
आगरा। देश के विकास और भविष्य की योजनाओं का खाका तैयार करने वाली राष्ट्रीय जनगणना का काम उत्तर प्रदेश के ताजनगरी आगरा में तेजी से चल रहा है। लेकिन, इस बीच प्रशासन के सामने एक ऐसी चुनौती आई है जिसने अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। शहर के कई इलाकों से खबरें आ रही हैं कि लोग घरों पर पहुंच रहे प्रगणकों (Census Enumerators) को पूरी जानकारी नहीं दे रहे हैं या फिर उनके काम में सहयोग करने से कतरा रहे हैं।
इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए आगरा के जिलाधिकारी और प्रमुख जनगणना अधिकारी मनीष बंसल ने आम जनता से एक बेहद महत्वपूर्ण और सख्त अपील की है। डीएम ने साफ शब्दों में कहा है कि जनगणना में बाधा डालना या गलत जानकारी देना कोई साधारण बात नहीं है, बल्कि यह देश के विकास को रोकने जैसा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि असहयोग करने वालों के खिलाफ कानूनी चाबुक चलना तय है।
33 अनिवार्य सवाल: आखिर क्या जानना चाहता है प्रशासन?
जनगणना कोई कागजी औपचारिकता मात्र नहीं है, बल्कि यह आपके और हमारे भविष्य की रूपरेखा तय करने का जरिया है। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने बताया कि घर-घर जा रहे प्रगणकों को नागरिकों से कुल 33 सवाल पूछने के लिए अधिकृत किया गया है।
ये 33 सवाल मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर आधारित हैं:
- आपके परिवार के सदस्यों की संख्या और उनकी उम्र।
- शैक्षणिक योग्यता (परिवार में कौन कितना पढ़ा-लिखा है)।
- रोजगार और आजीविका के साधन।
- आवास की स्थिति और बुनियादी सुविधाएं (बिजली, पानी, शौचालय आदि)।
ये सवाल इसलिए जरूरी हैं ताकि सरकार को यह पता चल सके कि आगरा के किस इलाके में किस चीज की कमी है और आने वाले समय में वहाँ अस्पताल, स्कूल, सड़कें या राशन की दुकानें किस तरह प्लान की जाएं।
धारा 8 और 11: कानून की नजर में असहयोग पड़ेगा भारी
अक्सर लोगों को लगता है कि जनगणना के कर्मचारियों को टालना या गलत जानकारी देना उनका निजी मामला है, लेकिन ऐसा सोचना आपको भारी मुसीबत में डाल सकता है। डीएम मनीष बंसल ने जनगणना अधिनियम (Census Act) का हवाला देते हुए नागरिकों को उनके कानूनी दायित्वों की याद दिलाई है।
जनगणना अधिनियम की धारा 08: इस कानून के तहत देश के प्रत्येक नागरिक का यह कानूनी कर्तव्य है कि वह प्रगणक द्वारा पूछे गए सभी 33 सवालों का बिल्कुल सही और सत्य जवाब दे।
जनगणना अधिनियम की धारा 11: यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर सरकारी प्रगणक को गलत जानकारी देता है, सवालों के जवाब देने से साफ इनकार करता है, या उनके काम में किसी भी तरह की बाधा उत्पन्न करता है, तो उसके खिलाफ इस धारा के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें ₹1000 का जुर्माना और अधिकतम 03 साल की जेल का सख्त प्रावधान है।
प्रगणक घर आएं तो सबसे पहले करें ये काम
जिला प्रशासन ने जनता की सुरक्षा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए कुछ जरूरी गाइडलाइंस भी जारी की हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि जब भी कोई प्रगणक आपके दरवाजे पर दस्तक दे, तो घबराने या आशंकित होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।
- आईडी कार्ड की जांच करें: सुरक्षा के लिहाज से नागरिक सबसे पहले प्रगणक के आधिकारिक पहचान पत्र (ID Card) की जांच जरूर कर लें।
- सटीक जानकारी दर्ज कराएं: पहचान संतुष्ट होने के बाद, परिवार के मुखिया या जिम्मेदार सदस्य को बिना किसी हिचकिचाहट के सभी 33 सवालों के सटीक और प्रामाणिक जवाब दर्ज कराने चाहिए।
आपकी जानकारी पूरी तरह है ‘टॉप सीक्रेट’
प्रशासन ने लोगों के मन में चल रहे सबसे बड़े डर यानी प्राइवेसी (गोपनीयता) को लेकर भी स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। कई लोगों को डर रहता है कि उनके परिवार या संपत्ति की जानकारी बाहर आ जाएगी या इसका गलत इस्तेमाल होगा।
इस पर डीएम मनीष बंसल ने भरोसा दिलाते हुए कहा, “नागरिकों द्वारा दी गई सभी जानकारियां पूरी तरह से गोपनीय रखी जाती हैं। इस डेटा का उपयोग किसी अन्य काम के लिए नहीं, बल्कि केवल देश की सांख्यिकीय रिपोर्ट तैयार करने और जनहितकारी नीतियों के निर्माण के लिए किया जाता है।” इसलिए सुरक्षा या प्राइवेसी को लेकर मन में कोई भी संदेह न रखें।
राष्ट्रीय यज्ञ में आहुति देना हर नागरिक का फर्ज
जनगणना देश का एक ऐसा ‘राष्ट्रीय यज्ञ’ है, जिसकी सफलता पर हमारे आने वाले कल की नीतियां टिकी हैं। आगरा जिला प्रशासन की यह सख्ती किसी को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि इस महत्वपूर्ण कार्य की गंभीरता को बनाए रखने के लिए है। एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमारा यह फर्ज बनता है कि हम कानूनी कार्रवाई के डर से नहीं, बल्कि देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए इस प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर सहयोग करें।
जब प्रगणक आपके घर आएं, तो मुस्कुराकर उनका स्वागत करें, क्योंकि वे आपके और देश के उज्ज्वल भविष्य का डेटा तैयार करने निकले हैं।



