
बढ़ते प्रदूषण और आसमान छूती पेट्रोल-डीजल की कीमतों के बीच देश में हरित ऊर्जा (Green Energy) और पर्यावरण अनुकूल विकल्पों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस दिशा में बड़े-बड़े स्टार्टअप्स और कंपनियां तो काम कर ही रही हैं, लेकिन असली बदलाव तब दिखने लगता है जब देश के युवा अपने छोटे-छोटे प्रयोगों से बड़े समाधान खोजने लगते हैं। ऐसा ही एक कमाल का नवाचार उत्तर प्रदेश के आगरा से सामने आया है, जहां दो होनहार छात्रों ने महज 10 दिनों के भीतर एक ऐसी साइकिल तैयार कर दी है, जो न तो पेट्रोल मांगती है और ना ही घर की बिजली। यह पूरी तरह से सूर्य की रोशनी यानी सौर ऊर्जा से चलती है।
आगरा यूनिवर्सिटी के छात्रों का बड़ा धमाका
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद परिसर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) के छात्रों ने तकनीकी दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के चौथे वर्ष के छात्र अभिषेक सविता और विशाल ने अपनी सूझबूझ और कड़ी मेहनत से एक अनूठी सोलर ई-साइकिल (Solar E-Cycle) का निर्माण किया है।
आमतौर पर किसी भी नए ऑटोमोबाइल मॉडल या तकनीकी प्रोटोटाइप को बनाने में महीनों का समय और लंबा चौड़ा बजट लग जाता है। लेकिन इन छात्रों ने सीमित संसाधनों के बीच केवल 10 दिन की अल्पावधि में इस प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारकर सबको हैरान कर दिया है। कॉलेज के फैकल्टी मेंबर्स से लेकर सहपाठियों तक, हर कोई इस सफलता पर गर्व महसूस कर रहा है।
मात्र 20 हजार की लागत और खूबियां अनेक
इस सोलर ई-साइकिल की सबसे बड़ी खासियत इसकी निर्माण लागत और इसकी कार्यक्षमता है। अभिषेक और विशाल ने बताया कि इस पूरे मॉडल को तैयार करने में महज 20 हजार रुपये का खर्च आया है। आज के समय में जहां एक सामान्य इलेक्ट्रिक साइकिल की कीमत बाजार में 35 हजार से शुरू होकर लाखों तक जाती है, वहीं इतनी कम लागत में सोलर तकनीक से लैस साइकिल बनाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
इस ई-साइकिल के तकनीकी पहलुओं की बात करें तो इसमें एक उन्नत सोलर पैनल और बैटरी सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। साइकिल की कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- डबल चार्जिंग सिस्टम: यह साइकिल धूप में खड़े रहने पर अपने आप चार्ज होने लगती है। इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति साइकिल चला रहा है और पैडल मारता है, तो पैडल मारने की गतिज ऊर्जा से भी इसकी बैटरी लगातार चार्ज होती रहती है।
- शानदार माइलेज: एक बार पूरी तरह चार्ज होने के बाद यह सोलर ई-साइकिल करीब 30 किलोमीटर तक का सफर आसानी से तय कर सकती है। स्थानीय आवागमन और छात्रों या कामकाजी लोगों के लिए यह बेहद किफायती विकल्प है।
- मौसम से सुरक्षा: छात्रों ने व्यावहारिक उपयोग को ध्यान में रखते हुए साइकिल के ऊपर एक विशेष शेड (छत) भी लगाया है। यह शेड न केवल सोलर पैनल को सही कोण पर टिकाए रखता है, बल्कि साइकिल चालक को तेज धूप और अचानक होने वाली बारिश से भी बचाता है।
पीएम मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन से मिली प्रेरणा
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के रहने वाले छात्र अभिषेक सविता ने इस नवाचार के पीछे की प्रेरणा को साझा किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ (Viksit Bharat 2047) के संकल्प और देश को आत्मनिर्भर बनाने के विजन ने उन्हें कुछ अलग करने के लिए प्रेरित किया।
ईंधन की लगातार हो रही खपत को कम करने और देश को कार्बन-मुक्त परिवहन की ओर ले जाने के उद्देश्य से दोनों छात्रों ने पूरी तरह से ‘मेड-इन-इंडिया’ (Made-in-India) सामग्रियों का चयन किया। इस साइकिल में इस्तेमाल होने वाला हर एक पुर्जा और तकनीक स्वदेशी है, जो यह साबित करती है कि भारतीय युवाओं में देश के भीतर ही बड़े बदलाव लाने की पूरी क्षमता है।
क्षमता को और बढ़ाने की हैं अपार संभावनाएं
यह तो महज एक शुरुआत या कहें कि एक सफल प्रोटोटाइप है। छात्रों का मानना है कि इस मॉडल को व्यावसायिक स्तर पर और अधिक उन्नत बनाया जा सकता है। यदि भविष्य में इसमें और अधिक शक्तिशाली व हल्की लिथियम-आयन बैटरी और उच्च दक्षता वाले आधुनिक सोलर पैनल्स का उपयोग किया जाए, तो इसकी रेंज और रफ्तार दोनों को दोगुना किया जा सकता है।
कम आय वर्ग के लोगों, रेहड़ी-पटरी वालों और स्थानीय स्तर पर कूरियर या डिलीवरी का काम करने वालों के लिए यह तकनीक एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है, जिससे उनका दैनिक यात्रा खर्च लगभग शून्य हो जाएगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने थपथपाई पीठ, मिला भरपूर प्रोत्साहन
छात्रों की इस शानदार उपलब्धि पर डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी ने दोनों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और हरित ऊर्जा की दिशा में हमारे युवाओं की यह एक बेहद प्रेरक और अनुकरणीय पहल है। ऐसे ही छोटे-छोटे प्रयास भविष्य में बड़े औद्योगिक और सामाजिक बदलावों का आधार बनते हैं।
आईईटी के निदेशक प्रो. मनु प्रताप, वरिष्ठ शिक्षक महेश दीक्षित और राघवेंद्र सहित पूरे संस्थान ने अभिषेक और विशाल को बधाई दी और भविष्य में उनके इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव तकनीकी और प्रशासनिक मदद देने का भरोसा दिलाया है।



