आगरा, जिसे हम मोहब्बत की नगरी के रूप में जानते हैं, इन दिनों नगर निगम के भीतर चल रहे ‘सियासी युद्ध’ के कारण चर्चा में है। नगर निगम सदन में अधिकारियों की अनुपस्थिति और विकास कार्यों के टेंडर आवंटन को लेकर भाजपा पार्षद हेमंत कुमार प्रजापति ने नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यह विवाद अब केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया पर वीडियो वार और कानूनी कार्रवाई की धमकियों तक पहुँच गया है।

​सदन से अधिकारियों की दूरी: क्या जवाबों से बच रहे हैं नगर आयुक्त?

​विवाद की शुरुआत तब हुई जब नगर निगम के सदन की महत्वपूर्ण बैठक में नगर आयुक्त समेत कई आला अधिकारी नदारद रहे। भाजपा पार्षद हेमंत प्रजापति का आरोप है कि सदन में उनके द्वारा पूछे जाने वाले तीखे सवालों और भ्रष्टाचार की पोल खुलने के डर से अधिकारी बैठक में नहीं आए।

​पार्षद ने सीधा हमला बोलते हुए कहा, “मेरे पास विकास कार्यों को लेकर कई गंभीर प्रश्न थे, जिनके उत्तर नगर आयुक्त के पास नहीं थे। इसी घबराहट में उन्होंने और उनकी टीम ने सदन से दूरी बना ली।” लोकतंत्र के मंदिर कहे जाने वाले सदन में जनता के प्रतिनिधियों के सवालों की अनदेखी ने अब एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है।

​450 विकास कार्यों में भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप

​इस पूरे विवाद के केंद्र में हैं लगभग 450 विकास कार्य, जिनमें नियम विरुद्ध टेंडर देने की बात कही जा रही है। हेमंत प्रजापति ने आरोप लगाया है कि नगर आयुक्त ने अपने ‘चहेते’ ठेकेदारों को लाभ पहुँचाने के लिए सरकारी खजाने का बंदरबांट किया है।

​आरोपों की फेहरिस्त में निम्नलिखित विभाग मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • निर्माण विभाग: सड़कों और नालियों के निर्माण में मानकों की अनदेखी।
  • पेंटिंग और सौंदर्यीकरण: शहर के सौंदर्यीकरण के नाम पर धन का दुरुपयोग।
  • उद्यान विभाग: पार्कों के रखरखाव और पौधों की खरीद में वित्तीय अनियमितताएं।

​पार्षद का दावा है कि इन सभी कार्यों की यदि निष्पक्ष जांच हो, तो नगर निगम के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।

​”सफाईकर्मियों को हटाकर गरीबों के पेट पर लात मारी”: पार्षद का इमोशनल कार्ड

​राजनीतिक लड़ाई अब व्यक्तिगत और वार्ड स्तर के प्रतिशोध तक पहुँच गई है। हेमंत प्रजापति ने नगर आयुक्त पर द्वेष भावना से काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके वार्ड से सफाई कर्मचारियों को हटा दिया गया है।

​पार्षद ने वीडियो संदेश में कहा, “नगर आयुक्त ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हुए गरीब सफाई कर्मचारियों को हटा दिया है। यह उन गरीबों के पेट पर लात मारने जैसा है। आप मुझ पर दबाव बनाने के लिए मेरे काम रोक सकते हैं, जांच करा सकते हैं, लेकिन बेगुनाह कर्मचारियों को सजा देना कायरता है।” इस बयान ने सफाई कर्मचारियों और स्थानीय जनता के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।

​पुलिस केस और ‘संदिग्धों’ का विवाद: सदन बना अखाड़ा

​मामला तब और पेचीदा हो गया जब नगर आयुक्त द्वारा थाने में एक तहरीर दी गई, जिसमें सदन में पार्षदों के साथ आए परिजनों और रिश्तेदारों को ‘संदिग्ध’ बताया गया। पार्षद प्रजापति ने इसे पार्षदों का अपमान करार दिया है। उनका कहना है कि नगर निगम में अब भारी पहरा लगा दिया गया है ताकि कोई अपनी आवाज न उठा सके। उन्होंने नगर आयुक्त को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें हिम्मत है तो वे उनका निर्वाचन रद्द करवा कर दिखाएं, लेकिन वे भ्रष्टाचार के खिलाफ झुकेंगे नहीं।

​उच्च न्यायालय जाने की चेतावनी और भविष्य की राह

​हेमंत कुमार प्रजापति ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस लड़ाई को अंजाम तक ले जाएंगे। उन्होंने कहा, “मेरे वार्ड के कार्यों की जांच का मैं स्वागत करता हूँ, लेकिन साथ ही नगर आयुक्त के कार्यकाल में हुए हर एक पैसे के खर्च की भी जांच होनी चाहिए।” उन्होंने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे इलाहाबाद उच्च न्यायालय (High Court) की शरण लेंगे।

​आगरा की जनता अब यह देख रही है कि उनके टैक्स के पैसे का उपयोग विकास में हो रहा है या अधिकारियों की फाइलों में। नगर निगम में छिड़ा यह घमासान आने वाले दिनों में आगरा की राजनीति को एक नई दिशा दे सकता है।

निष्कर्ष

​नगर निगम आगरा का यह विवाद अब केवल प्रशासनिक नहीं रह गया है, बल्कि यह पारदर्शिता और जवाबदेही की लड़ाई बन चुका है। एक तरफ पार्षद भ्रष्टाचार के सबूत होने का दावा कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रशासन अपनी मर्यादाओं की बात कर रहा है। सच्चाई क्या है, यह तो जांच के बाद ही साफ होगा, लेकिन इस खींचतान में शहर का विकास जरूर प्रभावित हो रहा है।

पाठकों के लिए प्रश्न:

क्या आपको लगता है कि नगर निगमों में होने वाले टेंडर आवंटन की प्रक्रिया में पार्षदों का हस्तक्षेप कम होना चाहिए, या अधिकारियों पर जनप्रतिनिधियों का अंकुश जरूरी है? अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताएं।