आगरा। शिक्षा के क्षेत्र में आगरा की ऐतिहासिक पहचान रखने वाले आगरा कॉलेज में बुधवार को भविष्य की राह तलाश रहे युवाओं के लिए एक बेहद ज्ञानवर्धक सत्र का आयोजन किया गया। कॉलेज के वाणिज्य विभाग (B.Com Department) द्वारा आयोजित इस करियर काउंसलिंग संगोष्ठी का मुख्य विषय “चार्टर्ड अकाउंटेंसी: भविष्य और संभावनाएं” रहा। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने न केवल कॉमर्स के छात्रों को सफलता के मंत्र दिए, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि सीए की डिग्री आज के दौर में वैश्विक स्तर पर भारत का गौरव बढ़ा रही है।

​कार्यक्रम का सफल संचालन विभागाध्यक्ष डॉ. अश्वनी शर्मा द्वारा किया गया, जिन्होंने छात्रों को पेशेवर शिक्षा की बारीकियों से अवगत कराया।

​₹36 लाख का पैकेज और उम्र की कोई सीमा नहीं: सीए विवेक अग्रवाल

​संगोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध सीए विवेक अग्रवाल ने अपने संबोधन से छात्रों में नया जोश भर दिया। उन्होंने बाजार के मौजूदा आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वाणिज्य के क्षेत्र में समर्पण और कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने साझा किया कि वर्ष 2024 में इस क्षेत्र में 36 लाख रुपये तक का उच्चतम पैकेज और 12 लाख रुपये का औसत पैकेज युवाओं को मिला है।

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​विवेक अग्रवाल ने दो प्रेरणादायक उदाहरण देते हुए कहा कि जहाँ एक ओर 20 साल की नंदिनी अग्रवाल ने सबसे कम उम्र में सफलता हासिल की, वहीं 71 साल के ताराचंद अग्रवाल ने साबित किया कि सीखने और सफल होने की कोई उम्र नहीं होती। उन्होंने जोर देकर कहा, “समर्पण में वह शक्ति है, जो समर्थ को भी झुकाने का साहस रखती है।”

​77 साल का बेदाग इतिहास: इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI)

​विशिष्ट वक्ता सीए अजय जैन ने छात्रों को आईसीएआई के गौरवशाली इतिहास और उसकी कार्यप्रणाली से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि CA Act, 1949 के तहत स्थापित यह संस्था अपनी पारदर्शिता के लिए पूरी दुनिया में मिसाल है। पिछले 77 वर्षों के इतिहास में इस संस्था का एक भी प्रश्नपत्र लीक न होना इसकी विश्वसनीयता का सबसे बड़ा प्रमाण है। अजय जैन ने छात्रों को सलाह दी कि वे 12वीं कक्षा के तुरंत बाद ही इस प्रतिष्ठित पाठ्यक्रम में प्रवेश लेकर अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकते हैं।

​वैश्विक स्तर पर भारतीय सीए की बढ़ती धमक

​वर्तमान वाइस चेयरमैन सीए आयुष गोयल ने छात्रों के मन में उठने वाले सवाल “Why We Do CA?” (हम सीए क्यों करें?) का बहुत ही तार्किक उत्तर दिया। उन्होंने बताया कि भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट की मांग आज केवल देश तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के लगभग 15 देशों में भारतीय सीए की डिग्री को मान्यता प्राप्त है। यह युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करियर बनाने का एक बेहतरीन अवसर है। उन्होंने स्थानीय आंकड़ों का जिक्र करते हुए बताया कि अकेले आगरा जैसे शहर में लगभग 600 चार्टर्ड अकाउंटेंट अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जो शहर की मजबूत आर्थिक गतिविधियों को दर्शाता है।

​बिना आरक्षण और कम खर्च में ‘रॉयल’ करियर

​इस संगोष्ठी की सबसे महत्वपूर्ण जानकारी सीए पाठ्यक्रम की संरचना और इसकी पारदर्शिता को लेकर रही। छात्रों को बताया गया कि यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ कोई आरक्षण व्यवस्था लागू नहीं है; यहाँ केवल आपकी मेहनत और योग्यता ही सफलता का आधार बनती है।

​पाठ्यक्रम के आर्थिक पक्ष पर चर्चा करते हुए बताया गया कि:

  • कुल फीस: 4 वर्ष की अवधि वाले इस कोर्स की कुल फीस लगभग ₹77,000 है, जो अन्य प्रोफेशनल कोर्सेज की तुलना में बेहद कम है।
  • स्टाइपेंड (प्रशिक्षण भत्ता): आर्टिकलशिप के दौरान विद्यार्थियों को प्रथम वर्ष ₹5,000 और द्वितीय वर्ष ₹7,000 प्रतिमाह भत्ता भी मिलता है, जिससे पढ़ाई का बोझ कम हो जाता है।

​शिक्षाविदों की उपस्थिति और आभार

​संगोष्ठी की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. सी. के. गौतम ने की। कार्यक्रम के अंत में प्रो. अमित अग्रवाल ने सभी मुख्य अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन दिया। इस अवसर पर डॉ. ज्योत्सना शर्मा, डॉ. नीरज मनचंदा सहित वाणिज्य विभाग के समस्त शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे, जिन्होंने विशेषज्ञों से अपनी शंकाओं का समाधान भी किया।

निष्कर्ष

​आगरा कॉलेज में आयोजित यह संगोष्ठी न केवल सूचनात्मक थी, बल्कि उन छात्रों के लिए एक नई दिशा देने वाली साबित हुई जो अपनी मेहनत के दम पर एक प्रतिष्ठित मुकाम हासिल करना चाहते हैं। सीए का करियर आज के आर्थिक युग में स्थिरता और सम्मान दोनों की गारंटी देता है।

पाठकों के लिए सवाल: क्या आपको लगता है कि आज के डिजिटल युग में चार्टर्ड अकाउंटेंसी का महत्व और अधिक बढ़ गया है? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।।