कबाड़ बस या ‘चलता-फिरता ताबूत’? अलीगढ़ में स्कूल बस के टूटे फर्श से कुचलकर छात्रा की मौत; एआरटीओ और प्रबंधन की लापरवाही ने छीनी इकलौती बेटी

अलीगढ़/कासगंज: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ और कासगंज की सीमा पर शनिवार को एक ऐसी घटना घटी जिसने न केवल मानवता को शर्मसार किया, बल्कि हमारे देश की स्कूली शिक्षा प्रणाली और परिवहन सुरक्षा के दावों की भी पोल खोल दी। एक सात साल की मासूम बच्ची, जो अपने उज्ज्वल भविष्य के सपने लेकर स्कूल गई थी, वह अपनी ही स्कूल बस के “मौत के जाल” (टूटे हुए फर्श) का शिकार हो गई।

कैसे हुआ यह हृदयविदारक हादसा?

​माउंट देव इंटरनेशनल स्कूल की बस (UP 87 T 4252) शनिवार दोपहर करीब ढाई बजे बच्चों को लेकर घर छोड़ रही थी। बस में 50 के करीब बच्चे सवार थे। जनसेवा केंद्र संचालक रवि कुमार की सात वर्षीय बेटी अनन्या अपने बड़े भाई गोलू के साथ बस में बैठी थी।

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​प्रत्यक्षदर्शियों और बस में सवार अन्य बच्चों के अनुसार, जब बस नगला बंजारा के पास एक स्पीड ब्रेकर पर उछली, तो पिछले टायर के ऊपर वाला बस का फर्श अचानक टूट गया। अनन्या उसी हिस्से वाली सीट पर बैठी थी और संतुलन बिगड़ने के कारण वह सीधे उस छेद से नीचे सड़क पर गिर गई। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, बस का भारी-भरकम पिछला पहिया मासूम के सिर और छाती को कुचलता हुआ निकल गया।

चालक की संवेदनहीनता: लहूलुहान बच्ची को सीट पर लिटाए रखा

​हादसे के बाद जो हुआ, वह और भी भयावह था। बच्चों के चीखने और राहगीरों के शोर मचाने पर जब चालक चंद्रपाल ने बस रोकी, तो उसने मासूम को अस्पताल ले जाने के बजाय लहूलुहान हालत में उठाकर बस की सीट पर ही लिटा दिया। परिजनों का आरोप है कि चालक उसे “बेहोश” बताकर गुमराह करता रहा, जबकि बच्ची ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। चालक उसे लेकर उसके पिता के पास मलसई चौराहे पहुँचा, जहाँ मासूम के शव को देख पिता रवि कुमार बेसुध हो गए।

स्कूल प्रबंधन और परिवहन विभाग के दावों की खुली पोल

​इस घटना ने स्कूल प्रबंधन की भारी लापरवाही को उजागर किया है। स्कूल प्रबंधक अरविंद यादव का यह तर्क कि “बस का फर्श शनिवार को ही टूटा था,” किसी के गले नहीं उतर रहा। स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि बस की हालत काफी समय से खस्ता थी।

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​वहीं, एआरटीओ (प्रवर्तन) प्रवेश कुमार के बयान ने विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि बस का परमिट और बीमा काफी समय पहले ही समाप्त हो चुका था। सवाल यह उठता है कि बिना वैध कागजात और फिटनेस के यह “कबाड़” बस महीनों से सड़कों पर बच्चों की जान जोखिम में डालकर कैसे दौड़ रही थी? क्या विभाग केवल किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था?

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल: इकलौती बेटी थी अनन्या

​अनन्या अपने माता-पिता की इकलौती बेटी थी। उसका बड़ा भाई गोलू, जो उसी बस में सवार था, अपनी आंखों के सामने बहन के साथ हुए इस खौफनाक मंजर को देखकर सदमे में है। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने कासगंज-छर्रा मार्ग पर जाम लगा दिया। पुलिस प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई का आश्वासन देकर बमुश्किल जाम खुलवाया। पुलिस ने बस को कब्जे में ले लिया है और चालक को हिरासत में लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

निष्कर्ष और सुरक्षा पर सवाल

​यह कोई पहली घटना नहीं है जब स्कूल प्रबंधन की लापरवाही और परिवहन विभाग की अनदेखी ने किसी घर का चिराग बुझाया हो। फिटनेस प्रमाण पत्र होने के बावजूद बस का फर्श टूटना यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। जब तक अनफिट वाहनों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति नहीं अपनाई जाएगी, तब तक मासूमों की जान ऐसे ही दांव पर लगी रहेगी।

पाठकों के लिए एक सवाल:

क्या आपको लगता है कि इस तरह के हादसों के लिए केवल ड्राइवर जिम्मेदार है, या स्कूल प्रबंधन और परिवहन विभाग पर भी गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा चलना चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।