
साइबर सेल आगरा के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में छात्रों को मिली डेटा सुरक्षा और डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव की महत्वपूर्ण जानकारी
आगरा, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश शासन के मिशन शक्ति 5.0 विशेष अभियान के अंतर्गत, आगरा कॉलेज, आगरा और साइबर सेल, पुलिस कमिश्नरेट, आगरा के संयुक्त तत्वावधान में एक अत्यंत महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन किया गया। यह सेमिनार “साइबर सुरक्षा, डिजिटल अरेस्ट एवं डिजिटल फ्रॉड” जैसे ज्वलंत विषयों पर केंद्रित था, जिसका उद्देश्य छात्रों और आम जनता को तेजी से बढ़ते डिजिटल खतरों के प्रति जागरूक करना था।कॉलेज के ऑडिटोरियम हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में साइबर विशेषज्ञों ने सरल और प्रभावशाली ढंग से बताया कि कैसे उपयोगकर्ता की छोटी-सी गलती भी बड़े वित्तीय नुकसान का कारण बन सकती है।
डेटा सुरक्षा: लालच से बचें और अनजान लिंक से दूर रहें
साइबर सेल, पुलिस कमिश्नरेट, आगरा से आए विशेषज्ञ श्री शांतनु अग्रवाल ने उपस्थित लोगों को डेटा के महत्व और इसके दुरुपयोग के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में हमारा व्यक्तिगत डेटा ही सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति है, जो अक्सर विभिन्न माध्यमों से लीक होकर साइबर अपराधियों के हाथ लग जाता है।
श्री अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि अधिकांश साइबर अपराधों का मुख्य कारण उपयोगकर्ताओं का ‘लालच’ होता है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी अनजान लिंक, वेबसाइट्स, आकर्षक कॉल्स या ऐप्स पर क्लिक करने से बचें। सुरक्षा का पहला नियम है कि किसी भी अनजान संदेश, चित्र या वीडियो को एक्सेस न करें।
डिजिटल फ्रॉड: ‘स्वर्णिम समय’ में कार्रवाई है सबसे ज़रूरी
वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में क्या करें, इस पर प्रकाश डालते हुए शांतनु अग्रवाल ने बताया कि डिजिटल फ्रॉड की सूचना तुरंत 1930 पर कॉल करके दें या फिर सरकारी पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि साइबर अपराध घटित होने के बाद का पहला घंटा “स्वर्णिम समय” कहलाता है, क्योंकि इसी अवधि में धोखाधड़ी से गई रकम को वापस मिलने की संभावना सबसे अधिक होती है।
‘डिजिटल अरेस्ट’ एक बड़ा फ्रॉड: भारतीय कानून में कोई प्रावधान नहीं
दूसरे साइबर विशेषज्ञ श्री भगवान सिंह ने एक उभरते हुए नए फ्रॉड “डिजिटल अरेस्ट” पर विस्तार से बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के किसी भी कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का कोई प्रावधान नहीं है। पुलिस या कोई भी प्रशासनिक निकाय किसी व्यक्ति को डिजिटल रूप से गिरफ्तार नहीं कर सकता। यह केवल साइबर ठगी का एक नया तरीका है, जिससे लोगों को डर दिखाकर पैसे ऐंठे जाते हैं।
श्री सिंह ने छात्रों को आर्थिक फ्रॉड और सामाजिक फ्रॉड से बचाव के लिए जागरूकता को सबसे बड़ा हथियार बताया। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अपने व्हाट्सएप में टू-स्टेप वेरीफिकेशन को अवश्य सक्रिय करें। साथ ही, उन्होंने haveibeenpwned.com, eScan Cybersecurity, संचार साथी और virustotal.com जैसी सुरक्षित साइट्स और ऐप्स का इस्तेमाल करने की सलाह दी।
साइबर फ्रॉड के बढ़ते आंकड़े चिंताजनक
विशेषज्ञों ने सेमिनार में चौंकाने वाले आंकड़े भी पेश किए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 तक देश में लगभग ₹6000 करोड़ के साइबर फ्रॉड दर्ज किए गए थे, जो 2025 तक बढ़कर ₹22000 करोड़ तक पहुंच गए हैं। अनुमान है कि 2030 तक यह आंकड़ा ₹30000 करोड़ से अधिक हो सकता है, जो साइबर सुरक्षा पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता को दर्शाता है।
ज्ञान को वरिष्ठ नागरिकों तक पहुंचाएं
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रोफेसर पूनम चांद ने विशेषज्ञों की जानकारियों को अत्यंत उपयोगी बताया और उन्हें दैनिक जीवन में अपनाने पर बल दिया। सेमिनार का सफल संचालन आर्मी गर्ल्स विंग की कंपनी कमांडर कैप्टन रीता निगम द्वारा किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि आज प्राप्त ज्ञान को केवल स्वयं तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने परिजनों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों के साथ साझा करें, ताकि समाज में साइबर अपराधों के प्रति व्यापक जागरूकता फैल सके।
इस महत्वपूर्ण सेमिनार में एनसीसी कैडेट्स, विधि विभाग तथा अन्य संकायों के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और साइबर खतरों से बचाव के गुर सीखकर लाभान्वित हुए।




