
माघ मास की संकष्टी चतुर्थी पर बन रहा है विशेष संयोग, शुभ मुहूर्त में पूजा करने से दूर होंगे सारे विघ्न; ज्योतिषाचार्यों ने दी विधि की जानकारी।
आगरा।हिंदू धर्म में संतान की लंबी आयु, बेहतर स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए ‘सकट चौथ’ (संकष्टी चतुर्थी) का विशेष महत्व है। इस वर्ष माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि यानी 6 जनवरी को यह पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा। इस विशेष दिन पर माताएं निर्जला व्रत रखकर भगवान गणेश, सकट माता और चंद्र देव की उपासना करती हैं।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार का सकट चौथ विशेष है क्योंकि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है, जो भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला माना जाता है।
शुभ मुहूर्त और पंचांग गणना
पंचांग के विश्लेषण के अनुसार, चतुर्थी तिथि की शुरुआत 6 जनवरी को सुबह 8:02 बजे से होगी, जो पूरे दिन प्रभावी रहेगी। भक्तों के लिए राहत की बात यह है कि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 7:31 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक रहेगा।
भद्रा का ध्यान रखें:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल में शुभ कार्य वर्जित होते हैं। 6 जनवरी को सुबह 7:15 से 8:02 बजे तक भद्रा का साया रहेगा। अतः भद्रा समाप्ति के बाद ही पूजा प्रारंभ करना श्रेष्ठ होगा।
पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त: प्रातः 8:05 से 9:49 बजे तक।
पूजन विधि: ऐसे करें गजानन को प्रसन्न
सकट चौथ पर भगवान गणेश की विधिवत पूजा का विधान है। ज्योतिषाचार्यों ने इसकी सरल विधि साझा की है:
स्थापना: सबसे पहले एक लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। यदि प्रतिमा न हो, तो पीले चंदन से गणपति का चित्र भी बनाया जा सकता है।
अभिषेक व श्रृंगार: गणेश जी को रोली, अक्षत, पुष्प माला और दूर्वा (घास) अर्पित करें। दूर्वा गणपति को अत्यंत प्रिय है।
भोग: इस दिन तिल का विशेष महत्व है। भगवान को तिल से बने लड्डू या तिलकुटा का भोग लगाएं।
कथा व आरती: धूप-दीप जलाकर श्रद्धापूर्वक संकट चौथ की व्रत कथा पढ़ें और मंत्रों का जाप करें।
चंद्र दर्शन का महत्व
सकट चौथ का व्रत रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही संपन्न माना जाता है। महिलाएं दिन भर उपवास रखती हैं और रात में चंद्रमा के उदय होने पर दूध और जल से अर्घ्य प्रदान करती हैं। मान्यता है कि इससे संतान पर आने वाले सभी संकट टल जाते हैं और परिवार में सुख-शांति का वास होता है।




