
ताजनगरी आगरा में आंबेडकर जयंती के पावन पर्व पर भाईचारे और उल्लास के बीच कुछ अराजक तत्वों ने शहर की फिजा बिगाड़ने की कोशिश की। आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर 6 स्थित परशुराम चौक पर हुई एक घटना ने न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत किया है, बल्कि इलाके में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति भी पैदा कर दी। रैली के दौरान कुछ युवकों द्वारा जूते-चप्पल पहनकर परशुराम चौक पर चढ़ने और वहां नीला झंडा लहराने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है।
क्या है पूरा मामला? उल्लास के बीच कैसे बिगड़ा माहौल
आगरा में बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती हर साल बेहद धूमधाम से मनाई जाती है। मंगलवार को भी शहर में जगह-जगह रैलियां और शोभायात्राएं निकाली जा रही थीं। दोपहर करीब 12:30 बजे, जब अनुयायियों की एक रैली आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर 6 से गुजर रही थी, तभी कुछ युवकों ने मर्यादा की सीमाएं लांघ दीं।
प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल वीडियो के अनुसार, रैली में शामिल कुछ युवक अचानक ‘भगवान परशुराम चौक’ के ऊपर चढ़ गए। चौंकाने वाली बात यह थी कि ये युवक जूते-चप्पल पहने हुए थे। उन्होंने वहां पहले से लगे धार्मिक झंडे को हटाने का प्रयास किया और अपना नीला झंडा लहराना शुरू कर दिया। इस घटना का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ, पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया और ब्राह्मण समाज के लोगों में गुस्से की लहर दौड़ गई।
सीसीटीवी तोड़ने और अभद्रता के आरोप
घटना केवल चौक पर चढ़ने तक ही सीमित नहीं रही। मौके पर मौजूद ब्राह्मण समाज के लोगों और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि अराजक तत्वों ने वहां लगे सीसीटीवी कैमरों के साथ भी छेड़छाड़ की और उन्हें तोड़ने का प्रयास किया। समाज के नेताओं का कहना है कि यह केवल एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि माहौल बिगाड़ने की एक सोची-समझी साजिश थी। घटना के बाद बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोग परशुराम चौक पर एकत्रित हो गए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे।
”हम बाबा साहब का सम्मान करते हैं, लेकिन आराध्य का अपमान बर्दाश्त नहीं”
घटना को लेकर ब्राह्मण नेता मदन मोहन शर्मा ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर पूरे देश के हैं और हम सभी उनकी जयंती का सम्मान करते हैं। लेकिन जयंती मनाने का यह तरीका कतई स्वीकार्य नहीं है कि आप दूसरों की आस्था को ठेस पहुंचाएं। भगवान परशुराम हमारे पूज्य हैं। जूते पहनकर उनके प्रतीक स्थल पर चढ़ना और झंडे के साथ अभद्रता करना सीधे तौर पर उकसाने वाली कार्रवाई है।”
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि वीडियो के आधार पर अराजक तत्वों की पहचान की जाए और उन पर मुकदमा दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई इस तरह की हिम्मत न कर सके।
आमने-सामने आए दो गुट, पुलिस ने संभाला मोर्चा
जब घटना के विरोध में ब्राह्मण समाज के लोग चौक पर जुटे, उसी दौरान वहां से एक और रैली गुजर रही थी। माहौल तब और गरमा गया जब दोनों पक्षों के बीच जमकर नारेबाजी शुरू हो गई। स्थिति बिगड़ते देख सिकंदरा थाना पुलिस भारी बल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर शांत कराया और किसी भी तरह की हिंसक झड़प को होने से रोका। एहतियात के तौर पर इलाके में पुलिस पिकेट तैनात कर दी गई है।
प्रशासन का पक्ष: तनाव नहीं, अफवाहों से बचें
इस पूरे मामले पर डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने स्पष्ट किया है कि पुलिस स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है। उन्होंने बताया कि रैली के दौरान कुछ युवक चौक पर चढ़े थे, लेकिन किसी भी प्रकार की बड़ी तोड़फोड़ की पुष्टि नहीं हुई है। डीसीपी के अनुसार, “कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने की कोशिश की थी, जिससे तनाव बढ़ा। हमने फोर्स तैनात कर दी है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।”
निष्कर्ष: सामाजिक समरसता की जरूरत
आगरा जैसे ऐतिहासिक शहर में, जो अपनी मिली-जुली संस्कृति के लिए जाना जाता है, ऐसी घटनाएं आपसी भाईचारे के लिए घातक हैं। किसी भी महापुरुष की जयंती का उद्देश्य उनके विचारों को अपनाना होना चाहिए, न कि दूसरे धर्म या समाज की भावनाओं को आहत करना। हालांकि पुलिस ने स्थिति संभाल ली है, लेकिन यह घटना प्रशासन के लिए एक सबक है कि रैलियों के दौरान सुरक्षा और निगरानी के इंतजाम और पुख्ता होने चाहिए।
पाठकों के लिए एक सवाल:
क्या आपको लगता है कि इस तरह की घटनाओं के पीछे कुछ शरारती तत्वों की सोची-समझी साजिश होती है, या यह केवल भीड़ के उत्साह में की गई गलती है? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।




