
मुंबई: 65 साल के शानदार करियर पर लगा विराम; ही-मैन के घर उमड़ा बॉलीवुड का जमावड़ा
मुंबई। भारतीय सिनेमा के ‘ही-मैन’ के नाम से मशहूर दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का आज, 89 वर्ष की आयु में, मुंबई स्थित आवास पर निधन हो गया। उनके जाने की खबर से बॉलीवुड जगत स्तब्ध है और देश-दुनिया में उनके करोड़ों प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके घर पर परिजनों और बॉलीवुड हस्तियों का जमावड़ा इस बात का दुखद संकेत है कि सिनेमा का एक सुनहरा अध्याय समाप्त हो चुका है।
जानकारी के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से धर्मेंद्र सांस लेने में तकलीफ के कारण अस्पताल में भर्ती थे। कुछ दिन पहले ही उन्हें घर लाया गया था, जहां मेडिकल सेटअप के साथ उनका इलाज चल रहा था। आज दोपहर उनकी तबीयत अचानक ज़्यादा बिगड़ने की सूचना मिली थी, जिसके बाद उनके आवास पर सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।
धर्मेंद्र: ही-मैन से लीजेंड तक—छह दशक का अविस्मरणीय फ़िल्मी सफ़र
धर्मेंद्र केवल एक सुपरस्टार नहीं थे, बल्कि भारतीय सिनेमा के वो मजबूत स्तंभ थे, जिस पर कई पीढ़ियों ने अपनी फ़िल्मी समझ की नींव रखी। उनके जैसा लंबा, सफल और बहुआयामी करियर बहुत कम कलाकारों को नसीब होता है।
संघर्ष से सुपरस्टारडम तक: एक प्रेरणादायक यात्रा
पंजाब के संगरूर से मायानगरी मुंबई पहुंचे धर्मेंद्र की यात्रा किसी फ़िल्मी कहानी से कम नहीं है। 1958 में फिल्मफेयर टैलेंट हंट जीतने के बाद उन्होंने फ़िल्म उद्योग का ध्यान खींचा।
रोमांटिक हीरो का उदय (1961-1966): 1961 में ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ से मुख्य अभिनेता के रूप में शुरुआत की। उनकी मासूमियत और नैचुरल अभिनय ने उन्हें ‘अनपढ़’, ‘बिंदिया चमकेगी’, और ‘चित्रलेखा’ जैसी फ़िल्मों के साथ एक चहेते रोमांटिक हीरो के रूप में स्थापित कर दिया।
एक्शन स्टार का जन्म (1966-1975): धर्मेंद्र ने जल्द ही खुद को रोमांस तक सीमित नहीं रखा। 1966 में ‘फूल और पत्थर’ ने उन्हें सुपरस्टार बनाया। 1975 में आई ‘शोले’ में निभाया गया ‘वीरू’ का किरदार आज भी पॉपुलर कल्चर का हिस्सा है। वह बॉलीवुड के पहले ऐसे अभिनेता थे जिन्हें एक्शन, रोमांस और कॉमेडी तीनों शैलियों में महारत हासिल थी।
स्वर्णिम युग: ‘शोले’ के बाद (1970-1985): यह दौर उनकी लोकप्रियता का शिखर था। ‘धरम वीर’, ‘प्रतिज्ञा’, ‘राजा जानी’ जैसी सुपरहिट फ़िल्मों ने उन्हें उस समय का सबसे अधिक पसंद किया जाने वाला नायक बना दिया। उनकी जोड़ी हेमा मालिनी, मीना कुमारी, और आशा पारेख के साथ खूब सराही गई।
नए दौर में भी कायम रहा जादू
उम्र बढ़ने के साथ-साथ धर्मेंद्र ने खुद को कैरेक्टर रोल्स में ढाला। 2005 के बाद भी उनकी सक्रियता बनी रही और उन्होंने ‘जॉनी गद्दार’, ‘यमला पगला दीवाना’ सीरीज़ और हाल ही में ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ (2023) में दिल छू लेने वाला अभिनय किया। उनकी पर्दे पर उपस्थिति आज भी दर्शकों को उतना ही प्रभावित करती है।
धर्मेंद्र की वो खासियतें, जो उन्हें लीजेंड बनाती हैं
धर्मेंद्र की सबसे बड़ी विशेषता थी उनकी सादगी और विनम्रता। सुपरस्टारडम की ऊँचाइयों पर पहुँचने के बावजूद वे हमेशा ज़मीन से जुड़े रहे। उनका बहुआयामी अभिनय, सहज संवाद अदायगी और आकर्षक व्यक्तित्व उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे प्यारे और प्रभावशाली सितारों में से एक बनाता है।
65 साल के लम्बे फ़िल्मी सफ़र के लिए उन्हें ‘फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से भी नवाज़ा गया। प्रशंसकों की ओर से उन्हें ‘पद्म भूषण’ दिए जाने की मांग भी लगातार उठती रही है।
धर्मेंद्र हमेशा भारतीय सिनेमा के ‘लिविंग लीजेंड’ रहेंगे।




