उत्तर प्रदेश के ताजनगरी आगरा से वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बेहद सराहनीय और राहत भरी खबर सामने आई है। आगरा के तेहरा सैया स्थित सहकारी समिति के एक सरकारी गोदाम में उस समय हड़कंप मच गया, जब वहां काम करने वाले कर्मचारियों ने सीढ़ियों के नीचे रेंगते हुए सांपों को देखा। लेकिन कर्मचारियों ने घबराने या सांपों को कोई नुकसान पहुंचाने के बजाय सूझबूझ दिखाई, जिसके कारण एक बड़ा और सफल रेस्क्यू ऑपरेशन संभव हो सका।

​उत्तर प्रदेश वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस (Wildlife SOS) की रैपिड रिस्पांस यूनिट ने एक त्वरित संयुक्त अभियान चलाकर गोदाम से एक या दो नहीं, बल्कि पूरे तीन कॉमन सैंड बोआ सांपों (Common Sand Boa – Eryx conicus) को सुरक्षित बाहर निकाला।

​गोदाम में अचानक दिखे सांप, कर्मचारियों ने दिखाई सूझबूझ

​वाकया उस समय का है जब तेहरा सैया स्थित सरकारी गोदाम में रोजाना की तरह कामकाज चल रहा था। इसी दौरान कुछ कर्मचारियों की नजर भंडारण सुविधा की सीढ़ियों के नीचे पड़ी, जहाँ दो सांप सुस्ता रहे थे। व्यस्त परिसर में सांपों के दिखने से कुछ देर के लिए वहां तनाव का माहौल बन गया।

​हालांकि, कर्मचारियों ने पारंपरिक रूप से सांपों को लाठी-डंडों से मारने के बजाय तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी। वन विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बिना समय गंवाए वाइल्डलाइफ एसओएस की आगरा 24-घंटे चालू रहने वाली हेल्पलाइन (+91 9917109666) पर संपर्क किया और विशेषज्ञों की मदद मांगी।

​दो सांपों की थी सूचना, रेस्क्यू टीम ने ढूंढ निकाला तीसरा

​सूचना मिलते ही वाइल्डलाइफ एसओएस की रैपिड रिस्पांस यूनिट आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों के साथ मौके पर पहुंच गई। टीम ने सबसे पहले गोदाम के कर्मचारियों को शांत किया और सीढ़ियों के नीचे के संकरे क्षेत्र का बारीकी से निरीक्षण शुरू किया।

​कर्मचारियों ने शुरुआत में केवल दो सांपों को ही देखा था। लेकिन जब वन्यजीव विशेषज्ञों ने मलबे और अंधेरी जगहों की जांच की, तो वे यह देखकर हैरान रह गए कि वहां दो नहीं, बल्कि तीन कॉमन सैंड बोआ सांप एक साथ छिपे हुए थे। टीम ने बेहद सावधानी और पेशेवर तरीके से तीनों सांपों को बिना किसी चोट के रेस्क्यू कर लिया। सांपों को पहले वाइल्डलाइफ एसओएस ट्रांजिट फैसिलिटी में डॉक्टर की निगरानी में रखा गया, और पूरी तरह स्वस्थ पाए जाने के बाद उन्हें उनके प्राकृतिक आवास (जंगल) में सुरक्षित छोड़ दिया गया।

​भीषण गर्मी में आखिर क्यों रिहायशी और कमर्शियल इलाकों का रुख कर रहे हैं सांप?

​इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर ये सांप जंगलों को छोड़कर सरकारी गोदामों या इंसानी बस्तियों में क्यों आ रहे हैं? वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, आगरा में सांप का रेस्क्यू होना इस बात का संकेत है कि गर्मी के महीनों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है।

​कॉमन सैंड बोआ एक ऐसी प्रजाति है जो आमतौर पर शांत, अंधेरे और रेतीले या ढीले बिलों में रहना पसंद करती है। लेकिन जब गर्मियों में बाहर का तापमान असहनीय हो जाता है, तो ये सरीसृप अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित (Thermoregulation) करने के लिए ठंडी और पक्की सतहों की तलाश करते हैं। ऐसे में अनाज के बड़े भंडारण स्थल, ठंडे सरकारी गोदाम और कृषि क्षेत्र इनके लिए छिपने के सबसे मुफीद ठिकाने बन जाते हैं।

​किसानों और गोदाम मालिकों के पक्के ‘मित्र’ हैं कॉमन सैंड बोआ

​आम तौर पर लोग सांपों को देखते ही डर जाते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि कॉमन सैंड बोआ सांप इंसानों के लिए पूरी तरह से हानिरहित होते हैं। यह एक गैर-विषैली (Non-venomous) प्रजाति है, जिसके काटने से इंसान की जान को कोई खतरा नहीं होता।

​वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने इस रेस्क्यू पर बात करते हुए कहा:

​”कॉमन सैंड बोआ सांप जहरीले नहीं होते और पूरी तरह से शांत स्वभाव के होते हैं। ये पर्यावरण में चूहों की आबादी को नियंत्रित करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो ये किसानों और गोदाम के कर्मचारियों के बेहतरीन दोस्त हैं, क्योंकि ये अनाज को बर्बाद करने वाले चूहों का सफाया करते हैं। हम गोदाम के कर्मचारियों के इस जिम्मेदार रवैये की सराहना करते हैं जिन्होंने वन्यजीवों को नुकसान नहीं पहुँचाया।”

​बदल रही है इंसानी सोच: वन्यजीव संरक्षण के प्रति बढ़ी जागरूकता

​इस सफल रेस्क्यू ने यह साबित कर दिया है कि अगर लोगों को सही जानकारी हो, तो इंसानों और वन्यजीवों के बीच का टकराव (Human-Wildlife Conflict) काफी हद तक कम हो सकता है।

​वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव, गीता शेषमणि ने बताया:

​”ये सांप केवल चूहों के शिकार या ठंडे आश्रय की तलाश में गोदाम में आए थे। इनसे किसी को कोई खतरा नहीं था। आज के समय में गैर-विषैले सांपों के प्रति लोगों में बढ़ती जागरूकता को देखना बेहद उत्साहजनक है। यह बदलाव भविष्य में इंसानों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मील का पत्थर साबित होगा।”

​वहीं, संस्था के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एम.वी. ने वन विभाग और अपनी टीम के बीच के बेहतरीन तालमेल की तारीफ की। उन्होंने कहा कि समय पर मिली सूचना और त्वरित एक्शन के कारण ही इन बेजुबान जानवरों को सही सलामत उनके प्राकृतिक घर में वापस भेजा जा सका है।