
आगरा। कहते हैं कि मुसीबत में दोस्त ही दोस्त के काम आता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के आगरा से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने दोस्ती के इस पवित्र रिश्ते को तार-तार कर दिया है। यहाँ एक शख्स को अपने ही जिगरी दोस्त पर भरोसा करना इतना भारी पड़ गया कि उसे अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ा।
मामला आगरा के थाना जगदीशपुरा क्षेत्र का है, जहाँ एक जूता कारीगर (शू वर्कर) ने बैंक की कुर्की के नोटिस और दोस्त की बेरुखी से तंग आकर ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है, वहीं पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए मुख्य आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
क्या है पूरा मामला? धोखे की वो कहानी जिसने ले ली मासूम की जान
यह दर्दनाक कहानी जगदीशपुरा क्षेत्र के रहने वाले रामबाबू चौहान की है। रामबाबू पेशे से शू वर्कर थे और मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, रामबाबू की दोस्ती इकबाल नाम के एक व्यक्ति से थी। रामबाबू को अंदाजा भी नहीं था कि जिस दोस्त पर वह आंख मूंदकर भरोसा कर रहे हैं, वही एक दिन उनकी मौत का सबब बन जाएगा।
मृतक के बेटे राहुल चौहान ने बताया कि इकबाल ने चालाकी और जालसाजी से रामबाबू के नाम पर बैंक से एक बड़ा लोन पास करवा लिया था। लोन लेते वक्त आरोपी ने भरोसा दिया था कि वह समय पर सारी किस्तें चुका देगा, लेकिन लोन की रकम हाथ में आते ही इकबाल की नीयत डोल गई और उसने बैंक की किस्तें जमा करना बंद कर दिया।
बैंक का दबाव और जेल भेजने की धमकी: जब टूट गए रामबाबू
जब इकबाल ने लोन की ईएमआई (EMI) भरना बंद कर दिया, तो बैंक ने नियमानुसार गारंटर और खाताधारक रामबाबू पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। बैंक की तरफ से लगातार नोटिस आने लगे और आखिरी में घर की ‘कुर्की’ का नोटिस थमा दिया गया। सम्मान के साथ जीने वाले रामबाबू के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं था।
“पिताजी ने कई बार इकबाल के हाथ-पैर जोड़े, उससे लोन की किस्त चुकाने की मिन्नतें कीं। लेकिन इकबाल का दिल नहीं पघला। उल्टा उसने पिताजी को ही झूठे मुकदमों में फंसाने और जेल भिजवाने की धमकियां देनी शुरू कर दीं।”
— राहुल चौहान, मृतक का बेटा
एक तरफ बैंक की कुर्की का डर और दूसरी तरफ समाज में बदनामी का खौफ; रामबाबू इस दोहरे मानसिक तनाव को बर्दाश्त नहीं कर पाए। आखिरकार, 15 मई की सुबह करीब 7:45 बजे वे आरबीएस कॉलेज ग्राउंड के पास पहुंचे और वहां से गुजर रही एक तेज रफ्तार ट्रेन के आगे कूद गए। टक्कर इतनी भयानक थी कि रामबाबू के शरीर के चीथड़े उड़ गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
पंचायत में आरोपी ने कबूला जुर्म, लिखित में मांगी माफी
रामबाबू की मौत के बाद जब यह मामला गरमाया, तो स्थानीय स्तर पर पंचायत बुलाई गई। मृतक के बेटे राहुल के मुताबिक, 17 मई को हुई इस पंचायत में समाज के गणमान्य लोगों के सामने आरोपी इकबाल टूट गया। उसने सभी के सामने यह बात स्वीकार की कि उसी के धोखे और कर्ज न चुकाने की वजह से रामबाबू ने यह आत्मघाती कदम उठाया।
हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपी इकबाल ने पंचायत में लिखित रूप से अपनी गलती स्वीकार की और खुद को रामबाबू की मौत का जिम्मेदार बताया। हालांकि, इस लिखित स्वीकारोक्ति के बावजूद पीड़ित परिवार को इंसाफ मिलना बाकी था।
जगदीशपुरा पुलिस ने दर्ज की एफआईआर, जांच शुरू
पिता की मौत और आरोपी की स्वीकारोक्ति के बाद राहुल चौहान ने न्याय के लिए पुलिस का दरवाजा खटखटाया। राहुल की तहरीर पर आगरा की थाना जगदीशपुरा पुलिस ने आरोपी इकबाल के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा (FIR) दर्ज कर लिया है।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सबूतों को इकट्ठा किया जा रहा है। पंचायत के लिखित दस्तावेज और बैंक से जुड़े लोन के कागजात की जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।



