आगरा। कहते हैं कि नियति कब क्या खेल रच दे, कोई नहीं जानता। ताजनगरी आगरा के कमला नगर थाना क्षेत्र से एक ऐसी ही हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। एक तरफ घर में नन्हीं बिटिया के जन्मदिन की खुशियां मनाई जा रही थीं, रिश्तेदार जुटे थे, हंसी-ठिठोली का माहौल था, लेकिन पलक झपकते ही यह उल्लास चीख-पुकार में बदल गया। बल्केश्वर मंदिर के सामने यमुना नदी में नहाने गए छह बच्चे गहरे पानी की चपेट में आ गए, जिनमें से चार की डूबने से मौत हो गई।

​खुशियों के बीच पसरा सन्नाटा: जन्मदिन बना काल

​घटना की शुरुआत एत्माद्दौला के विद्यापुरम इलाके से होती है। यहाँ रहने वाले सौरभ की बेटी नित्या का जन्मदिन था। इस खास मौके पर शामिल होने के लिए दूर-दराज के रिश्तेदार और बच्चे आए हुए थे। गर्मी का सितम और अपनों के साथ वक्त बिताने का उत्साह बच्चों को यमुना किनारे खींच ले गया। दोपहर करीब 11 बजे, बिना किसी को बताए, छह बच्चे बल्केश्वर मंदिर के सामने यमुना घाट पर पहुँच गए।

​चिलचिलाती गर्मी से राहत पाने के लिए बच्चों ने एक साथ नदी में छलांग लगा दी। उन्हें अंदाजा नहीं था कि शांत दिखने वाली यमुना की गहराई उनके लिए काल बन जाएगी। जैसे ही वे गहरे पानी में गए, एक-एक कर सभी डूबने लगे। घाट पर मौजूद लोगों ने जब बच्चों को हाथ-पांव मारते और डूबते देखा, तो वहां अफरा-तफरी मच गई।

​रेस्क्यू ऑपरेशन और अस्पताल का खौफनाक मंजर

​स्थानीय लोगों की सूचना पर थाना कमला नगर पुलिस और गोताखोरों की टीम तुरंत मौके पर पहुँची। स्थानीय मल्लाहों और पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद पाँच बच्चों—महक (19), अंशु (20), कान्हा (22), रिया (17) और काजल (17) को पानी से बाहर निकाला।

​इनमें से महक, कान्हा, रिया और काजल की हालत बेहद नाजुक थी। उन्हें तत्काल एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में ले जाया गया। डॉक्टरों ने अथक प्रयास किए, लेकिन महक, कान्हा और रिया की सांसें टूट चुकी थीं। वहीं, 11 वर्षीय विक्की पानी में कहीं लापता हो गया था, जिसकी तलाश के लिए प्रशासन ने घंटों सर्च ऑपरेशन चलाया। करीब 5 घंटे की मशक्कत के बाद विक्की का शव भी बरामद कर लिया गया।

​”चार बेटियों के बाद दुआओं से मिला था बेटा”

​इस हादसे में सबसे मर्मस्पर्शी कहानी छोटे विक्की की है। विक्की के पिता राकेश का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्होंने रुंधे गले से बताया, “बड़ी मन्नतों और दुआओं के बाद चार बेटियों के बाद एक बेटा हुआ था। भगवान ने उसे भी छीन लिया।” विक्की अपनी बुआ की लड़की के जन्मदिन में शामिल होने आया था, लेकिन उसे क्या पता था कि यह उसका आखिरी सफर होगा।

​हादसे की चश्मदीद संध्या ने बताया कि वे सभी सुबह 9 बजे घर से निकले थे। जब वे दूसरी तरफ नहा रहे थे, तभी कान्हा ने डूबते हुए कुछ लोगों को बचाने की कोशिश की, लेकिन खुद भी गहराई में चला गया। संध्या ने हिम्मत दिखाते हुए अपनी बहन काजल को तो किनारे खींच लिया, लेकिन बाकी भाई-बहनों को वह अपनी आंखों के सामने डूबते देखती रह गई।

​प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी

​हादसे की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह भी घटनास्थल पर पहुँचे और पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाया। डीसीपी सिटी सैय्यद अली अब्बास ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि गोताखोरों की मदद से सभी को निकाल लिया गया था, लेकिन दुर्भाग्यवश 4 बच्चों की जान नहीं बचाई जा सकी। पुलिस का कहना है कि स्थिति अब नियंत्रण में है और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

नदियों के किनारों पर की गई एक छोटी सी लापरवाही कितनी बड़ी कीमत वसूल सकती है। गर्मी के मौसम में नदियों की ओर रुख करना स्वाभाविक है, लेकिन पानी की गहराई और बहाव का सही अंदाजा न होना जानलेवा साबित होता है। शासन-प्रशासन को भी चाहिए कि संवेदनशील घाटों पर चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा घेरा पुख्ता करें ताकि फिर किसी मां की गोद सूनी न हो।