
आगरा। ताजनगरी की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हुए एक बार फिर आगरा जनपद न्यायालय (दीवानी) को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। अज्ञात हमलावर द्वारा भेजे गए एक ईमेल ने न केवल कोर्ट प्रशासन की नींद उड़ा दी, बल्कि हजारों वादकारियों और वकीलों के बीच अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया। ईमेल में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई थी कि “लंच के बाद पूरे कोर्ट परिसर को बम से उड़ा दिया जाएगा।” इस सूचना के मिलते ही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने मोर्चा संभाल लिया।
सुरक्षा एजेंसियों के फूले हाथ-पांव, सघन चेकिंग अभियान शुरू
जैसे ही कोर्ट प्रशासन को ईमेल के जरिए इस धमकी की जानकारी मिली, पूरे परिसर में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (SSF) और पुलिस के आला अधिकारियों को सूचित किया गया। देखते ही देखते कोर्ट परिसर एक अभेद्य किले में तब्दील हो गया।
बम निरोधक दस्ते (Bomb Disposal Squad) और डॉग स्क्वायड को तत्काल मौके पर बुलाया गया। सुरक्षाकर्मियों ने न्यायालय के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली। वकीलों के चैंबर, कैंटीन, पार्किंग एरिया और अदालती कमरों की बारीकी से जांच की गई। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच कोर्ट में आने-जाने वाले हर व्यक्ति की मेटल डिटेक्टर से जांच की गई।
”लंच के बाद होगा धमाका” – ईमेल ने बढ़ाई चिंता
धमकी देने वाले शख्स ने ईमेल में बहुत ही कम शब्दों में अपनी बात लिखी थी, लेकिन उसका असर बहुत गहरा था। ईमेल में लिखा था कि तैयारी पूरी है और लंच के बाद दीवानी भवन को बम से दहला दिया जाएगा। दोपहर का समय होने के कारण कोर्ट में भारी भीड़ थी, जिसे देखते हुए पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती और बढ़ गई। एसीपी हरीपर्वत अक्षय महाडिक खुद फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और सुरक्षा घेरे का जायजा लिया।
25 फरवरी की यादें हुई ताजा: क्या यह किसी की शरारत है?
यह पहली बार नहीं है जब आगरा दीवानी को निशाना बनाया गया है। अभी हाल ही में 25 फरवरी को भी कोर्ट परिसर को इसी तरह बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। उस समय भी प्रशासन ने एहतियातन पूरे परिसर को खाली करा लिया था और घंटों तलाशी अभियान चला था। बार-बार मिल रही इन धमकियों ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या ये दोनों ईमेल एक ही स्रोत से आए हैं या फिर किसी ने जानबूझकर दहशत फैलाने के लिए यह तरीका अपनाया है। साइबर सेल की टीम उस आईपी एड्रेस (IP Address) को ट्रैक करने की कोशिश कर रही है, जिससे यह मेल भेजा गया था।
वकीलों और वादकारियों में दिखा डर का माहौल
सुरक्षा जांच के दौरान कोर्ट की कार्यवाही आंशिक रूप से प्रभावित हुई। दूर-दराज से आए वादकारियों के चेहरे पर डर साफ देखा जा सकता था। कई वकीलों का कहना है कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाओं से कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। हालांकि, एसीपी अक्षय महाडिक ने स्पष्ट किया कि “पूरी चेकिंग के दौरान अब तक कोई भी संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन हम किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरत रहे हैं।”
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े निर्देश
इस घटना के बाद आगरा पुलिस ने दीवानी परिसर की स्थायी सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करने के निर्देश दिए हैं। परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सादे कपड़ों में भी पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कोर्ट की गरिमा और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
निष्कर्ष (Conclusion)
आगरा कोर्ट को बार-बार मिल रही बम की धमकियां प्रशासन के लिए सिरदर्द बन गई हैं। हालांकि पुलिस इसे एक अफवाह या शरारत मानकर चल रही है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से कोई भी जोखिम नहीं लिया जा सकता। अब जरूरत है कि ऐसी धमकियों के पीछे छिपे असली चेहरों को बेनकाब किया जाए ताकि कोर्ट जैसी संवेदनशील जगह पर लोग बिना किसी डर के अपना काम कर सकें।
आपका क्या सोचना है? क्या आपको लगता है कि सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा के मौजूदा इंतजाम पर्याप्त हैं, या फिर तकनीक का इस्तेमाल कर इन धमकियों पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कानून की जरूरत है? अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताएं।



