आगरा के ऐतिहासिक एसएन मेडिकल कॉलेज (SN Medical College) और उससे संबद्ध अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले मरीजों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है। स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाने और मरीजों की भागदौड़ कम करने के लिए अस्पताल प्रशासन ने NextGen eHospital प्रणाली को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत उठाया गया यह कदम आगरा ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों से आने वाले हजारों मरीजों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

​अब मरीजों को सुबह 4 बजे से ओपीडी की पर्ची के लिए लाइनों में लगकर पसीने नहीं बहाने पड़ेंगे। तकनीक के इस दौर में अब एसएन अस्पताल भी पूरी तरह ‘स्मार्ट’ होने जा रहा है, जहां रजिस्ट्रेशन से लेकर जांच रिपोर्ट तक सब कुछ एक क्लिक पर उपलब्ध होगा।

​डिजिटल स्वास्थ्य सेवा की ओर बढ़ता आगरा

​एसएन मेडिकल कॉलेज उत्तर प्रदेश के सबसे पुराने और व्यस्त अस्पतालों में से एक है। यहाँ रोजाना हजारों की संख्या में मरीज परामर्श के लिए पहुँचते हैं। भारी भीड़ के कारण अक्सर पंजीकरण काउंटर पर अव्यवस्था का माहौल रहता था। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए NextGen eHospital प्रणाली शुरू की गई है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता लाना और इलाज की प्रक्रिया को त्वरित बनाना है।

​अब अस्पताल की सभी सेवाएं—जैसे पंजीकरण, लैब टेस्ट की रिपोर्ट और उपचार का विवरण—एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित होंगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि मानवीय गलतियों की गुंजाइश भी कम हो जाएगी।

​घर बैठे कराएं ओपीडी पंजीकरण: ये हैं 4 आसान तरीके

​नई प्रणाली के तहत अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की सुविधा के लिए पंजीकरण के कई विकल्प दिए हैं। अब आप अपनी सुविधा के अनुसार नीचे दिए गए तरीकों से डॉक्टर से मिलने का समय तय कर सकते हैं:

  1. ABHA (आभा) आधारित पंजीकरण: यदि आपके पास आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA ID) है, तो आप सिर्फ एक OTP के जरिए अपना पंजीकरण कर सकते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपके पुराने सभी मेडिकल रिकॉर्ड डिजिटल रूप में डॉक्टर के पास स्वतः उपलब्ध हो जाएंगे।
  2. ऑनलाइन पूर्व पंजीकरण (ORS): मरीज घर बैठे ही NextGen E-Hospital पोर्टल के माध्यम से अपनी ओपीडी बुक कर सकते हैं। आपको बस अपनी पसंद का विभाग चुनना है और तय समय पर सीधे परामर्श के लिए पहुंचना है।
  3. मोबाइल नंबर आधारित पंजीकरण: अगर आपके पास आभा आईडी नहीं है, तो आप अपने मोबाइल नंबर पर ओटीपी मंगाकर भी त्वरित पंजीकरण करा सकते हैं।
  4. पारंपरिक काउंटर सुविधा: जो लोग तकनीक से ज्यादा वाकिफ नहीं हैं, उनके लिए अस्पताल के काउंटर पर आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र के जरिए पंजीकरण की सुविधा पहले की तरह ही चालू रहेगी।

​आधार कार्ड लाना हुआ अनिवार्य: डिजिटल रिकॉर्ड का आधार

​इस पूरी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण नियम लागू किया है। अब इलाज के लिए आने वाले हर मरीज को अपना आधार कार्ड साथ लाना अनिवार्य होगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मरीज की पहचान और उसके पुराने उपचार के इतिहास को जोड़ने के लिए आधार कार्ड एक मुख्य कड़ी का काम करेगा।

​डिजिटलीकरण का एक बड़ा लाभ यह भी है कि अब मरीजों को भारी-भरकम फाइलें और पुरानी रिपोर्ट साथ लेकर चलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डॉक्टर आपके डिजिटल प्रोफाइल के जरिए ही जान सकेंगे कि आपको पहले क्या दवाएं दी गई थीं और आपकी पिछली जांच रिपोर्ट क्या कहती थी।

​जांच और उपचार प्रक्रिया भी होगी पेपरलेस

​NextGen E-Hospital सिर्फ रजिस्ट्रेशन तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में एसएन अस्पताल के भीतर होने वाली सभी पैथोलॉजी जांचें और एक्स-रे जैसी रिपोर्ट भी डिजिटल फॉर्मेट में उपलब्ध होंगी। मरीज अपने मोबाइल पर ही रिपोर्ट देख सकेंगे और डॉक्टर भी सीधे अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर इन्हें चेक कर पाएंगे। इससे कागजों के खोने का डर खत्म होगा और मरीज को रिपोर्ट लेने के लिए दोबारा लंबी लाइनों में खड़ा नहीं होना पड़ेगा।

​निष्कर्ष: स्वास्थ्य सेवाओं में एक नई क्रांति

​आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में NextGen E-Hospital प्रणाली का लागू होना आधुनिक चिकित्सा की दिशा में एक साहसिक कदम है। यह तकनीक न केवल डॉक्टरों के कामकाज को आसान बनाएगी, बल्कि मरीजों को वह सम्मान और सुविधा भी देगी जिसके वे हकदार हैं। हालांकि, इस बदलाव की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आम जनता इस डिजिटल माध्यम को कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से अपनाती है।

पाठकों के लिए सवाल: क्या आपको लगता है कि सरकारी अस्पतालों का पूरी तरह से डिजिटल होना आम मरीजों के लिए फायदेमंद साबित होगा? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।