
उत्तर प्रदेश के ताजनगरी आगरा से आर्थिक अपराध जगत की एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है, जिसने टैक्स विभागों और जांच एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। आगरा में लोहामंडी थाना पुलिस, साइबर सेल और काउंटर इंटेलिजेंस की संयुक्त टीम ने एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो बिना किसी वास्तविक माल की सप्लाई के सिर्फ कागजों पर करोड़ों रुपये का टर्नओवर दिखा रहा था।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट ने अब तक करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी जीएसटी बिलिंग (Fake GST Billing) को अंजाम देकर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाया है। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए गिरोह के तीन मुख्य किरदारों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
डिजिटल दस्तावेजों के दम पर कागजों में खड़ा किया ‘सपनों का महल’
यह पूरा खेल ‘न माल, न सप्लाई’ के सिद्धांत पर चल रहा था। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान अमन डंग, सौरभ सिंह और 68 वर्षीय राम अवतार शर्मा के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का काम करने का तरीका बेहद शातिर और तकनीकी रूप से संगठित था।
यह गिरोह सबसे पहले फर्जी और कूटरचित (Forged) दस्तावेजों जैसे नकली पैन कार्ड, रेंट एग्रीमेंट और अन्य सरकारी पहचान पत्रों का इस्तेमाल करता था। इन जाली कागजातों के आधार पर फर्जी या बोगस फर्में (Bogus Firms) रजिस्टर्ड कराई जाती थीं। एक बार जब कंपनी कागजों पर रजिस्टर हो जाती, तो असली खेल शुरू होता था। आरोपी धड़ल्ले से फर्जी इनवॉइस और नकली ई-वे बिल (E-Way Bills) जारी करते थे। इसका एकमात्र मकसद दूसरे बड़े कारोबारियों को अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ पहुंचाना था।
68 साल का बुजुर्ग निकला फर्जी कंपनियों को खड़ा करने का ‘विद्वान’
इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों को सबसे ज्यादा हैरान राम अवतार शर्मा की उम्र और उसकी भूमिका ने किया है। 68 साल की उम्र में जहां लोग सेवानिवृत्त होकर शांत जीवन जीते हैं, वहीं राम अवतार इस गिरोह का सबसे मजबूत तकनीकी स्तंभ बना हुआ था।
पुलिस की पूछताछ और जांच में यह बात साफ हुई है कि राम अवतार फर्जी दस्तावेज तैयार करने और बोगस कंपनियों की स्थापना कराने में माहिर था। उसे इस कानूनी और डिजिटल लूपहोल्स की गहरी समझ थी कि कैसे किसी फर्जी पते पर बिना वेरिफिकेशन के कंपनी को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराया जाए। बाद में ये बोगस फर्में देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठे उन कारोबारियों को मोटी रकम में बेच दी जाती थीं, जो अपनी बैलेंस शीट को सुधारने और टैक्स बचाने के लिए फर्जी इनवॉइस की तलाश में रहते थे।
छापेमारी में बरामद हुआ डिजिटल डेटा और फर्जी कागजात
गिरफ्तारी के दौरान संयुक्त टीम ने आरोपियों के ठिकानों पर सघन छापेमारी की। पुलिस ने इनके पास से बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है, जिसमें:
- कई फर्जी आईडी, पैन कार्ड और रेंट एग्रीमेंट
- दर्जनों एक्टिव मोबाइल फोन और सिम कार्ड
- हाई-टेक लैपटॉप और डिजिटल स्टोरेज डिवाइस
- कई संदिग्ध बैंक खातों की पासबुक और चेकबुक
फिलहाल आगरा पुलिस की साइबर सेल इन सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच (Forensic Examination) कर रही है। पुलिस का मानना है कि लैपटॉप और डिलीट किए गए डिजिटल डेटा को रिकवर करने के बाद इस घोटाले का आंकड़ा 100 करोड़ से कहीं आगे जा सकता है।
यूपी से लेकर दिल्ली-एमपी तक फैले हैं गिरोह के तार
एसीपी लोहामंडी गौरव सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि यह कोई स्थानीय या छोटा-मोटा गिरोह नहीं है, बल्कि यह एक बेहद संगठित अंतरराज्यीय आर्थिक अपराध सिंडिकेट (Interstate Economic Offense Syndicate) है। शुरुआती जांच के जो सुराग मिले हैं, उनसे साफ है कि इस गिरोह का नेटवर्क केवल उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं था।
इस जालसाजी के तार देश की राजधानी दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से सीधे जुड़े हुए हैं। आगरा की यह फर्जी फर्में दूसरे राज्यों के व्यापारियों के साथ मिलकर करोड़ों रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट का हेरफेर कर रही थीं। जांच एजेंसियां अब उन सभी व्यापारियों और कंपनियों की लिस्ट तैयार कर रही हैं, जिन्होंने इन तीन आरोपियों की बोगस फर्मों से फर्जी बिल खरीदे और टैक्स चोरी की।
पुलिस का सख्त रुख: “पर्दे के पीछे छिपे मगरमच्छ भी नहीं बचेंगे”
आगरा पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस की टीमें अब इस रैकेट के वित्तीय लेनदेन (Financial Transactions) की गहराई से स्क्रूटनी कर रही हैं। आरोपियों के बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही जीएसटी विभाग के अधिकारियों से भी संपर्क साधा जा रहा है ताकि इस पूरी टैक्स चोरी के सटीक आंकड़े का आकलन किया जा सके।
एसीपी गौरव सिंह ने स्पष्ट लहजे में कहा है कि इस घोटाले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या विभाग के भीतर का कोई व्यक्ति या कोई पेशेवर सीए (Chartered Accountant) भी इस सिंडिकेट को पर्दे के पीछे से गाइड कर रहा था। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और चौंकाने वाले खुलासे और बड़ी गिरफ्तारियां होने की पूरी संभावना है।



