भारत में सूरज के तेवर दिन-ब-दिन तीखे होते जा रहे हैं। पारा लगातार ऊपर चढ़ रहा है और इस भीषण चिलचिलाती गर्मी से न केवल इंसान, बल्कि बेजुबान जानवर भी बेहाल हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश के आगरा और मथुरा से एक बेहद सुकून देने वाली और मानवीय तस्वीर सामने आई है। वन्यजीवों के कल्याण के लिए काम करने वाली संस्था वाइल्डलाइफ एसओएस (Wildlife SOS) ने अपने केंद्रों में रह रहे बचाए गए (Rescued) हाथियों और भालुओं को इस जानलेवा गर्मी से बचाने के लिए ‘समर स्पेशल’ पुख्ता इंतजाम किए हैं।

​आगरा और मथुरा स्थित संरक्षण केंद्रों में इन दिनों जानवरों के लिए वॉटर स्प्रिंकलर, ठंडे-ठंडे पूल, फलों के पॉप्सिकल्स और खास डाइट का इंतजाम किया गया है, ताकि वे साल के इन सबसे गर्म महीनों को आराम से काट सकें।

​फल वाले पॉप्सिकल्स और ठंडे पूल: आगरा के भालुओं की ‘कूल’ गर्मियां

​आगरा भालू संरक्षण केंद्र (Agra Bear Rescue Facility) में इन दिनों नजारा किसी समर कैंप जैसा है। कभी बेरहमी और कलंदरों के चंगुल से छुड़ाए गए इन सुस्त भालुओं को गर्मी से राहत दिलाने के लिए उनके बाड़ों में बड़े-बड़े एयर कूलर और वॉटर स्प्रिंकलर (फव्वारे) लगाए गए हैं।

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​सिर्फ इतना ही नहीं, भालुओं के खान-पान में भी बड़ा बदलाव किया गया है। उन्हें अतिरिक्त नमी और पोषण देने के लिए तरबूज, खरबूजा और आम जैसे मौसमी फल दिए जा रहे हैं। देखभाल करने वाले कर्मचारी भालुओं के लिए फलों को जमाकर ‘फ्रोजन फ्रूट पॉप्सिकल्स’ (बर्फ के गोले) तैयार करते हैं। भालू बड़े चाव से इन पॉप्सिकल्स को चाटते हैं, जिससे उनका मनोरंजन भी होता है और शरीर को ठंडक भी मिलती है। इसके अलावा, डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए उन्हें ओआरएस (ORS) का घोल भी दिया जा रहा है।

​मथुरा में हाथियों के लिए मड-बाथ और स्प्रिंकलर की बौछार

​मथुरा स्थित ‘हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र’ और ‘हाथी अस्पताल परिसर’ में भी गर्मी से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर तैयारियां की गई हैं। हाथियों के बड़े शरीर को ठंडी हवा और पानी की सख्त जरूरत होती है। इसके लिए उनके बाड़ों में आधुनिक स्प्रिंकलर सिस्टम लगाए गए हैं, जो लगातार पानी की फुहारें छोड़ते रहते हैं।

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​हाथियों को तालाबों तक चौबीसों घंटे बेरोक-टोक पहुंच दी गई है, जहां वे जब चाहें डुबकी लगा सकते हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम हाथियों के लिए ‘मड बाथ’ (मिट्टी के स्नान) का भी प्रबंध कर रही है। मिट्टी का यह लेप हाथियों की संवेदनशील त्वचा के लिए सनस्क्रीन की तरह काम करता है, जो उन्हें सीधी धूप और कीड़ों से बचाता है। हाथियों की डाइट में कद्दू, लौकी, खीरा और तरबूज प्रचुर मात्रा में शामिल किए गए हैं।

​”बढ़ते तापमान में सक्रिय प्रबंधन जरूरी”: कार्तिक सत्यनारायण

​हर साल बदलते मौसम और ग्लोबल वार्मिंग के कारण बढ़ती गर्मी वन्यजीवों के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा:

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​“जैसे-जैसे हर साल तापमान बढ़ता जा रहा है, मानव देखरेख में रहने वाले जानवरों के लिए सक्रिय ग्रीष्मकालीन प्रबंधन और भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है। हमारी टीमें यह सुनिश्चित करने के लिए अथक प्रयास करती हैं कि प्रत्येक भालू और हाथी पूरे मौसम में हाइड्रेटेड, आरामदायक और मानसिक रूप से सक्रिय रहे।”

​करुणा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अनोखा मेल

​किसी भी जानवर को केवल भौतिक रूप से ठंडा रखना ही काफी नहीं होता, बल्कि उनका मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य भी उतना ही जरूरी है। वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव, गीता शेषमणि के अनुसार, संस्था का हर कदम जानवरों के प्रति संवेदना से भरा है। उन्होंने बताया:

​“ग्रीष्मकालीन देखभाल के प्रत्येक प्रोटोकॉल को जानवरों के शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सावधानीपूर्वक तैयार किया जाता है। चाहे वह जमे हुए भोजन का आनंद ले रहा भालू हो या स्प्रिंकलर के नीचे ठंडक पा रहा हाथी, हर प्रयास करुणा और विशेष देखभाल पर आधारित है।”

​डॉक्टरों की टीम रख रही है पल-पल की नजर

​गर्मियों के मौसम में जानवरों में ‘हीट स्ट्रोक’ या गर्मी के तनाव (Heat Stress) का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। इससे निपटने के लिए पशु चिकित्सकों की एक समर्पित टीम चौबीसों घंटे तैनात है।

वाइल्डलाइफ एसओएस की पशु चिकित्सा सेवाओं के उप निदेशक डॉ. इलयाराजा एस ने बताया कि इस मौसम में जल प्रबंधन और शीतल पर्यावरण कितना आवश्यक है। उन्होंने कहा, “गर्मी के तनाव को रोकने के लिए निरंतर निगरानी, ​​जल प्रबंधन और शीतल पर्यावरण आवश्यक हैं। आहार संबंधी सहायता के माध्यम से, हमारी पशु चिकित्सा और देखभालकर्ता टीमें यह सुनिश्चित करती हैं कि जानवर भीषण गर्मी की स्थितियों का सुरक्षित रूप से सामना कर सकें।”