैठक में जब विधायकों की शिकायतें बढ़ीं, तो सांसद राजकुमार चाहर ने सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को कड़ी फटकार लगाई और स्पष्टीकरण तलब किया। इस मामले पर गंभीरता दिखाते हुए आगरा के जिलाधिकारी अरविंद बंगारी ने भी साफ कर दिया है कि जवाबदेही तय की जाएगी। जिलाधिकारी का कहना है कि सीयूजी नंबर संवाद के लिए हैं, न कि जेब में रखकर घूमने के लिए। जल्द ही सभी अधिकारियों के कॉल रिकॉर्ड्स का सत्यापन कराया जा सकता है।
सीएम योगी का आगरा दौरा: क्या नपेंगे लापरवाह अधिकारी?
कल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगरा पहुंच रहे हैं। सूत्रों की मानें तो शहर के कुछ वरिष्ठ जनप्रतिनिधि इस बार आर-पार के मूड में हैं। वे मुख्यमंत्री के सामने सीधा कच्चा चिट्ठा रखने की तैयारी कर रहे हैं कि कैसे अधिकारी सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं और जनहित के कार्यों में रोड़ा अटका रहे हैं। मुख्यमंत्री की कार्यशैली को देखते हुए यह माना जा रहा है कि जिन अफसरों ने जनता और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी की है, उन पर बड़ी कार्रवाई होना लगभग तय है।
निष्कर्ष
लोकतंत्र में अधिकारी जनता के सेवक होते हैं, मालिक नहीं। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं या संवाद के सारे रास्ते बंद कर दें, तो व्यवस्था चरमराने लगती है। आगरा में 3 करोड़ का घोटाला और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी इस बात का प्रमाण है कि कुछ अधिकारियों को अब सत्ता का डर नहीं रहा। लेकिन सीएम योगी के आगमन ने इन ‘बेलगाम’ अफसरों की रातों की नींद उड़ा दी है। अब देखना यह होगा कि कल की बैठक के बाद कितने अधिकारियों पर कार्रवाई की गाज गिरती है।
पाठकों के लिए सवाल:
क्या आपको भी लगता है कि सरकारी अधिकारियों को सीयूजी फोन न उठाने के लिए निलंबित किया जाना चाहिए? अपने अनुभव हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।




