मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के भोपा थाना क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने रिश्तों की मर्यादा और मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। मोरना गांव में दो सगी बहनों ने अपने ही पिता की बेरहमी से हत्या कर दी। वजह सिर्फ इतनी थी कि पिता उन्हें मोबाइल चलाने, अच्छे कपड़े पहनने से टोकते थे और बड़ी बेटी की शादी नहीं कर रहे थे। इस खौफनाक साजिश को अंजाम देने के लिए बेटियों ने न केवल फिल्मी तरीका अपनाया, बल्कि पूरे परिवार को मौत की नींद सुलाने की भी कोशिश की।

​आधी रात को खूनी खेल: खीर में मिलाया जहर जैसा नशा

​सोमवार तड़के करीब तीन बजे जब पूरा गांव गहरी नींद में सोया था, तब किसान रामप्रसाद (55) के घर में मौत का तांडव रचा जा रहा था। पुलिस जांच में सामने आया कि रामप्रसाद की बड़ी बेटी कोमल (32) और उसकी छोटी बहन (कक्षा 11 की छात्रा) ने रविवार रात को ही इस हत्याकांड की भूमिका तैयार कर ली थी।

Screenshot 20260224 144504 Chrome
आरोपी बेटी

​दोनों बहनों ने रात के खाने में बनी खीर में नींद की गोलियां मिला दी थीं। इस खीर को खाने के बाद पिता रामप्रसाद, मां चंद्रकली और दोनों भाई अमित व सुमित बेसुध होकर सो गए। जब सब पूरी तरह अचेत हो गए, तब दोनों बहनों ने घर में रखे तेज तर्रार चाकुओं से अपने पिता पर हमला बोल दिया। गर्दन और पेट पर ताबड़तोड़ वार कर उन्होंने पिता को मौत के घाट उतार दिया।

​बदमाशों की झूठी कहानी और पुलिस का शक

​हत्या के बाद आरोपियों ने बड़ी चतुराई से मामले को मोड़ने की कोशिश की। सुबह करीब छह बजे शोर मचाया गया कि घर में बदमाशों ने घुसकर लूटपाट और हत्या की है। रामप्रसाद का शव मुख्य दरवाजे के पास बुग्गी के पीछे खून से लथपथ मिला।

​सूचना मिलते ही एसपी देहात आदित्य बंसल और सीओ भोपा देवव्रत वाजपेई फॉरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। हालांकि, बहनों की यह कहानी ज्यादा देर टिक नहीं सकी। पुलिस की पारखी नजरों ने घर की नाली में लाल रंग का पानी और नल पर खून के धब्बे देख लिए। बस यहीं से शक की सुई परिवार की ओर घूम गई। जब पुलिस ने मां और बच्चों को अलग-अलग ले जाकर पूछताछ की, तो बड़ी बेटी कोमल टूट गई और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

​32 साल की उम्र और शादी की हसरत: नफरत की असली वजह

​पूछताछ के दौरान आरोपी कोमल ने जो खुलासे किए, वे चौंकाने वाले थे। कोमल ने बताया कि उसकी उम्र 32 साल हो चुकी है, लेकिन उसके पिता उसकी शादी नहीं कर रहे थे। घर की दो अन्य बहनों, शिल्पी और लता की शादी हो चुकी थी, लेकिन कोमल को घर के कामों और खेती में उलझा कर रखा गया था।

​इसके अलावा, पिता रामप्रसाद पुराने ख्यालात के व्यक्ति थे। वे बेटियों के मोबाइल फोन इस्तेमाल करने, आधुनिक कपड़े पहनने और बाहर जाने पर सख्त पाबंदी लगाते थे। दोनों बहनें छिपकर मोबाइल पर रील देखती थीं, जिसे लेकर अक्सर घर में कलेश होता था। कोमल के मन में यह बात घर कर गई थी कि उसके पिता उसके और भाइयों के बीच भेदभाव करते हैं। यही नफरत इस कदर बढ़ी कि उसने अपने पिता के खून से हाथ रंग लिए।

​सबूत मिटाने की कोशिश और भाई पर भी था खतरा

​पुलिस को जांच में पता चला कि आरोपियों ने हत्या के बाद खून से सने कपड़े बदल लिए थे और उन्हें एक पोटली में बांधकर भूसे वाले कमरे में छिपा दिया था। चाकुओं को भी दूसरे कमरे में ठिकाने लगा दिया गया था। पूछताछ में यह भी सनसनीखेज बात सामने आई कि उनके निशाने पर बड़ा भाई अमित भी था। अगर वह उस वक्त जाग जाता या सामने आता, तो बहनें उस पर भी हमला करने से नहीं चूकतीं। फिलहाल, कोमल को जेल भेज दिया गया है और उसकी नाबालिग बहन को नोएडा के राजकीय बालगृह भेजा गया है।

​क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

​इस दिल दहला देने वाली घटना पर मनोचिकित्सकों का मानना है कि यह लंबे समय से दबे हुए गुस्से और ‘इमोशनल अब्यूज’ (भावनात्मक शोषण) का नतीजा हो सकता है। जब किसी व्यक्ति को लगता है कि उसकी आजादी छीनी जा रही है और उसकी बुनियादी इच्छाओं (जैसे शादी या सामाजिक जीवन) को दबाया जा रहा है, तो वह अवसाद या गंभीर मानसिक विकार का शिकार हो सकता है। ऐसे में व्यक्ति सही-गलत का अंतर भूलकर हिंसक कदम उठा लेता है।

​निष्कर्ष

​मुजफ्फरनगर की यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है। यह न केवल गिरते पारिवारिक मूल्यों को दर्शाती है, बल्कि पीढ़ीगत अंतराल (Generation Gap) और संवाद की कमी के खतरों को भी उजागर करती है। 32 बीघा जमीन और भरे-पूरे परिवार के बावजूद, एक घर नफरत की आग में जलकर राख हो गया।

पाठकों से सवाल: क्या आपको लगता है कि माता-पिता की अत्यधिक पाबंदियां बच्चों को अपराधी बनाने की ओर धकेल सकती हैं? या फिर यह आधुनिक जीवनशैली और सोशल मीडिया का दुष्प्रभाव है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।