
आगरा की राजनीति में गुरुवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। मामला नगर निगम में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद से जुड़ा है। सपा ने आगरा की मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाह और नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि नगर निगम में नियमों को ताक पर रखकर चहेतों और रिश्तेदारों को रेवड़ियां बांटी जा रही हैं।
होटल अमर से कमिश्नरी तक गूंजे भ्रष्टाचार विरोधी नारे
समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव रामगोपाल बघेल के नेतृत्व में गुरुवार को पार्टी कार्यकर्ताओं का भारी हुजूम होटल अमर के पास एकत्रित हुआ। यहाँ से कार्यकर्ताओं ने एक विशाल जुलूस निकाला और नारेबाजी करते हुए मंडलायुक्त (कमिश्नर) कार्यालय की ओर कूच किया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर और तख्तियां थीं, जिन पर मेयर और नगर आयुक्त के खिलाफ नारे लिखे हुए थे।
जुलूस जब मंडलायुक्त कार्यालय पहुँचा, तो वहां कार्यकर्ताओं ने धरना शुरू कर दिया। इस दौरान कलेक्ट्रेट का घेराव भी किया गया। कार्यकर्ताओं के आक्रोश को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे, लेकिन सपाइयों के तेवर ढीले नहीं पड़े।
रिश्तेदारों को टेंडर देने का गंभीर आरोप
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे रामगोपाल बघेल ने सीधे तौर पर मेयर हेमलता दिवाकर और नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल पर मिलीभगत का आरोप लगाया। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “आगरा नगर निगम भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है। मेयर और नगर आयुक्त मिलकर सरकारी धन का बंदरबांट कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि अपने करीबियों और रिश्तेदारों के नाम पर फर्जी कंपनियां बनाई गई हैं और नगर निगम के बड़े टेंडर इन्हीं कंपनियों को दिए जा रहे हैं।”
सपा नेताओं का आरोप है कि विकास कार्यों के नाम पर जो पैसा जनता की सुविधाओं के लिए आना चाहिए, वह अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की तिजोरियों में जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि नगर निगम की सीमा से बाहर जाकर भी अवैध रूप से विकास कार्य कराए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर अधिकारों का दुरुपयोग है।
”संपत्ति की हो जांच और बैठे सीबीआई”
समाजवादी पार्टी ने केवल विरोध प्रदर्शन ही नहीं किया, बल्कि इस पूरे मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग भी दोहराई है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि:
- मेयर और नगर आयुक्त के कार्यकाल में हुए सभी टेंडरों की सीबीआई (CBI) जांच कराई जाए।
- इन दोनों पदों पर बैठे व्यक्तियों और उनके करीबियों की आय से अधिक संपत्ति की जांच हो।
- जो टेंडर नियमों के विरुद्ध दिए गए हैं, उन्हें तत्काल निरस्त किया जाए।
सपा नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन आरोपों पर निष्पक्ष जांच नहीं शुरू हुई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
बेमौसम बारिश से बेहाल किसानों का भी उठा मुद्दा
नगर निगम के भ्रष्टाचार के साथ-साथ समाजवादी पार्टी ने किसानों की दुर्दशा पर भी सरकार को घेरा। हाल ही में हुई तेज आंधी और बेमौसम बारिश ने आगरा के ग्रामीण इलाकों में फसलों को भारी नुकसान पहुँचाया है। रामगोपाल बघेल ने कहा कि एक तरफ भ्रष्टाचार से शहर खोखला हो रहा है, तो दूसरी तरफ अन्नदाता सड़कों पर है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि बारिश और आंधी से प्रभावित किसानों का सर्वे कराकर उन्हें जल्द से जल्द उचित मुआवजा दिया जाए।
शासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
आगरा जैसे ऐतिहासिक शहर में मेयर और शीर्ष अधिकारी पर इस तरह के गंभीर आरोप लगना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है। जनता के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या वाकई नगर निगम में ‘सिंडिकेट’ काम कर रहा है? फिलहाल, मंडलायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन के बाद सपा ने अपना ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा है। अब देखना यह होगा कि शासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वाकई जांच के आदेश दिए जाते हैं।
निष्कर्ष
लोकतंत्र में पारदर्शिता सबसे अहम होती है। आगरा नगर निगम पर लगे ये आरोप यदि सही पाए जाते हैं, तो यह जनता के विश्वास के साथ बड़ा खिलवाड़ होगा। विपक्ष के रूप में समाजवादी पार्टी ने भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाकर सत्ता पक्ष को बैकफुट पर धकेलने की कोशिश की है। अब गेंद सरकार के पाले में है कि वह जांच कराकर दूध का दूध और पानी का पानी करती है या नहीं।
पाठकों के लिए एक प्रश्न:
क्या आपको लगता है कि सरकारी विभागों में टेंडर प्रक्रिया की निगरानी के लिए अधिक कड़े कानूनों की आवश्यकता है? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।



