आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में सत्ता की हनक और टोल पर विवाद का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। फतेहपुर सीकरी से विधायक और कद्दावर नेता चौधरी बाबूलाल के पुत्र सुरेश चौधरी पर टोल कर्मचारी के साथ मारपीट, अभद्रता और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। अछनेरा थाना क्षेत्र के टोल प्लाजा पर हुई यह घटना अब राजनीतिक और कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

​विवाद की जड़: ‘टोल फ्री’ कराने को लेकर शुरू हुई बहस

​यह पूरी घटना अछनेरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले टोल प्लाजा की है। जानकारी के अनुसार, विधायक पुत्र सुरेश चौधरी अपने समर्थकों के साथ वहां से गुजर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों और दर्ज शिकायत के मुताबिक, विवाद की शुरुआत गाड़ियों को ‘टोल फ्री’ करवाने की जिद से हुई। जब टोल कर्मियों ने नियमों का हवाला देते हुए प्रक्रिया का पालन करने को कहा, तो बात तू-तू मैं-मैं से शुरू होकर धक्का-मुक्की और मारपीट तक जा पहुंची।

​आरोप है कि सुरेश चौधरी और उनके साथ मौजूद लोगों ने न केवल टोल कर्मचारी के साथ बदसलूकी की, बल्कि उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी। सत्ता के रसूख के सामने पहले तो कर्मचारी सहम गए, लेकिन घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया।

​सीसीटीवी फुटेज बना पुलिस के लिए सबसे बड़ा सबूत

​किसी भी आपराधिक मामले में तकनीकी साक्ष्य सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, और इस मामले में भी ऐसा ही हुआ। टोल प्लाजा पर लगे हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों में यह पूरी वारदात कैद हो गई। वायरल हो रहे फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह बहस बढ़ी और फिर मारपीट की नौबत आई।

​पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद इस सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है। अधिकारियों का मानना है कि यह फुटेज कोर्ट में आरोप सिद्ध करने के लिए सबसे पुख्ता सबूत साबित होगा। फुटेज सामने आने के बाद ही पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा, क्योंकि वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से कानून-व्यवस्था पर सवाल उठने लगे थे।

​पीड़ित पक्ष की चेतावनी और पुलिस की कार्रवाई

​मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब पीड़ित टोलकर्मी के परिजनों ने पुलिस की सुस्ती पर नाराजगी जताई। परिजनों का आरोप था कि विधायक का पुत्र होने के कारण पुलिस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई कि न्याय न मिलने की सूरत में पीड़ित परिवार ने आत्मदाह तक की चेतावनी दे डाली।

​चौतरफा दबाव और प्राथमिक साक्ष्यों को देखते हुए, अछनेरा थाना पुलिस ने आखिरकार सुरेश चौधरी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं (मारपीट और आपराधिक धमकी) में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून सबके लिए बराबर है और जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है।

​राजनीतिक गलियारों में मची हलचल

​आगरा की राजनीति में चौधरी बाबूलाल एक बड़ा नाम हैं। ऐसे में उनके पुत्र पर एफआईआर दर्ज होना विपक्षी दलों को बैठे-बिठाए एक मुद्दा दे गया है। विपक्षी नेताओं ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि प्रदेश में ‘अपराध मुक्त’ शासन के दावों के बीच सत्ताधारी दल के प्रतिनिधि ही कानून को हाथ में ले रहे हैं। वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से अभी इस मामले पर नपी-तुली प्रतिक्रिया ही सामने आई है, जिसमें जांच के बाद कार्रवाई की बात कही जा रही है।

​निष्कर्ष: क्या रसूख पर भारी पड़ेगा कानून?

​आगरा की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का शासन सर्वोपरि है। चाहे वह आम आदमी हो या किसी रसूखदार परिवार का सदस्य, नियम सबके लिए एक समान होने चाहिए। सीसीटीवी की आंखों ने जो देखा, वह अब पुलिस की फाइलों में दर्ज है। अब देखना यह होगा कि आगरा पुलिस इस मामले में कितनी तेजी से चार्जशीट दाखिल करती है और पीड़ित को न्याय दिला पाती है।

पाठकों के लिए एक सवाल:

क्या आपको लगता है कि सीसीटीवी कैमरों की मौजूदगी के कारण अब रसूखदार लोग कानून की गिरफ्त से बच नहीं पाएंगे? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।