वृंदावन। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इन दिनों उत्तर प्रदेश के आध्यात्मिक दौरे पर हैं। शुक्रवार की सुबह का सूर्योदय वृंदावन के लिए बेहद खास रहा, जब देश की प्रथम नागरिक सुरक्षा के कड़े घेरे को छोड़कर एक सामान्य भक्त की तरह विख्यात संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुँचीं। भक्ति और शक्ति के इस अनूठे मिलन ने न केवल ब्रजवासियों का ध्यान खींचा, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इस मुलाकात की सादगी चर्चा का विषय बनी हुई है।

​राधा केली कुंज आश्रम में सादगी भरा स्वागत

​शुक्रवार सुबह करीब 7:30 बजे, जब पूरा वृंदावन ‘राधे-राधे’ के उद्घोष से गूंज रहा था, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का काफिला छटीकरा रोड स्थित श्री हित राधा केली कुंज आश्रम पहुँचा। सफेद साड़ी में लिपटीं राष्ट्रपति की सादगी देखते ही बन रही थी। आश्रम की परंपरा के अनुसार, उन्होंने पूरी विनम्रता के साथ संत प्रेमानंद महाराज का अभिवादन किया।

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​लगभग आधे घंटे तक चली इस मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति और महाराज के बीच आध्यात्मिक संवाद हुआ। सूत्रों के अनुसार, प्रेमानंद महाराज ने राष्ट्रपति को ब्रज की महिमा और जन-सेवा के आध्यात्मिक महत्व के बारे में बताया। महाराज जी के वचनों को राष्ट्रपति ने बड़े ही ध्यानपूर्वक सुना, जो उनके सरल स्वभाव को दर्शाता है।

​सेवा और भक्ति का संगम: आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा

​राष्ट्रपति का यह दौरा केवल दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जन-कल्याण के कार्यों की भी झलक मिलेगी। आश्रम से निकलने के बाद राष्ट्रपति का अगला पड़ाव नीम करोली बाबा का स्मारक है। इसके अलावा, शाम को वे रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम में एक नए ऑन्कोलॉजी (कैंसर) ब्लॉक का उद्घाटन करेंगी, जो मथुरा-वृंदावन क्षेत्र के स्वास्थ्य ढांचे के लिए एक बड़ी सौगात साबित होगा।

​अपने प्रवास के दौरान, राष्ट्रपति साध्वी ऋतंभरा द्वारा स्थापित ‘वात्सल्य ग्राम’ भी जाएंगी। यह संस्था वर्षों से अनाथ बच्चों और बुजुर्गों के आश्रय के लिए मिसाल पेश कर रही है। राष्ट्रपति का यह कदम सामाजिक सरोकार और सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

​’नो-फ्लाई जोन’ और कड़े सुरक्षा इंतजाम

​राष्ट्रपति की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मथुरा जिला प्रशासन ने अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने आतंकी खतरों और सुरक्षा प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए पूरे जनपद को ‘नो-फ्लाई जोन’ घोषित कर दिया है।

  • पाबंदी की अवधि: 19 मार्च सुबह 10:00 बजे से 21 मार्च शाम 5:00 बजे तक।
  • क्या है प्रतिबंधित: ड्रोन, पतंग, गुब्बारे या किसी भी प्रकार के निजी फ्लाइंग ऑब्जेक्ट उड़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध।
  • पुलिस बल: चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल और खुफिया एजेंसियां तैनात हैं ताकि राष्ट्रपति की यात्रा निर्बाध रूप से संपन्न हो सके।

​गोवर्धन परिक्रमा और दंगहाटी मंदिर में प्रार्थना

​राष्ट्रपति के तीन दिवसीय दौरे का समापन 21 मार्च को होगा। कार्यक्रम के अनुसार, वे शनिवार को गोवर्धन स्थित प्रसिद्ध दंगहाटी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना करेंगी। इसके बाद वे ब्रज की सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए सात मील लंबी पारंपरिक गोवर्धन परिक्रमा करेंगी। यह पहली बार है जब कोई मौजूदा राष्ट्रपति इस तरह विस्तार से ब्रज की धार्मिक परंपराओं में भाग ले रहा है। परिक्रमा पूरी करने के बाद वे नई दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगी।

​यूपी के धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

​इससे पहले 19 मार्च को राष्ट्रपति मुर्मू के अयोध्या पहुँचने पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका भव्य स्वागत किया था। जानकारों का मानना है कि राष्ट्रपति की इस सक्रियता से उत्तर प्रदेश के धार्मिक पर्यटन सर्किट (अयोध्या-मथुरा-काशी) को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी। उनकी यह यात्रा संदेश देती है कि संवैधानिक शीर्ष पर बैठा व्यक्ति भी अपनी जड़ों और संस्कृति के प्रति उतना ही समर्पित है, जितना कि एक आम नागरिक।

निष्कर्ष

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की वृंदावन यात्रा केवल एक प्रोटोकॉल का हिस्सा नहीं, बल्कि श्रद्धा और सेवा का संगम है। प्रेमानंद महाराज के दर्शन से लेकर गोवर्धन की परिक्रमा तक, उनका यह दौरा ब्रज की संस्कृति के प्रति उनके गहरे सम्मान को प्रकट करता है। ऐसे समय में जब देश आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है, राष्ट्रपति का यह आध्यात्मिक झुकाव सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक बड़ा संकेत है।