
नए साल के जश्न से पहले ही वृंदावन के बाजार और गलियां हुईं हाउसफुल; जरूरी सामान और स्कूल वैन के लिए तरस रहे निवासी।
वृंदावन।वर्ष 2025 के अंतिम दिनों में ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन की अभिलाषा लेकर देश-दुनिया से श्रद्धालु कान्हा की नगरी पहुँच रहे हैं। लेकिन भक्ति के इस सैलाब ने वृंदावन की स्थानीय व्यवस्थाओं की कमर तोड़ दी है। पिछले तीन दिनों से हालात ये हैं कि मंदिर परिसर से लेकर शहर के मुख्य बाजारों तक, पैर रखने की भी जगह नहीं बची है।
मोहल्लों में ‘कर्फ्यू’ जैसे हालात, घरों में कैद हुए लोग
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर को जाने वाले रास्तों पर स्थित आधा दर्जन मोहल्लों—मनीपाड़ा, होली गली, ठाकुर गली, दुसायत, बिहारीपुरा और जंगलकट्टी—के निवासियों का जीवन दूभर हो गया है। श्रद्धालुओं की अटूट कतारों के कारण स्थानीय लोग अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं।
हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बीमार बुजुर्गों को दवा दिलाने ले जाना हो या बच्चों को स्कूल भेजना, सब कुछ ठप पड़ा है। गलियों में लगी रेलिंग और बेतहाशा भीड़ के कारण स्कूल वैन भी अंदर नहीं आ पा रही हैं।
दैनिक दिनचर्या पर पड़ा बुरा असर
स्थानीय निवासियों के अनुसार, अब उनकी दिनचर्या मंदिर के ‘पट’ खुलने और बंद होने के समय पर निर्भर हो गई है। खरीददारी की किल्लत: सुबह 7 बजे से ही भीड़ का दबाव शुरू हो जाता है, जो दोपहर 1 बजे तक रहता है। ऐसे में दूध और सब्जी जैसी जरूरी चीजों के लिए लोग दोपहर का इंतजार करते हैं जब मंदिर के पट बंद होते हैं।
सफाई व्यवस्था ठप: भीड़ के कारण नगर निगम की कूड़ा गाड़ी भी गलियों तक नहीं पहुँच पा रही है, जिससे घरों में कचरे का ढेर जमा हो रहा है।
सिलेंडर की समस्या: यदि किसी के घर की रसोई गैस खत्म हो जाए, तो भीड़ छंटने तक नया सिलेंडर घर लाना नामुमकिन है।
नए साल तक जारी रह सकती है भारी भीड़
प्रशासनिक अनुमान के मुताबिक, नए साल के स्वागत के लिए यह भीड़ अभी दो-तीन दिन और बढ़ेगी। शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक बाजार पूरी तरह पैक रहते हैं, जिससे पैदल चलना भी दूभर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को दर्शनार्थियों के साथ-साथ यहाँ रहने वाले नागरिकों की सुविधाओं का भी ध्यान रखना चाहिए ताकि आपातकालीन स्थिति में कम से कम रास्ता मिल सके।




