
ग्रीन कॉरिडोर से बदलेगी पश्चिमी यूपी की सूरत; मथुरा, हाथरस और कासगंज के बीच का सफर भी होगा आसान, NHAI ने तय समय से पहले काम पूरा करने का बनाया लक्ष्य।
बरेली/आगरा: उत्तर प्रदेश में सड़कों का जाल बिछाने की दिशा में एक और बड़ा अध्याय जुड़ने जा रहा है। आगरा से बरेली के बीच घंटों का थकाऊ सफर और भारी जाम अब जल्द ही बीते कल की बात हो जाएगी। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने आगरा-बरेली एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। ₹7700 करोड़ की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का काम इतनी तेजी से चल रहा है कि इसके दो चरणों का लगभग 50% कार्य पूरा भी हो चुका है।
5 घंटे का सफर अब सिर्फ 120 मिनट में
वर्तमान में बरेली से आगरा जाने वाले यात्रियों को संकरी सड़कों और ट्रैफिक जाम की वजह से 5 से 6 घंटे का समय लग जाता है। लेकिन इस 228 किलोमीटर लंबे ‘फोर-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे’ के शुरू होते ही यह दूरी घटकर महज 2 से 2.5 घंटे रह जाएगी। NHAI के परियोजना निदेशक उत्कर्ष शुक्ला मिश्रा के अनुसार, इस प्रोजेक्ट को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है, लेकिन काम की रफ्तार को देखते हुए इसे समय से 2-3 महीने पहले ही जनता के लिए खोला जा सकता है।
15 जिलों की बदलेगी किस्मत, व्यापार को मिलेगी नई गति
यह एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आर्थिक रीढ़ साबित होगा। इससे आगरा, मथुरा, हाथरस, कासगंज, बदायूं और बरेली समेत लगभग 15 जिलों के लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। व्यापारियों के लिए माल की ढुलाई आसान होगी और पर्यटन के लिहाज से आगरा-मथुरा की कनेक्टिविटी बरेली और आसपास के इलाकों से मजबूत होगी।
इंजीनियरिंग का कमाल: फ्लाईओवर और पुलों का जाल
यात्रा को निर्बाध बनाने के लिए इस रूट पर आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जा रहा है:
20 नए फ्लाईओवर ताकि लोकल ट्रैफिक से बाधा न हो।
26 अंडरपास ग्रामीणों और छोटे वाहनों की सुविधा के लिए।
05 बड़े पुल और 06 रेल ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण युद्धस्तर पर जारी है।
चार चरणों में हो रहा है निर्माण: जानें कहां कितना हुआ काम?परियोजना की प्रगति को चार हिस्सों में बांटा गया है ताकि गुणवत्ता और गति बनी रहे:
पहला चरण | मथुरा से हाथरस | 66 किमी | 60% काम पूरा, कुछ हिस्सों में ट्रायल शुरू।
दूसरा चरण | हाथरस से कासगंज | 57 किमी | निर्माण कार्य लगभग पूरा, वाहनों का संचालन जारी।
तीसरा चरण | कासगंज से बदायूं | 46 किमी | 10% शुरुआती काम पूरा हो चुका है।
चौथा चरण | बदायूं से बरेली | – | 45% निर्माण कार्य सफलतापूर्वक संपन्न।

निष्कर्ष: विकास की नई राहआगरा-बरेली एक्सप्रेसवे के तैयार होने से न केवल समय और ईंधन की बचत होगी, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी। यह ग्रीन कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास में मील का पत्थर साबित होगा। जाम से आजादी और रफ्तार की इस नई सौगात का इंतजार अब खत्म होने की कगार पर है।




