अंबेडकरनगर के अकबरपुर में एक ऐसा मंजर देखने को मिला जिसने न केवल पुलिस प्रशासन, बल्कि पूरे प्रदेश की रूह को कंपा दिया। कहते हैं कि एक मां अपने बच्चों की ढाल होती है, लेकिन जब वही रक्षक भक्षक बन जाए, तो समाज के पास निशब्द होने के अलावा कोई चारा नहीं बचता। शनिवार की दोपहर अकबरपुर के मीरानपुर इलाके में चीखें भी नहीं सुनाई दीं, बस खामोशी के साथ चार मासूम जिंदगियां मौत की आगोश में सो गईं।

​विश्वासघात और चार साल का इंतज़ार: वारदात की जड़ें

​यह कहानी सिर्फ एक अपराध की नहीं है, बल्कि उस मानसिक प्रताड़ना और धोखे की है जो सात समंदर पार सऊदी अरब से शुरू हुई। महरुआ के कसड़ा निवासी 37 वर्षीय नियाज सऊदी अरब में नौकरी करता है। घर की सुख-सुविधाओं के लिए उसने अकबरपुर के मीरानपुर में अपनी पत्नी गासिया खातून (34) के नाम पर एक आलीशान मकान बनवाया था। लेकिन इस मकान की दीवारों के पीछे जो कड़वाहट पल रही थी, उसका अंदाजा किसी को नहीं था।

​पुलिस सूत्रों के मुताबिक, नियाज ने सऊदी अरब में एक पाकिस्तानी महिला से दूसरा निकाह कर लिया था। पिछले चार सालों से वह एक बार भी घर नहीं लौटा। गासिया अपने चार बच्चों—शफीक (14), सऊद (12), उमर (10) और सबसे छोटी बेटी बयान (8)—के साथ अकेली रह रही थी। पति का दूसरा निकाह और उसका घर न आना गासिया के भीतर एक ज्वालामुखी की तरह उबल रहा था, जो शनिवार को आखिर फट पड़ा।

​खौफनाक शनिवार: दूधवाले की दस्तक और खामोश घर

​शनिवार की सुबह हमेशा की तरह सामान्य लग रही थी। सुबह करीब 7:30 बजे जब दूधवाला गासिया के घर पहुँचा और दरवाजा खटखटाया, तो अंदर से कोई हलचल नहीं हुई। उसने सोचा शायद परिवार सो रहा होगा और वह वापस चला गया। लेकिन समय बीतने के साथ खामोशी गहरी होती गई।

​जब सऊदी अरब में बैठे नियाज का अपने बच्चों से फोन पर संपर्क नहीं हो पाया, तो उसे अनहोनी की आशंका हुई। उसने शहजादपुर में रहने वाली अपनी भाभी बकीतुनिशा को घर जाकर देखने को कहा। जब दोपहर 3 बजे पुलिस मौके पर पहुँची, तो मुख्य दरवाजा अंदर से बंद था। पुलिस कर्मी जब पहली मंजिल की बालकनी के रास्ते घर में दाखिल हुए, तो कमरे का मंजर देखकर अनुभवी अफसरों के भी पांव तले जमीन खिसक गई। तखत पर चारों बच्चों के खून से लथपथ शव पड़े थे।

​अनसुलझे सवाल: क्या यह सिर्फ एक मां का जुनून था?

​पुलिस ने मौके से एक मोबाइल बरामद किया है और फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए हैं। हालांकि, प्रथम दृष्टया शक की सुई मां गासिया खातून पर ही है, जो वारदात के बाद से फरार है। लेकिन स्थानीय लोगों और जांच टीम के मन में कई सवाल कौंध रहे हैं:

  1. जहर या हथियार? बच्चों के शव खून से लथपथ मिले हैं, जिससे साफ है कि उन पर किसी धारदार चीज से हमला किया गया। लेकिन चर्चा यह भी है कि क्या उन्हें पहले जहरीला पदार्थ दिया गया? यदि हाँ, तो किचन के बर्तन बिल्कुल साफ कैसे मिले?
  2. फरार होने का रास्ता: घर अंदर से बंद था। गासिया बालकनी से कूदकर भागने में कैसे सफल रही और क्या उसे किसी बाहरी व्यक्ति की मदद मिली?
  3. मानसिक स्थिति: क्या चार साल का अकेलापन और पति का धोखा गासिया को इस हद तक पागल कर गया कि उसे अपनी ही कोख के मासूमों पर तरस नहीं आया?

​पुलिस की कार्रवाई और प्रशासनिक हलचल

​घटना की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी सोमेन वर्मा, डीएम ईशा प्रिया और एसपी प्राची सिंह तुरंत मौके पर पहुँचे। एसपी प्राची सिंह ने बताया कि पति की दूसरी शादी के कारण परिवार में लंबे समय से तनाव चल रहा था। शुरुआती जांच में इसे तनाव के कारण किया गया कृत्य माना जा रहा है। गासिया के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कर ली गई है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।

​शवों को पोस्टमार्टम के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया है। पुलिस का मानना है कि गासिया की गिरफ्तारी के बाद ही इस जघन्य हत्याकांड की असल वजह और पूरी साजिश का पर्दाफाश हो सकेगा।

​निष्कर्ष (Conclusion)

​अंबेडकरनगर की यह घटना आधुनिक समाज और बिखरते पारिवारिक रिश्तों का एक काला चेहरा पेश करती है। पति का धोखा निश्चित रूप से अक्षम्य था, लेकिन उन चार मासूमों का क्या कसूर था जिन्होंने अभी दुनिया देखी भी नहीं थी? यह वारदात हमें सोचने पर मजबूर करती है कि मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक कलह को समय रहते न सुलझाया जाए, तो वह कितनी बड़ी तबाही ला सकती है।