लखनऊ। क्या आपके घर में पक्का शौचालय है? पीने के पानी का मुख्य स्रोत क्या है? क्या आप खाना पकाने के लिए एलपीजी सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं या पारंपरिक चूल्हे का? सुनने में ये सवाल साधारण लग सकते हैं, लेकिन यही वो 33 सवाल हैं जो अगले एक दशक के लिए उत्तर प्रदेश के विकास, बजट और सरकारी योजनाओं की दिशा तय करेंगे।

​उत्तर प्रदेश अब अपनी सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायद यानी ‘जनगणना-2027’ के लिए पूरी तरह तैयार है। इस बार की जनगणना पारंपरिक कागजों के ढेर पर नहीं, बल्कि आपके स्मार्टफोन और डिजिटल पोर्टल पर होगी। यह बदलाव न केवल प्रक्रिया को तेज बनाएगा, बल्कि डेटा की सटीकता को भी सुनिश्चित करेगा।

​डिजिटल जनगणना: तकनीक और पारदर्शिता का संगम

​इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘पूरी तरह डिजिटल’ होना है। राज्य सरकार ने इसे पारदर्शी बनाने के लिए मोबाइल तकनीक का सहारा लिया है। यदि आप अपना मोबाइल नंबर प्रगणक (Enumerator) के पास दर्ज कराते हैं, तो जनगणना की प्रक्रिया पूरी होते ही आपके फोन पर एक पुष्टिकरण (Confirmation) मैसेज आएगा। यह इस बात का प्रमाण होगा कि आपकी जानकारी सुरक्षित रूप से सरकारी डेटाबेस में दर्ज हो गई है।

​17 से 20 फरवरी: लखनऊ में शुरू हुआ महा-प्रशिक्षण

​जनगणना को निर्बाध रूप से संपन्न कराने के लिए उत्तर प्रदेश के 27 जिलों के 285 मास्टर ट्रेनरों का चार दिवसीय विशेष आवासीय प्रशिक्षण लखनऊ के राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान में शुरू हो गया है। 17 से 20 फरवरी तक चलने वाले इस शिविर में आगरा, वाराणसी, मेरठ, गाजियाबाद और झांसी जैसे प्रमुख जिलों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

​इन प्रशिक्षकों को एचएलओ (हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन) एप, पोर्टल के उपयोग और डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फील्ड में जाने वाले प्रगणक किसी भी तकनीकी समस्या का सामना न करें।

​स्वगणना (Self-Enumeration): खुद दर्ज करें अपनी जानकारी

​सरकार ने इस बार जनता को एक विशेष सुविधा दी है—स्वगणना। 22 मई से 20 जून तक प्रस्तावित मुख्य जनगणना से पहले, 7 से 21 मई तक आम नागरिक स्वयं पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी भर सकेंगे। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो अपनी गोपनीयता और समय को प्राथमिकता देते हैं। इसके बाद प्रगणक केवल आपके द्वारा दी गई जानकारी के सत्यापन के लिए घर आएंगे।

​वो 33 सवाल जो बदलेंगे आपके इलाके की सूरत

​जनगणना के पहले चरण में मकान सूचीकरण (House Listing) होगा। इसमें कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिन्हें मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा गया है:

  1. घर की संरचना: मकान कच्चा है या पक्का? छत और दीवारें किस सामग्री से बनी हैं? घर में कितने कमरे हैं और कितने विवाहित जोड़े वहां रहते हैं?
  2. बुनियादी सुविधाएं: क्या घर में बिजली कनेक्शन है? शौचालय की सुविधा घर के अंदर है या बाहर? पीने के पानी की पहुंच कहां तक है?
  3. परिसंपत्तियां और जीवनशैली: क्या परिवार के पास साइकिल, बाइक, कार या इंटरनेट कनेक्शन है? घर का मुख्य अनाज क्या है? मुखिया पुरुष है या महिला और उनका सामाजिक वर्ग क्या है?
  4. ​क्या जानकारी न देना या गलत बताना भारी पड़ेगा?

​अक्सर लोगों के मन में यह डर होता है कि जनगणना का संबंध नागरिकता से है। विशेषज्ञों का कहना है कि जनगणना ‘जनगणना अधिनियम-1948’ के तहत एक कानूनी प्रक्रिया है। सही जानकारी देना हर नागरिक का कर्तव्य है। यदि कोई जानबूझकर गलत जानकारी देता है या सहयोग करने से इनकार करता है, तो कानून में जुर्माने का प्रावधान है।

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​हालांकि, यह समझना जरूरी है कि इसका उद्देश्य किसी की नागरिकता छीनना नहीं, बल्कि संसाधनों का सही बंटवारा करना है। यदि सरकार को पता ही नहीं होगा कि किस मोहल्ले में कितने बच्चे हैं, तो वहां स्कूल या टीकाकरण केंद्र कैसे बनेगा?

​निष्कर्ष: सहयोग ही है विकास की कुंजी

​यूपी डिजिटल जनगणना 2027 केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की जरूरतों को समझने का एक जरिया है। आपके द्वारा दी गई एक-एक जानकारी यह तय करेगी कि आपके क्षेत्र में कितनी सड़कें बनेंगी, कितने नए अस्पताल खुलेंगे और बिजली की कितनी आपूर्ति चाहिए होगी। एक जागरूक नागरिक के नाते, इस डिजिटल बदलाव का हिस्सा बनना और सटीक जानकारी देना हम सबकी जिम्मेदारी है।

पाठकों के लिए एक सवाल:

क्या आप डिजिटल जनगणना के लिए ‘स्वगणना’ (Self-Enumeration) विकल्प का उपयोग करना पसंद करेंगे या आप चाहेंगे कि प्रगणक आपके घर आकर जानकारी दर्ज करें? अपने विचार हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।