
पार्षदों ने उठाई सड़क निर्माण कार्य में गड़बड़ी की मांग, जलकल विभाग के बढ़े हुए बिलों पर भी तीखी बहस
आगरा, शनिवार को आगरा नगर निगम सदन की बैठक में पार्षदों ने सड़क निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं को लेकर जमकर हंगामा किया। यह मामला इतना गरमा गया कि महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह को तुरंत उच्च स्तरीय जांच के निर्देश देने पड़े। भारी विरोध और शोर-शराबे के बीच, आखिरकार सदन ने वर्ष 2025-26 के पुनरीक्षित बजट को भी पारित कर दिया।
सड़क निर्माण में दोहरा काम: ‘कागजी’ काम पर उठे सवाल
बैठक के दौरान, पार्षद रवि और पार्षद प्रवीना राजावत ने मीडिया में प्रकाशित एक खबर का हवाला देते हुए सड़क निर्माण में हुए कथित घोटाले पर तीखी आपत्ति जताई। मामला 15वें वित्त आयोग के फंड से हेमा पेट्रोल पंप से पश्चिमपुरी चौराहे तक हुए सड़क चौड़ीकरण, डामरीकरण और इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछाने के कार्य से जुड़ा था।

पार्षदों ने सवाल उठाया कि इस सड़क पर वर्ष 2023-24 में कार्य पूरा होना कागजों में दिखाया गया है, जबकि इंटलॉकिंग का कार्य अभी चार माह पहले ही शुरू हुआ है। उनका आरोप था कि एक ही काम को दो बार दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस पूरे प्रकरण की जांच नहीं हुई, तो वे नगर निगम परिसर में धरना-प्रदर्शन करेंगे।मामले की गंभीरता को देखते हुए, सदन की अध्यक्ष, महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह ने तत्काल नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल को सात दिनों के भीतर रिपोर्ट पेश करने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने का निर्देश दिया। इस निर्देश के बाद ही हंगामा शांत हो सका।
जलकल की ‘गलती’ का खामियाजा क्यों भुगते जनता? बढ़े हुए पानी के बिल पर विरोध
सदन में दूसरा प्रमुख मुद्दा जलकल विभाग द्वारा अचानक बढ़ाए गए पानी के बिलों का था। पार्षदों ने कड़े शब्दों में कहा कि जिन उपभोक्ताओं का बकाया शून्य था और जो समय पर बिल भरते थे, जलकल विभाग की लापरवाही से उनका बिल लाखों रुपये हो गया है।दरअसल, यह समस्या जलकल विभाग द्वारा 2014 में नगर निगम द्वारा बढ़ाए गए वार्षिक मूल्यांकन को समय पर लागू न करने के कारण पैदा हुई। विभाग ने अब 2024 में इसे लागू करके उपभोक्ताओं के पुराने बिलों का बकाया जोड़ दिया है। पार्षदों ने इस ‘गलती’ का खामियाजा आम जनता पर थोपे जाने का पुरजोर विरोध किया और मांग की कि बढ़ी हुई मूल्यांकन दरें अप्रैल 2026 से लागू की जाएं।
2007 करोड़ रुपये का पुनरीक्षित बजट पारित
हंगामे के बीच, सदन ने आखिरकार वित्तीय वर्ष 2025-26 के पुनरीक्षित बजट को मंजूरी दे दी।
नगर निगम का बजट: मूल आय का अनुमान 1597.81 करोड़ रुपये से घटाकर 1590.45 करोड़ रुपये कर दिया गया, जबकि व्यय का अनुमान 1320.77 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1427.27 करोड़ रुपये कर दिया गया। प्रारंभिक अवशेष को जोड़कर, नगर निगम का कुल बजट 2007.21 करोड़ रुपये हो गया, जिसमें 579.94 करोड़ रुपये की बचत का अनुमान है।
जलकल विभाग का बजट: आय का अनुमान 152.23 करोड़ से 152.55 करोड़ और व्यय का अनुमान 137.85 करोड़ से 138.85 करोड़ रुपये पुनरीक्षित किया गया।
अन्य महत्वपूर्ण निर्णय और चर्चाएँ
पानी के बिल में छूट: एकमुश्त योजना के तहत पानी के बिल के ब्याज पर छूट का प्रस्ताव पास किया गया, जो 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा।
आवारा पशु नियंत्रण: पार्षद रवि बिहारी माथुर ने कुत्तों और बंदरों के बंध्याकरण के लिए बजट बढ़ाने के बावजूद इनकी बढ़ती संख्या पर तंज कसा। अधिकारियों ने जल्द ही शेल्टर होम बनाए जाने का प्रस्ताव देने का आश्वासन दिया।
अन्य मुद्दे: सदन में पार्किंग, होर्डिंग और हाउस टैक्स जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तृत चर्चा की गई।




