आगरा। देश की राजनीति में गाय हमेशा से एक संवेदनशील और बड़ा मुद्दा रही है, लेकिन आज वही गोमाता अपनी पहचान और सम्मान के लिए पिंजरे में कैद सियासत की ओर देख रही है। यह तीखा दर्द किसी आम इंसान का नहीं, बल्कि सनातन धर्म के सर्वोच्च मार्गदर्शकों में से एक, ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद सरस्वती का है।

​ ताजनगरी आगरा के धाकरान चौराहे पर जब ‘गो रक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा’ पहुंची, तो माहौल पूरी तरह गोमय हो गया। पालकी पर सवार होकर नाई की मंडी स्थित श्री प्रेमनिधि मंदिर पहुंचे शंकराचार्य का स्वागत स्थानीय श्रद्धालुओं ने पलक-पावड़े बिछाकर और फूलों की बारिश के साथ किया। लेकिन इस भव्य स्वागत के बीच शंकराचार्य के शब्द बेहद गंभीर और व्यवस्था पर कड़े प्रहार करने वाले थे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “जो लोग गाय के नाम पर सत्ता की सीढ़ियां चढ़े, आज वही अपना वादा भूल चुके हैं।”

​’गोरखनाथ जी मानते थे माता, पर आज सरकार पर है दबाव’

​शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार को आड़े हाथों लिया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इतने दबाव में हैं कि वे गाय को माता कहते तो हैं, लेकिन उनके पीछे एक अनजाना डर झलकता है।

​उन्होंने याद दिलाया कि पूज्य गोरखनाथ जी महाराज गाय को सच्चे मन से माता मानते थे और उनकी सेवा को सर्वोपरि रखते थे। आज जब देश का हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदाय मिलकर गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग कर रहे हैं, तो सत्ता में बैठे लोग कह रहे हैं कि इसकी कोई जरूरत नहीं है। शंकराचार्य ने कहा कि जिस गोमाता के प्रति करोड़ों लोगों की अगाध श्रद्धा है, उसे तो सरकार को गर्व से राष्ट्रमाता घोषित करना चाहिए था।

​’हम बिना बुलाए नहीं जाते, हिंदुओं की आंखें खोलने गली-गली भटक रहे हैं’

​अपने संबोधन के दौरान शंकराचार्य भावुक भी हुए और आक्रोशित भी। उन्होंने अपनी यात्रा का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा, “शंकराचार्य की एक मर्यादा होती है, हम बिना बुलाए कहीं नहीं जाते। लेकिन आज गोमाता की दुर्दशा देखकर हम अपनी मर्यादा और आराम छोड़कर गली-गली घूम रहे हैं। हम घूम-घूम कर सोए हुए हिंदुओं की आंखें खोलने आए हैं।”

​उन्होंने जनता को आगाह करते हुए कहा कि आपके धार्मिक विश्वास के साथ बहुत बड़ा धोखा हो रहा है। अगर गोमाता सुरक्षित नहीं हैं, तो असली सनातनी को सबसे ज्यादा दर्द होगा। गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना केवल एक मांग नहीं, बल्कि हर सनातनी के अस्तित्व की लड़ाई है।

​’अहंकार में चूर उत्तर प्रदेश सरकार को मुगलों और अंग्रेजों का दिया उदाहरण’

​शंकराचार्य ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए वर्तमान व्यवस्था पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और बड़े-बड़े नेता हमेशा शंकराचार्यों का सम्मान करते आए हैं। यहाँ तक कि देश के इतिहास में मुगलों और अंग्रेजों ने भी कभी शंकराचार्य पद और पीठ का अपमान नहीं किया। मगर, वर्तमान उत्तर प्रदेश सरकार अहंकार में पूरी तरह चूर है।

​उन्होंने दो टूक लहजे में कहा, “जो सरकार गोवध को पूरी तरह नहीं रोक सकती और गाय को राष्ट्रमाता का सम्मानजनक दर्जा नहीं दे सकती, उसे सत्ता की कुर्सी पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।” उन्होंने जनता से आह्वान किया कि इस बार जब भी मतदान करने जाएं, तो अपनी उंगली का इस्तेमाल गोमाता की रक्षा और उनके सम्मान के लिए करें।

​धाकरान चौराहे पर भेंट किया गया हल, ली गई गो-रक्षा की प्रतिज्ञा

​इस धर्मसभा के दौरान धाकरान चौराहे पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद सरस्वती को एक पारंपरिक ‘हल’ भेंट किया गया। हल को हाथ में लेते हुए शंकराचार्य ने कृषि और गोवंश के अटूट रिश्ते को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह हल केवल एक कृषि यंत्र नहीं है, बल्कि यह हमारे देश के किसान की असली ताकत है। गाय का बछड़ा ही बड़ा होकर बैल बनता है और इसी हल के सहारे वह जमीन का सीना चीरकर पूरे राष्ट्र का पेट भरने के लिए अन्न पैदा करता है। गाय और किसान एक-दूसरे के पूरक हैं।

​इस भावुक क्षण के बाद, उन्होंने सभा में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को हाथ उठवाकर गोमाता की रक्षा करने और उन्हें राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए संघर्ष करने की पवित्र शपथ दिलाई। कार्यक्रम के दौरान दिनेश पचौरी, सुरेश पचौरी, आशीष बल्लभ पचौरी, रानू, नरेश, आदित्य, आयुष, अपूर्व शर्मा, मनीष धाकड़, नवीन शर्मा, मदन मोहन शर्मा, हैप्पी शिवहरे और सागर सहित भारी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।

​’हर नेता को देनी होगी परीक्षा, सिर्फ एकनाथ शिंदे हुए पास’

​आगामी राजनीतिक परिदृश्य पर बात करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि अब चुनाव से पहले हर राजनीतिक दल और नेता को अग्निपरीक्षा देनी होगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अब तक इस परीक्षा में केवल महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ही पास हो पाए हैं, जिन्होंने गाय को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देने की दिशा में ठोस कदम उठाए थे। उनके अलावा किसी भी अन्य नेता ने गाय को यह गौरव देने की हिम्मत नहीं दिखाई।

​उन्होंने युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए कहा कि हमें अपने बच्चों को यह सिखाना होगा कि गाय केवल दूध देने का जरिया या कोई साधन नहीं है, बल्कि वह हमारी संस्कृति की रीढ़ है। उन्होंने एक अनूठा सुझाव देते हुए कहा कि हर विधानसभा क्षेत्र में ‘गोमाता’ के नाम पर एक ‘नोट’ (दान या अंशदान) चलाया जाना चाहिए, जिससे स्थानीय गोधामों में गायों की बेहतर सेवा और देखभाल हो सके।

​मुस्लिम समाज ने भी बढ़ाया कदम, दिया यात्रा को पूर्ण समर्थन

​इस गो-रक्षार्थ आंदोलन की सबसे खूबसूरत और सांप्रदायिक सौहार्द की तस्वीर तब देखने को मिली, जब भारतीय मुस्लिम विकास परिषद ने जगद्‌गुरु शंकराचार्य की इस यात्रा का पुरजोर समर्थन किया।

​परिषद के राष्ट्रीय महासचिव सैयद इरफान अहमद सलीम ने खुद शंकराचार्य से मुलाकात की और उन्हें समर्थन पत्र सौंपा। उन्होंने बेहद सकारात्मक शब्दों में कहा कि गाय के साथ करोड़ों हिंदू भाई-बहनों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। हम उनके इस विश्वास का सम्मान करते हैं। मुस्लिम समाज भी पुरजोर तरीके से मांग करता है कि सरकार को अविलंब गाय को राष्ट्रमाता घोषित कर देना चाहिए ताकि समाज में शांति और सौहार्द का माहौल और मजबूत हो सके।