आगरा। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों की बहुप्रतीक्षित सीधी भर्ती परीक्षा का आगाज आज सोमवार को बेहद कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच हो गया। ताजनगरी आगरा के 28 परीक्षा केंद्रों पर पहले दिन की दोनों पालियों (शिफ्ट) की परीक्षा पूरी तरह से शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न करा ली गई है।

​सुबह की पहली पाली (10:00 बजे से 12:00 बजे) की सफलता के बाद, दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक आयोजित की गई दूसरी पाली में भी प्रशासन की चौकसी चरम पर रही। परीक्षा देकर बाहर निकले अभ्यर्थियों के चेहरों पर जहां एक ओर राहत की सांस दिखी, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक मुस्तैदी की हर तरफ सराहना हो रही है। इस परीक्षा में शामिल होने के लिए फिरोजाबाद, मैनपुरी, अलीगढ़, हाथरस, कासगंज, एटा और मथुरा सहित विभिन्न पड़ोसी जनपदों से हजारों की संख्या में अभ्यर्थी आगरा पहुंचे थे।

​चप्पे-चप्पे पर पहरा: तीन स्तरीय सुरक्षा घेरे में कैद रहे परीक्षा केंद्र

​आगरा शहर में बनाए गए सभी 28 परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए गए थे कि परिंदा भी पर न मार सके। पूरी परीक्षा को पारदर्शी बनाने के लिए केंद्रों को तीन स्तरीय सुरक्षा घेरे (Three-Layer Security Grid) से कवर किया गया था।

​मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर परीक्षा हॉल के भीतर तक की हर एक गतिविधि को सीसीटीवी कैमरों में कैद किया जा रहा था। केवल स्थानीय प्रशासन ही नहीं, बल्कि लखनऊ स्थित केंद्रीय कंट्रोल रूम से भी आगरा के सभी केंद्रों की लाइव मॉनिटरिंग की जा रही थी। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या तकनीकी चूक पर तत्काल एक्शन लेने के लिए उड़नदस्ते और स्टेटिक मजिस्ट्रेट लगातार राउंड पर रहे।

​ई-स्कैनिंग और बायोमेट्रिक का ‘अभेद्य कवच’, कर्मचारियों की भी हुई जांच

​उत्तर प्रदेश सरकार और भर्ती बोर्ड इस बार परीक्षा की शुचिता को लेकर जरा भी ढील देने के मूड में नहीं था। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को गहन चेकिंग, ई-स्कैनिंग और बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही एंट्री दी गई।

एक ऐतिहासिक कदम: इस बार परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह फूलप्रूफ बनाने के लिए न केवल अभ्यर्थियों का, बल्कि परीक्षा ड्यूटी में तैनात किए गए कक्ष निरीक्षकों और अन्य कर्मचारियों का भी बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य किया गया था।

​अभ्यर्थियों को सख्त हिदायत थी कि वे अपने साथ केवल आधिकारिक प्रवेश पत्र (Admit Card), एक वैध फोटो पहचान पत्र, और साधारण पेन-पेंसिल ही लेकर जाएं। मोबाइल, स्मार्टवॉच या किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स पर पूरी तरह प्रतिबंध लागू रहा।

​उच्चाधिकारियों ने संभाली कमान: मंडलायुक्त और जिलाधिकारी ने खुद किया औचक निरीक्षण

​परीक्षा के दौरान व्यवस्थाएं कितनी चाक-चौबंद हैं, इसका जमीनी हकीकत परखने के लिए आगरा के मंडलायुक्त नागेंद्र प्रताप और जिलाधिकारी मनीष बंसल सोमवार को खुद सड़कों और परीक्षा केंद्रों पर उतरे।

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​दोनों उच्चाधिकारियों ने संयुक्त रूप से शहर के कई संवेदनशील और प्रमुख परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने बायोमेट्रिक काउंटर, सीसीटीवी कंट्रोल रूम और अभ्यर्थियों के बैठने की व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। मंडलायुक्त ने ड्यूटी पर तैनात पुलिस बल और केंद्र व्यवस्थापकों को सख्त निर्देश दिए कि परीक्षा समाप्ति के बाद भी अभ्यर्थियों को सुरक्षित बाहर निकालने और भीड़ प्रबंधन में कोई कोताही न बरती जाए।

​ट्रैफिक प्लान रहा सुपरहिट: जाम से मुक्त रहीं आगरा की सड़कें

​आगरा जैसे बड़े शहर में जब एक साथ हजारों की संख्या में अभ्यर्थी बाहर निकलते हैं, तो ट्रैफिक जाम की स्थिति बनना आम बात है। लेकिन इस बार आगरा ट्रैफिक पुलिस की विशेष तैयारियों ने शहरवासियों और परीक्षार्थियों दोनों को बड़ी राहत दी।

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​परीक्षा शुरू होने और दोनों पालियों के समाप्त होने के समय सड़कों पर उमड़ने वाली संभावित भीड़ को देखते हुए पहले से ही रूट डायवर्जन प्लान लागू किया गया था। शहर के प्रमुख चौराहों जैसे—आगरा कॉलेज, हरीपर्वत, राजामंडी, वॉटर वर्क्स, भगवान टॉकीज, आईएसबीटी, सिकंदरा तिराहा और सुल्तानगंज पुलिया पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा। इसके चलते दोनों पालियों के बाद भी कहीं बड़ा जाम देखने को नहीं मिला और यातायात सुचारु रूप से चलता रहा।

​परीक्षार्थियों के सफर को आसान बनाने के लिए दौड़ीं अतिरिक्त बसें, स्टेशनों पर बने हेल्प डेस्क

​दूर-दराज के जिलों से आए परीक्षार्थियों को किसी भी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए परिवहन निगम (UPSRTC) ने भी कमर कश रखी थी। आगरा रूट पर लगभग सवा दो सौ (225) अतिरिक्त बसों का संचालन किया गया, ताकि परीक्षा खत्म होने के बाद अभ्यर्थी बिना किसी परेशानी के अपने घरों को लौट सकें।

​इसके साथ ही आगरा कैंट, राजा की मंडी और आगरा फोर्ट जैसे प्रमुख रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर विशेष हेल्प डेस्क स्थापित किए गए थे। इन हेल्प डेस्क के माध्यम से अनजान शहरों से आए युवाओं को उनके परीक्षा केंद्रों का सही रास्ता और परिवहन के साधनों की सटीक जानकारी दी गई।