नई दिल्ली: साल 2026 का पहला खगोलीय जमावड़ा लगने को तैयार है। आगामी 17 फरवरी, मंगलवार को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। खगोल विज्ञान के नजरिए से यह एक अद्भुत घटना हो सकती है, लेकिन भारतीय जनमानस और वैदिक ज्योतिष में ग्रहण को एक संवेदनशील समय माना जाता है। इस बार का ग्रहण ‘कंकणाकृति सूर्य ग्रहण’ होगा, जिसे लेकर आम लोगों के मन में उत्सुकता और आशंकाएं दोनों हैं।

​सूर्य ग्रहण 2026: क्या है समय और भारत पर प्रभाव?

​17 फरवरी को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर शुरू होगा और इसका समापन शाम 7 बजकर 58 मिनट पर होगा। इस ग्रहण का कुल पर्वकाल लगभग 4 घंटे 32 मिनट का रहने वाला है।

​ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, हालांकि यह ग्रहण भारत के अधिकांश हिस्सों में सीधे तौर पर दृश्य नहीं होगा, लेकिन इसके आध्यात्मिक और ऊर्जागत प्रभाव से इनकार नहीं किया जा सकता। कंकणाकृति ग्रहण वह स्थिति है जब चंद्रमा सूर्य के बीचों-बीच आ जाता है, जिससे सूर्य एक सुनहरी अंगूठी (Ring of Fire) की तरह दिखाई देता है।

​सूतक काल: कब से शुरू होगी वर्जित अवधि?

​हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, सूर्य ग्रहण के दौरान ‘सूतक काल’ का विशेष महत्व होता है। मान्यताओं के मुताबिक, सूर्य ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से ठीक 12 घंटे पहले प्रारंभ हो जाता है। इस आधार पर, मंगलवार भोर (सुबह) 4 बजकर 26 मिनट से ही सूतक काल शुरू हो जाएगा।

​सूतक काल को एक अशुद्ध समय माना जाता है, जिसमें प्रकृति की ऊर्जा नकारात्मक हो जाती है। यही कारण है कि इस दौरान कोई भी नया काम शुरू करने, शुभ मांगलिक कार्य करने या मंदिर में पूजा-पाठ करने की मनाही होती है।

​ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से बचने के अचूक उपाय

​ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण के दौरान ब्रह्मांड में फैली नकारात्मक तरंगों का असर सीधे तौर पर मानव मन और शरीर पर पड़ता है। इन दुष्प्रभावों को कम करने के लिए हमारे ऋषि-मुनियों ने कुछ विशेष उपाय बताए हैं:

​1. मंत्रों का शक्तिशाली उच्चारण

​ग्रहण काल में मौन रहने या केवल ईश्वर का ध्यान करने की सलाह दी जाती है। विशेष रूप से सूर्य देव के बीज मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी होता है। आप ‘ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम:’ या ‘ऊँ घृणिः सूर्याय नमः’ का जाप कर सकते हैं। मंत्रों का तेज स्वर में उच्चारण आपके आसपास एक सुरक्षा कवच तैयार करता है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव क्षीण हो जाता है।

​2. तुलसी और कुश का उपयोग

​ग्रहण के दौरान भोजन और जल दूषित हो जाता है। इससे बचाव के लिए ग्रहण शुरू होने से पहले ही घर में रखे दूध, दही, घी और पीने के पानी के बर्तनों में तुलसी की पत्तियां या ‘कुश’ (एक विशेष प्रकार की घास) डाल देनी चाहिए। तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल और शुद्धिकरण के गुण होते हैं जो भोजन को दूषित होने से बचाते हैं।

​3. स्नान और दान का महत्व

​ग्रहण समाप्त होने के तुरंत बाद घर की साफ-सफाई करना अनिवार्य है। पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें और स्वयं भी स्नान करें। ग्रहण के बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार अनाज, पुराने कपड़े या तिल का दान करना चाहिए। दान देने से ग्रहण के कारण लगे ‘दोष’ शांत होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है।

​गर्भवती महिलाएं रखें विशेष ध्यान: क्या करें और क्या नहीं?

​सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण की किरणें गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं।

  • क्या न करें: ग्रहण काल के दौरान सुई में धागा न डालें, कैंची या चाकू का उपयोग न करें। कुछ भी काटने, छीलने या छौंकने (खाना पकाने) से बचें।
  • क्या करें: इस दौरान गर्भवती महिलाओं को भगवान का नाम लेना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि वे घर के भीतर ही रहें। ग्रहण के दौरान बाहर निकलना और सीधे सूर्य की ओर देखना बिल्कुल वर्जित है।

​ग्रहण के बाद घर की शुद्धि कैसे करें?

​ग्रहण खत्म होने के बाद मंदिर की मूर्तियों को स्पर्श न करें। सबसे पहले घर में झाड़ू-पोछा लगाकर गंगाजल छिड़कें। इसके बाद मंदिर की सभी मूर्तियों और चित्रों को गंगाजल से स्नान कराएं। ताजा भोजन बनाएं और पिछले बचे हुए भोजन का त्याग कर दें (यदि उसमें तुलसी न डाली गई हो)। गाय को हरा चारा खिलाना इस दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है क्योंकि यह मंगलवार का दिन है।

​निष्कर्ष

​सूर्य ग्रहण 2026 न केवल एक खगोलीय घटना है, बल्कि यह आत्म-मंथन और शुद्धि का समय भी है। विज्ञान जहां इसे छाया का खेल मानता है, वहीं धर्म इसे प्रकृति के संतुलन और अनुशासन से जोड़ता है। ऊपर बताए गए सरल उपायों को अपनाकर आप इस अवधि को शांतिपूर्ण और सकारात्मक बना सकते हैं।