आगरा। ताजनगरी के ग्रामीण इलाकों में मानवता को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। आगरा के थाना बसई जगनेर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव सोनी खेड़ा में महज एक तरबूज तोड़ने के विवाद ने एक मासूम की जान ले ली। 13 वर्षीय बालक अमृत का खून से लथपथ शव खेत में मिलने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। इस घटना ने न केवल एक परिवार का चिराग बुझा दिया है, बल्कि समाज की संवेदनशीलता पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।

​लापता होने के बाद खेत में मिला लहूलुहान शव

​सोनी खेड़ा निवासी नरेश कुशवाह का 13 वर्षीय पुत्र अमृत शनिवार दोपहर को घर से खेतों की ओर खेलने और घूमने निकला था। शाम करीब 5 बजे तक जब वह घर नहीं लौटा, तो परिजनों की चिंता बढ़ने लगी। मां-बाप ने गांव और आसपास के खेतों में उसकी तलाश शुरू की। इसी बीच अमृत की बहन उसे ढूंढते हुए खेत की तरफ गई, जहां का मंजर देख उसकी चीख निकल गई।

​सामने अमृत का शव जमीन पर पड़ा था। उसके सिर पर किसी भारी वस्तु से प्रहार किया गया था और चेहरा पूरी तरह खून से लथपथ था। घटनास्थल पर ही एक थैली में कुछ तरबूज और एक चाकू भी पड़ा मिला, जो इस बात की ओर इशारा कर रहा था कि विवाद की जड़ क्या थी।

​”तरबूज के लिए ले ली मेरे बेटे की जान” – परिजनों का करुण क्रंदन

​मृतक के पिता नरेश कुशवाह का आरोप है कि खेत को बंटाई पर लेकर खेती करने वाले दबंगों ने उनके बेटे को तरबूज तोड़ते देख लिया था। आरोप है कि इसी मामूली बात पर विवाद इतना बढ़ा कि आरोपियों ने बेरहमी से अमृत की हत्या कर दी। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों की भारी भीड़ मौके पर जमा हो गई। गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस को शव उठाने से रोक दिया और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया।

​ग्रामीणों का आक्रोश इस कदर था कि स्थिति को संभालने के लिए कई थानों की पुलिस फोर्स को मौके पर बुलाना पड़ा। गांव में व्याप्त तनाव को देखते हुए पीएसी की तैनाती की भी चर्चा रही।

​पुलिस प्रशासन की कार्रवाई और भारी सुरक्षा बल तैनात

​घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए डीसीपी वेस्ट आदित्य कुमार और एसीपी रामनाथ सिकरवार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घंटों तक परिजनों को समझाने का प्रयास किया। रात करीब 8:30 बजे तक परिजन खेत में ही शव के पास डटे रहे। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई के आश्वासन के बाद ही परिजन शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने पर राजी हुए।

​डीसीपी वेस्ट आदित्य कुमार ने मीडिया से बात करते हुए बताया, “प्रारंभिक जांच में मामला आपसी विवाद और हत्या का प्रतीत हो रहा है। हमने कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए हैं और जल्द ही हत्या की गुत्थी सुलझा ली जाएगी।”

​सोनी खेड़ा गांव में मातम और तनाव का माहौल

​अमृत की मौत के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अमृत एक मिलनसार बच्चा था। महज एक फल के लिए किसी की जान ले लेना स्थानीय लोगों के गले नहीं उतर रहा है। पुलिस ने गांव में एहतियातन गश्त बढ़ा दी है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। फिलहाल गांव में सन्नाटा पसरा है, लेकिन अंदर ही अंदर आक्रोश की लहर भी है।

​निष्कर्ष (Conclusion)

यह घटना बताती है कि किस तरह छोटी-छोटी बातें अब हिंसक रूप लेती जा रही हैं। एक 13 साल का बच्चा, जिसका पूरा भविष्य उसके सामने था, वह चंद रुपयों के तरबूज की बलि चढ़ गया। पुलिस की तफ्तीश जारी है और उम्मीद है कि कानून मासूम अमृत के परिवार को न्याय दिलाएगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या हम एक ऐसे समाज की ओर बढ़ रहे हैं जहाँ मानवीय संवेदनाओं का कोई मूल्य नहीं रह गया है?

पाठकों के लिए प्रश्न:

क्या आपको लगता है कि समाज में बढ़ती असहिष्णुता और छोटी-छोटी बातों पर हिंसा के पीछे सामाजिक जागरूकता की कमी है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।